ज्ञान की आराधना से मिथ्यात्व दूर होता है- साध्वी निखिल शीलाजी
ज्ञान की आराधना से मिथ्यात्व दूर होता है- साध्वी निखिल शीलाजी
प्रिय शीलाजी ने किया नन्दीसूत्र का वाचन
थांदला।कमलेश जैन। संसार में ज्ञान का महत्व प्रत्यक्ष दिखाई देता है वही आध्यात्मिक यात्रा भी ज्ञान के आलम्बन से ही शिखरता को प्राप्त करती है। उम्र के हर पड़ाव में व्यक्ति को तब तक ज्ञान प्राप्त करते रहना चाहिए,जब तक कि वह केवलज्ञानी (पूर्ण ज्ञानी) नहीं बन जाता। उपर्युक्त जिनवाणी साध्वी निखिलशीलाजी म.सा. ने रविवार को ज्ञान पंचमी के अवसर पर धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए कहा। भगवान की अंतिम देशना उत्तराध्ययन का आलम्बन लेते हुए पूज्याश्री ने कहा कि आज सभी सम्पन्न होना चाहते है, लेकिन वे धन वैभव,सत्ता और परिवार तक ही सिमित रह गए है।
किया नन्दीसूत्र का वाचन
भगवान से गौतम स्वामी ने ज्ञान सम्पन्नता से लाभ की पृच्छा की थी, जिसका प्रति उत्तर देते हुए प्रभु ने बताया कि ज्ञान से ही आराधना सही दिशा में चलती है।जिससे वह सुसाधक होकर जिवाजीव के सर्वभाव का जानकार, स्व-पर मत का ज्ञाता बनकर चतुर्गति रूप संसार चक्र में प्रमाणिकता से रहकर अमर बन जाता है। ज्ञान की महिमा बताने आपने पूज्य माताजी दिव्यशीलाजी म.सा. का उदाहरण देकर कहा कि आज 84 वर्ष की उम्र में भी मताजी ने एक स्तवन याद करके सुनाया है,वही आलोचना को याद कर उसे भी स्वाध्याय का अंग बनाया है। इस अवसर पर पूज्या श्री प्रियशीलाजी ने मूल सूत्र नन्दीजी का वाचन किया।
अधिक से अधिक संख्या में पधारने का आह्वान किया
सभा का संचालन करते हुए संघ सचिव हितेश शाहजी ने विगत 8 वर्षों से थांदला जिन शासन में ज्ञान की गंगा बहाने के लिए यहाँ विराजित सभी महासतियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए संघ कि ओर से आभार माना। शाहजी ने अणु दर्शन यात्रा के अंतिम चरण में कल बुधवार को इंदौर में विराजित निर्भय वक्ता पूज्य गुरुदेव श्री गुलाबमुनिजी व कैलाशमुनिजी और खरगौन में विराजित पंडित रत्न पूज्य गुरुदेव श्री पंकजमुनिजी के दर्शनार्थ जाने की जानकारी देते हुए निःशुल्क यात्रा में अधिक से अधिक संख्या में पधारने का आह्वान भी किया। संघ अध्यक्ष प्रदीप गादिया ने कहा कि संघ के सभी सदस्य यहाँ विराजित गुराणीजी से कुछ न कुछ नया ज्ञान सीखने का लक्ष्य रखें। धर्म सभा में ज्ञान की तप युक्त आराधना करते हुए अनेक श्रावक श्राविकाओं ने एकासन, निवि, आयम्बिल, उपवास आदि विविध तप के प्रत्याख्यान ग्रहण किये।

