पटना। बिहार में खेल प्रतिभाओं को निखारने और अत्याधुनिक ट्रेनिंग सुविधाएं देने के उद्देश्य से एक बड़ा नीतिगत बदलाव किया गया है। भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) ने राजगीर स्थित 'खेलो इंडिया स्टेट सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' में कुश्ती की जगह आधिकारिक रूप से तैराकी को शामिल करने की मंजूरी दे दी है। विभागीय परियोजना अनुमोदन समिति (DPAC) की अनुशंसा के बाद केंद्रीय खेल मंत्रालय ने इस संबंध में बिहार राज्य खेल प्राधिकरण को पत्र भेजकर वित्तीय आवंटन और स्टाफ के ढांचे को मंजूरी दे दी है।

तैराकी विधा के लिए बजट और कोचों की तैनाती

राजगीर केंद्र पर नए खेल ढांचे के तहत खिलाड़ियों के मार्गदर्शन के लिए विशेषज्ञ कोच नियुक्त किए जाएंगे:

  • मानव संसाधन: एथलेटिक्स, भारोत्तोलन और तैराकी के लिए 3 मुख्य कोच तथा तैराकी के लिए 1 सहायक कोच तैनात होंगे।

  • चालू वित्तीय वर्ष का बजट: वर्ष 2026-27 के लिए कोचों के वेतन मद में 40.80 लाख रुपये और तैराकी के खेल उपकरणों के लिए 18.21 लाख रुपये मंजूर किए गए हैं। चालू वर्ष में कुल 59.01 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है।

  • वार्षिक आवंटन: आगामी वित्तीय वर्षों के लिए तैराकी और संबंधित व्यवस्थाओं का सालाना बजट 79.41 लाख रुपये निर्धारित किया गया है।

अनुबंध और वन-टाइम ग्रांट के नए नियम

आवर्ती फंड की यह राशि भारतीय खेल प्राधिकरण और राज्य सरकार के बीच औपचारिक समझौते पर हस्ताक्षर के बाद जारी की जाएगी। इससे पहले कुश्ती के लिए जारी किए गए 15.62 लाख रुपये के एकमुश्त अनुदान (वन-टाइम ग्रांट) को अब तैराकी के स्थायी उपकरणों की खरीद में इस्तेमाल करने की अनुमति दी गई है।

पुरानी राशि की वापसी और उपकरणों का प्रस्ताव

वित्तीय दिशा-निर्देशों के तहत वर्ष 2023 में जारी 5.20 लाख रुपये की अप्रयुक्त राशि राज्य सरकार को वापस लौटानी होगी। इसके साथ ही केंद्र में प्रशिक्षण जल्द शुरू करने के लिए सरकार से नए तैराकी उपकरणों का विस्तृत प्रस्ताव मांगा गया है, जिससे राज्य के तैराकों को आधुनिक स्तर पर तैयार किया जा सके।