मेडिकल कॉलेज हॉस्टल में बिजली संकट, ढाई लाख के बकाया ने बढ़ाई छात्रों की परेशानी
रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय (जेएनएम) के प्रबंधन की एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। कॉलेज के अस्थाई छात्रावास का बिजली बिल समय पर चुकता न करने के कारण विद्युत मंडल ने हॉस्टल का कनेक्शन काट दिया है। करीब 2.5 लाख रुपये का रिपेमेंट (बिल भुगतान) लंबित होने की वजह से की गई इस सख्त कार्रवाई के बाद, हॉस्टल में रह रहे लगभग 100 एमबीबीएस छात्र पिछले 48 घंटों से बिना बिजली और बुनियादी सुविधाओं के रहने को विवश हैं। भीषण उमस और चिलचिलाती गर्मी के बीच लाइट गुल होने से भावी डॉक्टरों की पढ़ाई और दैनिक दिनचर्या पूरी तरह ठप हो गई है, जिससे छात्रों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
बिजली गुल होने से पेयजल का संकट गहराया, छात्र हुए परेशान
छात्रावास के छात्रों ने बताया कि शुरुआत में जब बत्ती गुल हुई, तो उन्हें लगा कि यह कोई सामान्य तकनीकी खराबी या मेंटेनेंस के लिए की गई कटौती होगी। लेकिन जब घंटों बीत जाने के बाद भी बिजली की आपूर्ति बहाल नहीं हुई, तब परेशान होकर छात्रों ने कॉलेज एडमिनिस्ट्रेशन (प्रबंधन) से संपर्क साधा।
वहां से मिली जानकारी के बाद छात्र तब सन्न रह गए जब उन्हें पता चला कि बिजली विभाग ने बिल न भरने के कारण बत्ती गुल की है। बिजली ठप होने का सीधा असर हॉस्टल की पानी सप्लाई पर पड़ा है। वॉटर पंप नहीं चलने से हॉस्टल की टंकियां सूख गई हैं, जिससे छात्रों के सामने पीने के पानी से लेकर दैनिक निस्तारी तक का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
पिछले साल हुए उग्र आंदोलन के बाद किराए पर लिया गया था यह भवन
गौरतलब है कि चिकित्सा महाविद्यालय के पास अपने एमबीबीएस छात्रों को ठहराने के लिए फिलहाल कोई स्थायी हॉस्टल उपलब्ध नहीं है, क्योंकि नए ब्लॉक का निर्माण कार्य कछुआ गति से चल रहा है। पिछले वर्ष हॉस्टल की मांग को लेकर मेडिकल छात्रों ने कॉलेज परिसर में एक बड़ा और उग्र आंदोलन किया था।
छात्रों के बढ़ते दबाव और शासन के हस्तक्षेप के बाद, कॉलेज एडमिनिस्ट्रेशन ने आनंद-फानन में राजधानी के शांति नगर इलाके में एक निजी बहुमंजिला इमारत को किराए पर लिया और उसे अस्थाई तौर पर हॉस्टल घोषित कर दिया। मौजूदा समय में मेडिकल फर्स्ट ईयर से लेकर फाइनल ईयर तक के करीब 100 छात्र इसी किराए की बिल्डिंग में रहकर अपनी पढ़ाई पूरी कर रहे हैं।
तीन साल बाद भी अधूरा पड़ा है हॉस्टल का निर्माण, छात्र भुगत रहे खामियाजा
कॉलेज कैंपस के भीतर नए और आधुनिक सर्वसुविधायुक्त हॉस्टल का निर्माण कार्य लगभग तीन साल पहले शुरू किया गया था। प्रशासनिक सुस्ती और ठेकेदार की लापरवाही के चलते यह प्रोजेक्ट आज भी अधर में लटका हुआ है।
स्थायी हॉस्टल न होने के कारण लंबे समय तक इन भावी डॉक्टरों को शहर के अलग-अलग हिस्सों में महंगे निजी कमरों और पीजी (PG) में शरण लेनी पड़ी थी। बाद में राज्य सरकार के कड़े रुख के बाद, प्रशासन ने 120 सीटों की क्षमता वाले इस निजी भवन को अनुबंधित किया था, लेकिन यहां भी अव्यवस्थाओं ने छात्रों का पीछा नहीं छोड़ा है।
अवकाश का बहाना: कॉलेज प्रबंधन और वार्डन ने दी सफाई
इस पूरे प्रशासनिक गतिरोध पर सफाई देते हुए हॉस्टल के अनुबंधित वार्डन डॉ. प्रशांत जायसवाल ने बताया कि सरकारी छुट्टियों और बैंक अवकाश होने के कारण भवन मालिक समय सीमा के भीतर विद्युत देयक (बिजली बिल) की राशि जमा नहीं करवा सके थे, जिसके कारण बिजली विभाग ने नियमानुसार कनेक्शन विच्छेद कर दिया था।
उन्होंने आगे कहा कि अब कॉलेज प्रबंधन और भवन स्वामी के समन्वय से बिल के भुगतान की पूरी प्रक्रिया को तत्काल पूरा कर लिया गया है। विभाग को रसीद सौंप दी गई है और उम्मीद है कि कुछ ही घंटों में हॉस्टल की बिजली और पानी की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य कर दी जाएगी।

