भोपाल के सिद्धांता अस्पताल पर बड़ी कार्रवाई, CMHO जांच के बाद लाइसेंस निरस्त
भोपाल| भोपाल के शिवाजी नगर में स्थित सिद्धांता सुपर स्पेशलिटी अस्पताल पर नियमों का पालन न करने के कारण गाज गिरी है। स्वास्थ्य विभाग की जांच टीम द्वारा पाई गई गंभीर कमियों के बाद CMHO ने बड़ा कदम उठाते हुए 31 अगस्त 2026 को अस्पताल का पंजीयन और संचालन लाइसेंस तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया। इस आदेश के बाद अब अस्पताल में नए मरीजों को भर्ती करने और चिकित्सा सेवाओं के संचालन पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। हालांकि, अस्पताल में पहले से भर्ती मरीजों के इलाज और उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी प्रबंधन पर ही रहेगी और किसी भी मरीज को ऐसी स्थिति में डिस्चार्ज या कहीं और ट्रांसफर नहीं किया जाएगा, जिससे उसके स्वास्थ्य पर कोई बुरा असर पड़े।
अस्पताल के निरीक्षण के दौरान इमरजेंसी, ICU, पैथोलॉजी और फायर सेफ्टी जैसे कई विभागों में भारी अनियमितताएं सामने आईं। इमरजेंसी विभाग में केवल एक बीपी मशीन और एक ऑक्सीजन सिलेंडर ही मौजूद मिला, वहीं जरूरी क्रैश कार्ट पर ताला लटका पाया गया। इसके अलावा, डायलिसिस यूनिट में मरीजों की सीरोलॉजी रिपोर्ट और संक्रमण नियंत्रण के जरूरी इंतजाम नहीं मिले, साथ ही एक टेक्नीशियन के योग्यता दस्तावेज भी नदारद थे। ICU में संक्रमित मरीजों के लिए आरक्षित केबिनों में सामान्य मरीज भर्ती पाए गए और ऑन-ड्यूटी डॉक्टर से जुड़े आवश्यक कागजात भी प्रस्तुत नहीं किए गए।
निरीक्षण टीम को OPD और रेडियोलॉजी विभाग में भी कई खामियां मिलीं। कई OPD कमरों में सूचना पट्ट के अनुसार डॉक्टर मौजूद नहीं थे। एक्स-रे, सोनोग्राफी और CT स्कैन विभाग में सुरक्षा मानकों को पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा था, जहां मरीजों को बिना लेड एप्रन और थायरॉयड कॉलर के ही रेडिएशन के संपर्क में लाया जा रहा था। मोबाइल एक्स-रे का अनधिकृत इस्तेमाल हो रहा था और TMT जांच के दौरान लाइफ-सेविंग डिफिब्रिलेटर तक उपलब्ध नहीं था। पैथोलॉजी में थर्मामीटर के तापमान आंकड़ों में गड़बड़ी और फायर सेफ्टी के लिए वैकल्पिक सीढ़ियों का न होना अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही को उजागर करता है।
जांच में मिलीं चौंकाने वाली कमियां:
1. इमरजेंसी रूम सिर्फ नाम का — अंदर ब्लड सैंपल का खेल
मुख्य द्वार के अंदर दाहिनी तरफ कक्ष पर "इमरजेंसी रूम" का बोर्ड था, लेकिन अंदर मरीजों के ब्लड सैंपल लिए जा रहे थे। वहां न कोई डॉक्टर था, न ही मरीजों का परीक्षण हो रहा था। गंभीर मरीज भ्रम में पड़कर जान गंवा सकता है।
2. जान बचाने वाले उपकरण ताले में बंद — डिफिब्रिलेटर तक नहीं
इमरजेंसी कक्ष में डिफिब्रिलेटर तक नहीं मिला। Crash Cart और Emergency Medicine Drawer निरीक्षण के समय लॉक पाए गए।
3. ट्रायज एरिया में ड्रेसिंग
जहां गंभीर मरीजों की छंटनी होनी चाहिए, वहां बेड लगाकर ड्रेसिंग की जा रही थी।
4. OPD में डॉक्टर ही नहीं, सूचना पटल पर फर्जी टाइमिंग
OPD कक्ष-01 में डॉ. राहुल पेसवानी मौजूद थे, लेकिन सूचना पटल पर न समय था न विशेषज्ञता का उल्लेख। अन्य OPD कक्ष में भी डॉक्टर सूचना पटल के समय पर मौजूद नहीं थे।
5. डायलिसिस वार्ड में बड़ा खतरा — बिना डॉक्टर, बिना रिपोर्ट, बिना सेफ्टी के डायलिसिस
मुख्य द्वार के बाएं तरफ डायलिसिस कक्ष में 7 बेड पर डायलिसिस चल रही थी, लेकिन ड्यूटी पर एक भी डॉक्टर नहीं, सिर्फ 2 टेक्नीशियन। किसी मरीज की सीरोलॉजी रिपोर्ट नहीं। सीरो-पॉजिटिव केस के लिए अलग मशीन या व्यवस्था नहीं। टेक्नीशियन नीरज शर्मा व सुरेश वासुनिया के पास अर्हता प्रमाण-पत्र नहीं। एक प्रशिक्षु युवती वंदना पटेल बिना ID के ड्यूटी कर रही थी।
6. रेडियोलॉजी में जान से खिलवाड़
मोबाइल एक्स-रे यूनिट से अप्रशिक्षित स्टाफ रोशन मालवीय एक्स-रे कर रहा था। संकीर्ण कमरे में न लेड एप्रिन, न थायरॉइड कॉलर। मरीज को भी एक्स-रे रूम में बैठाकर एक्स-रे किया जा रहा था। AERB मापदंडों का उल्लंघन, प्लाई की पार्टिशन से बना एक्स-रे रूम।
7. TMT रूम में डॉक्टर नहीं
TMT (ट्रेड मिल टेस्ट) कक्ष में इमरजेंसी के लिए डिफिब्रिलेटर नहीं। टेक्नीशियन ने बताया कि जांच डॉ. गिरीश राजपाल करते हैं, पर मौके पर मौजूद नहीं।
8. PET-CT स्कैन रूम में कबाड़
रेडिएशन रोकने के AERB मापदंडों का पालन नहीं। PET-CT स्कैन रूम और कंसोल रूम में सिर्फ ग्लास पैनल। स्कैन रूम को स्टोरेज रूम बनाया गया था, अंदर डस्टबिन रखी थी। मरीज का चेंजिंग रूम 4x4 फीट के रेडियो हजार्ड रूम में था, हॉट लैब में भारी सीलन।
9. संक्रमित मरीजों के केबिन में असंक्रमित मरीज भर्ती — संक्रमण का खतरा
ICU और ICCU के बीच संक्रमित मरीजों के दो केबिन में कोई संक्रमित मरीज नहीं, बल्कि असंक्रमित मरीज भर्ती थे। Fumigation और कल्चर रिपोर्ट का कोई रिकॉर्ड नहीं।
10. फर्जी RMO?
ICU में RMO के रूप में सेवाएं दे रहे डॉ. पी.पी. मिश्रा (आधार नं. 904761322097) का MPMC रजिस्ट्रेशन निरीक्षण के समय उपलब्ध नहीं कराया गया।
11. फायर सेफ्टी फेल + बिना माइक्रोबायोलॉजिस्ट के कल्चर रिपोर्ट
ICU में सारे अग्निशामक यंत्र (Fire Extinguisher) खाली पाए गए, जबकि ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन जारी था। ICU मरीजों की कल्चर रिपोर्ट माइक्रोबायोलॉजिस्ट की जगह पैथोलॉजिस्ट साइन कर रहे थे, जबकि माइक्रोबायोलॉजिस्ट अस्पताल में है ही नहीं।

