स्कूल सेवा आयोग के विकेंद्रीकरण का फैसला, भर्ती प्रक्रिया में बढ़ेगी पारदर्शिता
कोलकाता: पश्चिम बंगाल की वर्तमान भाजपा सरकार ने राज्य स्कूल सेवा आयोग (WBSSC) के ढांचे में आमूलचूल परिवर्तन करते हुए इसके विकेंद्रीकरण का बड़ा फैसला लिया है। पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में शिक्षण और गैर-शिक्षण पदों पर हुई भारी अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के दाग धोने के लिए प्रशासन अब आयोग को पुनः पांच क्षेत्रीय कार्यालयों के माध्यम से संचालित करेगा। इस पहल का मुख्य उद्देश्य भर्ती प्रक्रिया को अधिक कुशल, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है। राज्य शिक्षा विभाग के अनुसार, पुरानी प्रणाली को पुनर्जीवित करने से न केवल धांधली की गुंजाइश कम होगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर निगरानी भी बढ़ेगी और निर्णय लेने की प्रक्रिया में तेजी आएगी।
ज्योति बसु काल के प्रशासनिक मॉडल की ओर वापसी
ऐतिहासिक संदर्भ में देखें तो WBSSC की स्थापना 1 अप्रैल 1997 को तत्कालीन वाम मोर्चा सरकार के दौरान विकेंद्रीकृत मॉडल पर ही की गई थी। उस समय पूर्व मुख्यमंत्री ज्योति बसु के नेतृत्व में पांच क्षेत्रीय केंद्रों के जरिए नियुक्तियां संचालित होती थीं, लेकिन 2011 में सत्ता परिवर्तन के बाद इन केंद्रों को निष्क्रिय कर दिया गया और पूरी कमान साल्ट लेक स्थित 'आचार्य सदन' मुख्यालय तक सीमित कर दी गई। अब नई सरकार ने उसी पुरानी कार्यशैली को वापस लाने का निर्णय लिया है ताकि सत्ता का अत्यधिक केंद्रीकरण खत्म हो सके। हालांकि, महत्वपूर्ण नीतिगत और रणनीतिक फैसले अभी भी मुख्यालय से ही लिए जाएंगे, लेकिन क्षेत्रीय कार्यालयों के सक्रिय होने से उम्मीदवारों के लिए यह प्रणाली अधिक सुलभ और स्थानीय स्तर पर जवाबदेह होगी।
प्राथमिक शिक्षा में जिला परिषदों को मिली स्वायत्तता
प्राथमिक शिक्षा के क्षेत्र में भी बड़े सुधार के लिए सरकार ने कड़े कदम उठाते हुए विभिन्न जिला प्राथमिक विद्यालय परिषदों (DPSC) को स्वायत्त दर्जा प्रदान करने का निर्णय लिया है। इससे पहले ये परिषदें केवल पश्चिम बंगाल प्राथमिक शिक्षा बोर्ड की एक विस्तारित शाखा के रूप में कार्य करती थीं, लेकिन अब स्वायत्तता मिलने के बाद वे भर्ती संबंधी निर्णय अपने स्तर पर ले सकेंगी। इस कदम का उद्देश्य प्राथमिक स्तर पर होने वाली नियुक्तियों को राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त करना और भ्रष्टाचार की पुनरावृत्ति को रोकना है। स्वायत्त संस्थाओं के माध्यम से जिला स्तर पर बेहतर प्रबंधन और निष्पक्ष चयन की उम्मीद जताई जा रही है।
दागी उम्मीदवारों पर शिकंजा और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त एक्शन
प्रशासनिक सुधारों के साथ-साथ सरकार पिछली अनियमितताओं के विरुद्ध भी कड़े दंडात्मक कदम उठा रही है। शिक्षा विभाग ने सभी जिलाधिकारियों को उन दागी उम्मीदवारों की सूची तैयार करने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं, जिन्होंने कथित तौर पर रिश्वत या नकदी के बदले स्कूलों में पद हासिल किए थे। पहचान किए गए इन दागी कर्मचारियों से अब वसूली की तैयारी भी की जा रही है। राजनीतिक गलियारों में इस कदम को भर्ती घोटाले के पीड़ितों को न्याय दिलाने और शिक्षा तंत्र की खोई हुई साख को पुनः स्थापित करने के संकल्प के रूप में देखा जा रहा है। सरकार का यह रुख साफ करता है कि भविष्य में नियुक्तियां केवल योग्यता और पारदर्शिता के आधार पर ही होंगी।

