लापरवाही की भेंट चढ़ी हैंडवॉश यूनिट योजना

कई स्कूलों व आंगनबाड़ियों में लगी यूनिट में न तो नल लगे और न पाइप लाइन,अधिकारी भी नहीं दे रहे ध्यान-देखरेख और उपयोग के अभाव में जर्जर हो गई हैंडवाश यूनिट

झाबुआ। संजय जैन-सह संपादक।   पिछले कुछ वर्षों में देश,प्रदेश में चलाए गए विभिन्न स्वच्छता अभियानों के दौरान हाथों की सफाई के विषय में विद्यार्थियों को जागरूक करने के लिए बनाए गए हैंडवाश यूनिट जर्जर स्थिति में पहुंच गए है। शासकीय स्कूलों और आंगनबाड़ियों में दर्ज बच्चों को जल जीवन मिशन के अंतर्गत शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने वाली योजना नकारा साबित हो रही है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा ठेकेदार के माध्यम से आंगनवाड़ी और शासकीय स्कूलों में हैंडपंप पर हजारों रुपए खर्च कर सिंगल फेस मोटर,पाइपलाइन और वॉटर टैंक लगाकर पेयजल यूनिट तैयार की थी। इसके बावजूद बच्चों को पानी नहीं मिल पा रहा है। स्थिति ये है कि स्कूल स्टाफ  सहित विद्यार्थी खुद इन्हें संभालने के लिए प्रयास नहीं करते है। हर विकासखंड के हर प्राइमरी, मिडिल,हासे स्कूलों में हैंडवॉश यूनिट बनाने के लिए पिछले कुछ वर्षों में करोड़ों रुपए खर्च किए गए,लेकिन हालत ये है कि अधिकांश स्कूलों में कहीं उपयोग नहीं हो रहा तो कहीं नल गायब है। कई स्कूलों में तो पानी बड़ी समस्या है। इसलिए यूनिट का उपयोग नहीं किया जा सकता है।

पानी की उपलब्धता नहीं होने से परेशानी

शिक्षकों ने बताया कि कई स्कूल ऐसे है। खासकर पहाड़ पट्टी के स्कूल जहां पानी की आपूर्ति बड़ी समस्या है,तो फिर हैंडवॉश यूनिट के लिए पानी कहा से लाएं....? सभी की टंकियां स्कूल के ऊपर रखी हुई है। जहां तक पानी पहुंचाना मुश्किल होता है। हालांकि ग्राम पंचायत स्तर पर स्कूल स्टाफ ,सरपंच,सचिव सहित आंगनवाड़ी स्तर पर संवाद,प्रयास की कमी भी यूनिट के खराब ओर उपयोग विहीन होने की बड़ी वजह है। यूनिट लगाने का उद्देश्य था कि बच्चों को शुद्ध पेयजल के लिए भटकना न पड़े और उन्हें हाथ धोने के साथ ही शुद्ध जल उपलब्ध हो सके। लेकिन यहां यूनिट निर्माण ठेकेदारों की मनमाफी व विभागीय लापरवाही के कारण कई गांवों में यह योजना घटिया निर्माण की भेंट चढ़ गई है।

शिक्षक हैंड वॉश यूनिट के उपयोग को लेकर गंभीर नहीं

पड़ताल में इस बात का भी खुलासा हुआ है कि कई स्कूलों में हैंड वॉश यूनिट का उपयोग सिर्फ  इसलिए नहीं हो पा रहा क्योंकि स्कूल स्टाफ  से जुड़े शिक्षक इनके उपयोग को लेकर गंभीर नहीं है। बच्चे बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं। ऐसे में बच्चों को घर से पीने का पानी लेकर आना पड़ रहा है। कई गांव में यह यूनिट अधूरी पड़ी हुई है और कई जगह तो टूट-फुट गई है,लेकिन इस ओर जिम्मेदारों का कोई ध्यान नहीं है। कई स्कूलों में हाथों की सफाई,मध्याह्न भोजन के बाद थाली धोने के दौरान स्कूल के समीप हैंडपंप का उपयोग अधिक होता है ,जबकि हैंड वॉश यूनिट बनाने का उद्देश्य विद्यार्थियों को हैंड वॉश यूनिट की उपयोगिता सिखाना है। जो विद्यार्थी शरारत करते हुए यूनिट को नुकसान पहुंचाते है, उन पर कोई कार्रवाई नहीं होना भी यूनिट की जर्जर हालत की मुख्य वजह है।