राणापुर के समीप वन मंडल में ऐतिहासिक हिंदू सम्मेलन
राणापुर के समीप वन मंडल में ऐतिहासिक हिंदू सम्मेलन
कलश यात्रा से शुभारंभ, संघ के 100 वर्ष, धर्मांतरण व गौहत्या पर हुआ प्रखर विचार-मंथन
योगेश चौहान
राणापुर:- दिनांक 25 जनवरी 2026 को राणापुर के समीप वन मंडल क्षेत्र में एक भव्य, अनुशासित एवं ऐतिहासिक हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन का शुभारंभ नगर के मुख्य मार्ग से निकाली गई कलश यात्रा के साथ हुआ, जो धार्मिक जयघोषों के साथ चलते हुए हनुमान मंदिर स्थित सभा स्थल पर संपन्न हुई। यात्रा में बड़ी संख्या में महिला-पुरुष, युवा एवं कार्यकर्ताओं की सहभागिता रही, जिससे सम्पूर्ण क्षेत्र धर्ममय वातावरण से सराबोर हो गया। सम्मेलन को सफल बनाने में दिन-रात मेहनत करने वाले मुख्य कार्यकर्ताओं की अहम भूमिका रही। इनमें मुकेश मेड़ा, संजय सोलंकी, कमलेश हटीला, गुलाबसिंह अमलियार, मुकेश सिंगाड़, विक्रमसिंह अखाड़िया, यशवंत सेमलिया एवं मकनसिंह पालीवाल प्रमुख रूप से शामिल रहे। सम्मेलन में मुख्य वक्ताओं के रूप में महंत श्री अमरदास जी महाराज, नीता दीदी, रेशम दीदी, मुकेश मेड़ा एवं विशेष रूप से राजेश जी द्वारा अपने विचार रखे गए। मुख्य वक्ता राजेश जी ने अपने ओजस्वी प्रवचन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर हो रहे विरोध पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की और इसे हिंदू समाज को तोड़ने का प्रयास बताया। उन्होंने समाज को एकजुट रहकर ऐसे विरोधों का डटकर सामना करने का आह्वान किया। अपने संबोधन में राजेश जी ने धर्मांतरण की घटनाओं, गौ हत्या पर हो रहे अत्याचारों तथा समाज में बढ़ रही अनैतिक प्रवृत्तियों पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने रिश्तों और विवाह व्यवस्था में आ रहे विघटन पर भी विस्तार से प्रकाश डालते हुए समाज को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने का संदेश दिया। विशेष बात यह रही कि यह सम्पूर्ण प्रवचन भीलाली भाषा में दिया गया, जिससे क्षेत्र के आदिवासी समाज में गहरा प्रभाव पड़ा और श्रोताओं ने अपनेपन के साथ प्रवचन को आत्मसात किया। कार्यक्रम में अनेक विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। इनमें शैलेंद्र जी सोलंकी, रामेश्वर जी नायक, वालसिंह मसानिया, सोमसिंह सोलंकी, दिलीप नलवाया, ज्ञानसिंह मोरी, कालूसिंह टोकरियां, उदयसिंह खराड़ी, मुकेश पालीवाल, इंदरसिंह सिंगाड, कमलेश सिंगार, राकेश सोलंकी एवं दिनेश अखाड़िया प्रमुख रहे। कार्यक्रम का संचालन गुलाबसिंह अमलियार द्वारा कुशलता से किया गया, जबकि अंत में आभार प्रदर्शन संजय सोलंकी ने किया। सम्मेलन के दौरान हिंदू समाज की एकता, संस्कृति और परंपराओं की रक्षा का संकल्प दोहराया गया। यह हिंदू सम्मेलन क्षेत्र में धार्मिक चेतना, सामाजिक जागरूकता एवं संगठनात्मक एकता का सशक्त उदाहरण बनकर सामने आया।

