उज्जैन के खड़े हनुमान जी का रहस्य! हजारों प्रतिमाओं का अध्ययन कर चुके पुरातत्वविद भी हुए हैरान
उज्जैन। श्री खड़े हनुमान मंदिर की प्रतिमा को स्थानांतरित करने को लेकर जारी गतिरोध के बीच प्रशासन ने वैज्ञानिक और तकनीकी आधार पर कदम आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। संत समाज और श्रद्धालुओं के विरोध को देखते हुए स्पष्ट किया गया है कि विशेषज्ञों की राय और तकनीकी परीक्षण के बाद ही आगे का फैसला लिया जाएगा। अधिकारियों ने यह भी साफ किया कि वर्तमान में प्रतिमा को हटाने का कोई प्रत्यक्ष प्रयास नहीं किया गया है।
आधार के साथ विस्थापन ही एकमात्र सुरक्षित मार्ग
मंदसौर के सम्राट यशोधर्मन पुरातत्व संग्रहालय के संस्थापक कैलाशचंद्र पांडे के अनुसार, प्राचीन मूर्तियों को हमेशा उनके मूल आधार (Base) के साथ ही स्थापित किया जाता था। उन्होंने पशुपतिनाथ मंदिर क्षेत्र में 12 फीट ऊंची सहस्त्रलिंग प्रतिमा के सुरक्षित स्थानांतरण का उदाहरण देते हुए बताया कि मूर्तियों को उनके आधार के साथ ही निकालना अनिवार्य होता है, अन्यथा प्रतिमा को क्षति पहुँचने का जोखिम रहता है।
प्रतिमा निकालने की पारंपरिक एवं तकनीकी प्रक्रिया
विशेषज्ञों के अनुसार, प्रतिमा के विस्थापन के लिए उसके चारों ओर सावधानीपूर्वक खुदाई की जाती है। आधार का निचला हिस्सा स्पष्ट दिखने के बाद लकड़ियों का एक मजबूत ढांचा (Wooden Base) तैयार किया जाता है। इसके पश्चात प्रतिमा को धीरे-धीरे सरकाकर सुरक्षित रूप से नए स्थान पर स्थापित किया जाता है। यदि इन सभी वैज्ञानिक पद्धतियों के बाद भी बाधा उत्पन्न होती है, तो इसे जन आस्था में चमत्कार से जोड़कर देखा जाता है।
स्कैनिंग और धातु परीक्षण के बाद तय होगी रणनीति
आर्किटेक्ट अतुल सेठ का कहना है कि भारी मशीनों के सीधे प्रयोग से ऐतिहासिक प्रतिमाओं को नुकसान पहुँच सकता है। इसलिए पहले भू-गर्भ की मिट्टी और प्रतिमा के निचले हिस्से की डिजिटल स्कैनिंग कराना आवश्यक है। इसके साथ ही, प्रतिमा की धातु और उसकी संरचनात्मक मजबूती का आकलन किया जाएगा, जिससे स्थानांतरण की सुरक्षित योजना बनाई जा सके।

