अल्पसंख्यक बहुल सीटों में बड़े पैमाने पर नाम कटे, ड्राफ्ट सूची में 33% मतदाता बाहर
दिल्ली | राष्ट्रीय राजधानी में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद जारी की गई प्रारूप (ड्राफ्ट) मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम हटाए गए हैं। आंकड़े बताते हैं कि अल्पसंख्यक बहुल और अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित विधानसभा क्षेत्रों में 20 से लेकर 45 प्रतिशत तक मतदाताओं के नाम कट गए हैं। अल्पसंख्यक इलाकों में ओखला (45%) और आरक्षित क्षेत्रों में पटेल नगर (42%) में सबसे ज्यादा नाम सूची से बाहर हुए हैं।
कुल 47.56 लाख नाम लिस्ट से गायब, 33 फीसदी की कमी
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, प्रक्रिया शुरू होने से पहले दिल्ली में लगभग 1.45 करोड़ पंजीकृत मतदाता थे। इनमें से 47,56,722 नाम प्रारूप सूची में दर्ज नहीं हैं, जो कि कुल संख्या का करीब 33 फीसदी है। इन नामों को अनुपस्थित, स्थाई रूप से स्थानांतरित, मृत या दोहरी प्रविष्टि जैसी श्रेणियों में रखा गया है।
अल्पसंख्यक और आरक्षित क्षेत्रों के आंकड़े
अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में ओखला के अलावा चांदनी चौक से 38%, बल्लीमारान से 32%, मुस्तफाबाद से 28%, बाबरपुर से 26%, मटिया महल से 24% और सीलमपुर से 23% नाम कटे हैं।
वहीं SC आरक्षित सीटों की बात करें तो पटेल नगर (42%) के बाद करोल बाग में 40% और अंबेडकर नगर में 39% मतदाताओं के नाम हटे हैं। देवली व कोंडली में 37-37%, त्रिलोकपुरी में 33%, जबकि सीमापुरी और सुल्तानपुर माजरा में 31-31% नाम सूची से बाहर हुए हैं।
43.33 लाख लोग अनुपस्थित या शिफ्टेड श्रेणी में
हटाए गए कुल नामों में सबसे बड़ा हिस्सा (43,32,775 नाम) उन लोगों का है जो अपने पते पर अनुपस्थित थे या कहीं और स्थानांतरित हो चुके हैं। इसके अलावा 2.82 लाख मृत मतदाताओं और 1.41 लाख दोहरी प्रविष्टि वाले नामों को हटाया गया है।
30 सितंबर तक दावा और आपत्ति का अवसर
चुनाव विभाग ने साफ किया है कि ड्राफ्ट लिस्ट से नाम हटने का मतलब अंतिम रूप से वोटर अधिकार समाप्त होना नहीं है। जिन नागरिकों के नाम कट गए हैं, वे 30 सितंबर तक अपने दावे या आपत्तियां दर्ज करा सकते हैं। सभी आवेदनों की जांच और निपटारे के बाद 4 नवंबर को अंतिम (फाइनल) मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।

