झाबुआ संजय जैन-ब्यूरो। प्रतिदिन 50 आराधको के द्वारा 1 लाख महामंत्र के जाप किये जा रहे है। यशवंत,निखिल, शारदुल, जीनाश भंडारी परिवार द्वारा लाभ लिया गया है। आराधना 1 अगस्त से प्रारम्भ हुई एवं 10 अगस्त को सभी तपस्वी के पारणा के साथ इसकी पूर्णाहुति होगी।

अरिहन्त पद की प्राप्ति होती है..  

एक लाख महामन्त्र नवकार के जाप से अरिहन्त पद की प्राप्ति होती है। यह महामन्त्र सृष्टि का श्रृंगार है, पृथ्वी का आधार है। यह मंत्र कामधेनु, कल्पलक, चिंतामणि से भी अधिक है। यह इच्छित फल देता है। सभी विघ्न का नाश करता है। अरह का अर्थ सर्वज्ञ है, जो अह है अर्थात जिनके भीतर पूर्ण ज्ञान् प्रकट हो । प्राचीन समय में जैन शब्द प्रचलित नही था। मंत्र वही सिद्ध होता है, जिसका उच्चारण नाभि से होता है। अरहन्ताणं शब्द का उच्चारण ही सही है।

संसार सागर में डूबने वाले को बचाने हेतु यह तिनके के समान‌ है। जैन दर्शन में शत्रू शब्द का उल्लेख नही है। यह सभी मन्त्रों का सिरदार है तथा चौदह पूर्व का सार है। नव लाख मन्त्र के जाप से नरक के समस्त दुखों का नाश होता है। करोड़ के जाप से तीसरे भव में मुक्ति प्राप्त होती है। यदि हम अपने कर्मो को शत्रु मानते है,तो अह के पूजारी नहीं है। यदि हमें अपने भीतर मौजूद अंधकार को दूर हटाना है,तो ज्ञानरूपी दिपक को प्रज्जवलित करना होगा ये उद्‌गार साध्वी जी श्री कल्पदर्शिताश्रीजी ने अपने प्रवचन में व्यक्त किये।

निगोद से बाहर आने का मार्ग प्रशस्त करता है...

पू.साध्वी भगवान श्री अविचल श्री जी महाराज साहेब ने बताया कि इस मंत्र  के एक शब्द पर 1008, विधाए बिराजमान है। निगोद से बाहर आने का मार्ग प्रशस्त करता है। निगोद में जीव एक दूसरे से टकरा - टकरा कर जीवन जीते है। सिद्ध पद का रंग लाल है जो प्रेम का प्रतिक है। इस मन्त्र के जाप से भूत प्रेत पिशाच, भय सभी दूर टल जाते हैं। रोगी को निरोगी रागी को विरागी, भोगी को त्यागी, आपदा को दूर कर सम्पदा प्रदान करते हैं ।पापी को पावन करने में इस महामंत्र का जाप सहायक बनाता है। यह मंत्र इस ससार रूपी समुद्र से पार होने हेतु यह तरणतारण जहाज के समान है।

यह थें उपस्थित..

धर्मसभा में वरिष्ठ- सोहनलाल कोठारी हमीरल कासवा, अशोक कटारिया, श्री संघ अध्यक्ष संजय मेहता, कमलेश भंडारी, अनिल रूनवाल, रिंकू रुनवाल, प्रदीप भण्डारी , इन्द्रसेन संघवी, महेश कोठारी और  राजेंद कटारिया उपस्थित थे।