चौपाटी एसोसिएशन सहयोग के लिए तैयार लेकिन सम्मानजनक हल पर ही

झाबुआ/इंदौर।संजय जैन-सह संपादक। छह दिन बाद बड़ा-छोटा सराफा दोनो में चौपाटी लग पाएगी या नहीं इसे लेकर रस्साकशी की स्थिति बनी हुई है। भाजपा को भी तो राजनीति करना है, पेंच यह भी फंस रहा है कि सराफा क्षेत्र इंदौर विधानसभा क्षेत्र क्रमांक चार का हिस्सा है और भाजपा की विधायक मालिनी गौड़ को सराफा चौपाटी के दुकानदार अपनी परेशानी एकाधिक बार बता भी चुके हैं।महापौर पुष्यमित्र भार्गव भी चार नंबर क्षेत्र के निवासी हैं, वे भी इस मामले में अपना रुतबा कम तो नहीं होने देंगे।जनकार्य समिति प्रभारी राजेंद्र राठौर की रिपोर्ट को मान्य करते हुए इंदौर नगर निगम, छह दर्जन से अधिक दुकानदारों को अनुमति का फैसला कर भी चुका है। वही दूसरी ओर सराफा एसोसिएशन ने तय कर लिया है कि चाहे धरना देना या हड़ताल करना पड़े... 80 तो क्या एक भी दुकान एक सितंबर से हम नहीं लगने देंगे, प्रशासन पूरी चौपाटी को अन्यत्र शिफ्ट करे ।

सराफा थाना का झुकाव भी चर्चा में रहा

सराफा चौपाटी को लेकर यह विवादास्पद स्थिति इसलिए बनी हुई है क्योकि अब चाट-व्यंजनों की दुकानें सराफा के साथ ही पीपली बाजार से लेकर बजाजखाना चौक तक फ़ैल चुकी हैं। साथ ही रात ढलते ही खान-पान के ये ठिये राजबाड़ा, खजूरी बाजार तक पसर जाते हैं। सराफा चौपाटी की इन दुकानों पर हर 8-15 दिन में कभी ग्राहकों से दुर्व्यवहार, तो कभी छेड़छाड़ तो कभी दुकानदार द्वारा ग्राहक परिवार से मारपीट जैसी घटनाएं भी होती रही हैं।आए दिन होने वाली ऐसी घटनाओं में सराफा थाना स्टॉफ का चौपाटी दुकानदारों के पक्ष में झुकाव भी चर्चा में रहा है। 

पीएम की तारीफ से चौपाटी अधिक चर्चा में आई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ग्लोबल इंवेस्टर समिट के दौरान इंदौर आए थे, हमेशा की तरह अपने भाषण को लोकल टच देने के लिए इंदौर के इस दौर को याद करते हुए सराफा चौपाटी और छप्पन दुकान का जिक्र किया था। अंबानी परिवार में हुए विवाह के दौरान चौपाटी के कुछ दुकानदारों को एंटेलिया (मुंबई) में उनके व्यंजनों का मेहमानों को स्वाद चखाने के लिए आमंत्रित करने से सराफा चौपाटी की पहचान और भी बढ़ गई है। 

इसलिए है,विरोध सराफा एसोसिएशन का 

सराफा में दशकों पूर्व करीब 80 दुकानें लगती थी। अब इनकी संख्या बढ़ कर 170 से अधिक हो गई है। शाम सात बजे से चौपाटी दुकानदार अपने ठेले सोना-चांदी व्यापारियों की दुकानों के आगे लगाना शुरु कर देते हैं।एसोसिएशन के अध्यक्ष हुकम सोनी का कहना है सदस्य लंबे समय से शिकायत कर रहे थे। नगर निगम ने रिपोर्ट तैयार कराई,लेकिन उस पर अमल नहीं हुआ। इसकी क्या गारंटी कि 80 दुकानों के बाद फिर से दुकानों की संख्या नहीं बढ़ेगी। इसलिए एसोसिएशन ने तय किया है कि अब एक भी दुकान नहीं लगने देंगे। उल्लेखनीय है कि जिन सराफा दुकानदारों ने अपने ओटले इन दुकानदारों को 10-15 हजार रु. महीने में किराए पर दे रखे हैं, वो सब भी एसोसिएशन के इस निर्णय से सहमत हैं। एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष अविनाश आनंद का कहना है कि चौपाटी यहां से हटाना ही चाहिए, लेकिन इन दुकानदारों के पेट पर लात भी ना लगे इसका ध्यान रखना भी चाहिए। चौपाटी की इन दुकानों को रिवर साइड रोड पर जगह दी जा सकती है, वहां पार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था भी है। 

जनकार्य समिति अध्यक्ष की रिपोर्ट

नगर निगम जनकार्य समिति प्रभारी राजेंद्र राठौर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में 80 दुकानों को पारंपरिक चौपाटी माना है। इन दुकानों को यहां यथावत रखने की अनुशंसा की है। अध्यक्ष राठौर का कहना है बाकी जितनी भी दुकानें हैं,वो तो सराफा दुकानदारों ने किराए के लालच में दे रखी हैं तो इसमें निगम की सहमति नहीं है। 

पारंपरिक व्यंजनों पर नया चटखारा हावी-प्रभावी नेता से जुड़े हुए

सराफा चौपाटी करीब 95 साल से संचालित हो रही है। नाम चौपाटी तो जरूर है लेकिन अब यहां कपड़े, खिलौने, मोबाइल कवर से लेकर चाइनीज फूड, मोमोज, पान, आलू टेस्टर आदि की दुकानें भी लग रही हैं। ऐसी अधिकांश दुकानें उन लोगों की हैं,जो किसी न किसी प्रभावी नेता से जुड़े हुए हैं। 

हम अभी सराफा एसो का रुख देख रहे हैं

सराफा चौपाटी एसोसिएशन के अध्यक्ष राम गुप्ता का कहना है कि चाहे पहले हो या अब ,चौपाटी की दुकानें सराफा दुकानदारों की मेहरबानी से ही लगी हुई हैं। हम एसोसिएशन को सहयोग करते रहे हैं, अभी उनके रुख का इंतजार भी कर रहे हैं। जो सदस्य नहीं हैं उनके खिलाफ एक्शन से हमे एतराज भी नहीं है। सिर्फ हम चाहते है कि सम्मानजनक हल निकले और दुकानदारों की रोजी रोटी प्रभावित भी नहीं हो।