झारखंड में 48 नगर निकायों के चुनाव का ऐलान, 23 फरवरी को मतदान
झारखंड|झारखंड में 48 शहरी स्थानीय निकायों के लिए चुनाव तारीखों का ऐलान हो गया है। सभी नगर निकायों में एक साथ 23 फरवरी को चुनाव होंगे और मतगणना 27 फरवरी को होगी।राज्य निर्वाचन आयुक्त अलका तिवारी ने अधिसूचना जारी कर कहा, 'राज्य में 48 शहरी स्थानीय निकायों के चुनावों के लिए मतदान 23 फरवरी को एक ही चरण में होगा।' झारखंड में शहरी स्थानीय निकाय के चुनाव राजनीतिक दलों के चुनाव चिन्हों पर नहीं लड़े जाते हैं, बल्कि उम्मीदवारों को इन पार्टियों का समर्थन प्राप्त होता है।झारखंड हाई कोर्ट ने इससे पहले स्थानीय निकाय चुनाव कराने में देरी को लेकर राज्य सरकार की आलोचना की थी। सभी नगर निकाय वर्तमान में सरकारी अधिकारियों के प्रशासनिक नियंत्रण में हैं। आयोग ने नवंबर 2025 में हाई कोर्ट के सामने औपचारिकताओं को पूरा करने और चुनाव के लिए अधिसूचना जारी करने के वास्ते 8 सप्ताह की समयसीमा का उल्लेख किया था।
क्या है पूरा शेड्यूल
23 फरवरी को मतदान सुबह 7 बजे से शाम 5 बजे तक होगा। चुनाव की अधिसूचना जारी होने के साथ ही आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। 29 जनवरी से 4 फरवरी तक उम्मीदवार नामांकन दाखिल कर सकेंगे। इसके बाद 5 फरवरी को नामांकन पत्रों की जांच (स्क्रूटनी) की जाएगी। 6 फरवरी को नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि निर्धारित की गई है और 7 फरवरी को प्रत्याशियों को चुनाव चिन्ह आवंटित किए जाएंगे।
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2020 से ही लंबित हैं चुनाव
यह नगर निकाय चुनाव कई मायनों में ऐतिहासिक माने जा रहे हैं। ट्रिपल टेस्ट पूरा होने के बाद राज्य में पहली बार नगर निकाय चुनाव कराए जा रहे हैं। इन चुनावों के दायरे में 9 नगर निगम, 20 नगर परिषद और 19 नगर पंचायत शामिल हैं। 2020 से ही नगर निकाय चुनाव लंबित थे। पहले कोरोना महामारी के कारण चुनाव स्थगित कर दिए गए थे, बाद में ओबीसी आरक्षण और ट्रिपल टेस्ट को लेकर लगातार कानूनी और प्रशासनिक उलझनें बनी रहीं। इन वर्षों के दौरान कई बार चुनाव कराने की प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन आरक्षण से जुड़े मामलों में स्पष्ट नीति नहीं होने के कारण चुनाव टलते रहे।
हाई कोर्ट के दखल से खुला रास्ता
आखिरकार हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद राज्य सरकार ने ट्रिपल टेस्ट पूरा किया और आरक्षण संबंधी दिशा-निर्देशों को अंतिम रूप दिया। हाल ही में हाईकोर्ट ने नगर निगमों के वर्गीकरण और मेयर पद के आरक्षण को चुनौती देने वाली याचिका को भी खारिज कर दिया, जिससे चुनाव कराने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया।
आरक्षण की व्यवस्था
नगर निकाय चुनाव में मेयर और अध्यक्ष पदों के लिए आरक्षण की विस्तृत व्यवस्था की गई है। नगर निगमों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग, अत्यंत पिछड़ा वर्ग, महिला और अनारक्षित श्रेणियों के अनुसार आरक्षण लागू किया गया है। इसी तरह नगर परिषद और नगर पंचायत स्तर पर भी अध्यक्ष पदों का आरक्षण तय किया गया है, ताकि शहरी स्थानीय निकायों में सभी सामाजिक वर्गों को समुचित प्रतिनिधित्व मिल सके।
खर्च की क्या सीमा
राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनावी खर्च की सीमा भी निर्धारित कर दी है। 2011 की जनगणना के अनुसार जिन नगर निगम क्षेत्रों की आबादी 10 लाख या उससे अधिक है, वहां महापौर या अध्यक्ष पद के उम्मीदवार अधिकतम 25 लाख रुपए तक खर्च कर सकेंगे, जबकि वार्ड पार्षद के लिए खर्च की सीमा 5 लाख रुपए तय की गई है। 10 लाख से कम आबादी वाले नगर निगमों में यह सीमा क्रमशः 15 लाख रुपए और 3 लाख रुपए निर्धारित की गई है। नगर परिषद और नगर पंचायतों में भी आबादी के अनुसार खर्च सीमा तय की गई है।
43.33 लाख वोटर, 4304 बूथ
चुनाव को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराने के लिए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की जा रही है। राज्यभर में कुल 4304 मतदान केंद्र बनाए गए हैं, जो 2129 भवनों में स्थित होंगे। इन केंद्रों पर पर्याप्त संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती की जाएगी। निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि इस बार नगर निकाय चुनाव में नोटा का विकल्प उपलब्ध नहीं रहेगा। राज्य में कुल मतदाताओं की संख्या 43 लाख 33 हजार 574 है। इनमें 22 लाख 7 हजार 203 पुरुष, 21 लाख 26 हजार 227 महिला और 144 ट्रांसजेंडर मतदाता शामिल हैं।

