किसान महापंचायत का असर, दिल्ली ट्रैफिक एडवाइजरी जारी; इन रास्तों से बचें
नई दिल्ली: देश बचाओ मोर्चा के आह्वान पर मंगलवार को दिल्ली स्थित किसान घाट पर एक विशाल महारैली का आयोजन किया जा रहा है। इस प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य भारत-अमेरिका मुक्त व्यापार समझौते को रद्द कराना और किसानों की विभिन्न लंबित मांगों को सरकार के समक्ष मजबूती से उठाना है। इस राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन में देश भर के लगभग 550 किसान संगठन और नागरिक समाज (सिविल सोसाइटी) से जुड़े प्रतिनिधि एक साथ मंच साझा करते नजर आएंगे।
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने जारी की एडवाइजरी, यात्रियों के लिए सतर्कता निर्देश
राजधानी में इतने बड़े पैमाने पर होने वाले प्रदर्शन और रैली को ध्यान में रखते हुए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने आम जनता के लिए विस्तृत यातायात निर्देश जारी किए हैं। पुलिस के अनुसार सुबह 8:30 बजे से आवश्यकतानुसार विभिन्न मार्गों पर ट्रैफिक प्रतिबंध और रूट डायवर्जन लागू किए जा सकते हैं। सत्याग्रह मार्ग, वेलोड्रोम रोड और राजघाट डीटीसी डिपो रोड के आसपास के क्षेत्रों में भारी जाम की संभावना जताई गई है। हवाई अड्डे या रेलवे स्टेशन की ओर जाने वाले यात्रियों को असुविधा से बचने के लिए पर्याप्त समय हाथ में रखकर निकलने की सलाह दी गई है।
आंदोलन की पृष्ठभूमि और प्रशासनिक चुनौतियाँ
हालिया जनांदोलनों की श्रृंखला के बाद अब किसान संगठनों के इस बड़े जमावड़े ने स्थानीय प्रशासन और पुलिस के लिए सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती बढ़ा दी है। किसान नेता इस आयोजन को सरकार की किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ एक निर्णायक लड़ाई करार दे रहे हैं। हालांकि, आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल गुरनाम सिंह चढूनी की गिरफ्तारी और हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच इस महारैली का जमीनी स्तर पर कितना प्रभाव देखने को मिलता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
व्यापार संधि से कृषि क्षेत्र और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर खतरे की आशंका
किसान संगठनों का स्पष्ट तर्क है कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार संधि लागू होने से देश के गेहूं, धान, डेयरी और सब्जी उत्पादक किसानों की आजीविका पर सीधा प्रहार होगा। विदेशों से होने वाले सस्ते आयात के कारण स्थानीय मंडियों में फसलों के दाम बुरी तरह गिरेंगे, जिससे छोटे और सीमांत किसानों की आर्थिक स्थिति बिगड़ सकती है। प्रदर्शनकारी संगठनों ने केंद्र सरकार से इस व्यापार समझौते को तुरंत रद्द करने और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी देने की पुरजोर मांग की है।

