नाबालिगों के हाथ में वाहनों की चाबी थमा रहे अभिभावक
आठ माह में सड़क दुर्घटना में 125 नाबालिग हुए शिकार,12 ने गवांई जान
झाबुआ। संजय जैन-सह संपादक। बदलते समय के साथ आजकल के माता-पिता भी एडवांस हो गए हैं,जहां पहले बच्चों की परवरिश को एक जिम्मेदारी समझा जाता था। आज बदलती पीढ़ी के साथ बच्चों को मशीन बनाने की होड़ लगी हुई है। छोटे बच्चों को बाइक,कार ट्रेक्टर व बड़ी गाडिय़ों की चाबी थमाने का ट्रेंड शहर व जिले में बढ़ चुका है।
नाबालिगों के हाथ में वाहनों की चाबी थमा रहे अविभावक
आज शहर व जिले की सड़कों पर नाबालिग बच्चे सरपट कार दौड़ा रहे हैं। जबकि व्हीकल एक्ट की गाइडलाइन के अनुसार 18 वर्ष की आयु से कम बच्चों को वाहन चलाना और देना दोनों दंडनीय अपराध हैं,लेकिन शहर व जिले में 12 से 16 वर्ष के बच्चे भी बेखौफ वाहन दौड़ा रहे हैं। बीते आठ माह में शहर में 125 नाबालिग सड़क हादसे का शिकार हुए हैं। जबकि 12बच्चों ने अपनी जान गंवायी है। इसके बावजूद भी अभिभावक बच्चों को अपने वाहनों की चाबी थमा रहे हैं।
देखने को मिल रहे, आए दिन नाबालिग बच्चों के सड़क हादसे के मामले
जिला अस्पताल में आए दिन नाबालिग बच्चों के सड़क हादसे के मामले देखने को मिल रहे हैं। इसमें या तो बच्चे गंभीर रूप से शिकार हो रहे हैं। या फिर उन्होंने किसी को अपना शिकार बनाया है। जनवरी 2025 से अब तक 125 नाबालिग बच्चे सड़क हादसों में घायल हुए हैं। वहीं 12 बच्चों की दुर्घटना में मौत हुई है। इसके बाद भी अविभावक चेते नहीं। नतीजन सड़क पर आपको 12 से 16 वर्ष की कम उम्र के बच्चे वाहन चलाते दिख जाएंगे। जबकि यह नाबालिग वाहनों को चलाते हुए जिम्मेदार यातायात विभाग को कभी दिखाई हीं नहीं देते हैं।
चला रहे नाबालिग ट्रेक्टर व बड़ी गाडिया
शहर व जिले में महज कार व बाइक को चलाने में नाबालिग पीछे नहीं,बल्कि ट्रेक्टर व बड़ी गाडिया भी चला रहे हैं। शहर व जिले में दर्जनों नाबालिग बच्चे ट्रेक्टर व बड़ी गाडिय़ा चलाते हुए दिख रहे हैं। जबकि ट्रेक्टर व बड़ी गाडिय़ा अविभावक के नाम पर रजिस्टर्ड है और बिना ड्राइविंग लाइसेंस के ये वाहन चला रहे हैं। नाबालिग ट्रेक्टर चलाते हुए ग्रामीण क्षेत्र में इनकी संख्या काफी अधिक है।
हादसों का रहता है डर
नाबालिग बच्चों द्वारा वाहन को सरपट दौड़ाने से हादसों का खतरा बना रहता है। कई मामले ऐसे भी आए हैं जहां नाबालिग बच्चों ने बुजुर्गों और राहगीरों को अपना शिकार बनाया है। क्राइम रिकॉर्ड के अनुसार बीते वर्ष से अब तक 60 लोग बच्चों के द्वारा सड़क हादसे का शिकार हुए।
अविभावक साथ में
शहर व जिले में आपको कई ऐसे अभिभावक देखने मिल जाएंगे जो नाबालिग बच्चों के साथ बाजार में बाइक व कार से आते हैं। इसमें नाबालिग बच्चे वाहन को चलाते दिखते हैं। समय के बदलते परिवेश में अभिभावकों का कम उम्र के बच्चों को वाहन थमाना हादसों को न्यौता दे रहा है।
हिदायत दी है,नहीं माने तो होगी कार्रवाई
नाबालिग बच्चों को वाहन देने पर कार्रवाई की है और कुछ नाबालिग पर 6 हजार का चालान किया गया है। बच्चों के अभिभावकों को हिदायत दी गई है कि उन्हें वाहन न दिया जाए नहीं तो अभिभावकों पर कार्रवाई की जाएगी।
कमल सिंह मिंडल- यातायात प्रभारी, झाबुआ

