फिर सत्ता से जुड़े लोगों के बड़े नेता की दबंगई को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय-आखिर भाजपा सरकार में यह चल क्या रहा है?भाजपा का शीर्ष नेतृत्व आखिर क्यों है मौन?- राज्य मंत्री प्रतिमा बागर-जाति प्रमाण पत्र फर्जी!-बीजेपी में विरोध की चिंगारी
फिर सत्ता से जुड़े लोगों के बड़े नेता की दबंगई को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय-आखिर भाजपा सरकार में यह चल क्या रहा है?भाजपा का शीर्ष नेतृत्व आखिर क्यों है मौन?- राज्य मंत्री प्रतिमा बागर-जाति प्रमाण पत्र फर्जी!-बीजेपी में विरोध की चिंगारी
प्रदेश की राजनीतिक नोक-झोक पर अलग हट कर,संघर्ष से सिद्धि की विशेष पेशकश संजय जैन-सह संपादक की कलम से
झाबुआ/इंदौर। संजय जैन-सह संपादक। बीजेपी के बड़े नेता की खुलेआम गुंडागर्दी,कर दिया बड़ा कांड-मचा बवाल ग्वालियर में से चौंकाने वाला मामला सामने आया है,जहां एक भाजपा नेता पर पुलिस ने केस दर्ज किया है। आरोप है कि जमीन विवाद में बीजेपी नेता कुछ साथियों के साथ हथियार लेकर पहुंचे थे। भाजपा नेता पर बाउंड्रीवाल तोड़ने और मारपीट का गंभीर आरोप लगा है। पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस को दी शिकायत में पीड़ित विजय अग्रवाल निवासी गणपति विहार कॉलोनी, तानसेन रोड हजीरा ने बताया कि उनकी पत्नी वर्षा अग्रवाल और उनके साथी अनिल शिवहरे ने गिरवाई थाना क्षेत्र के गोकुलपुर गांव के पास एबी रोड के किनारे लगभग सात बीघा जमीन खरीदी है। इस जमीन पर सभी अनिवार्य अनुमति लेकर एक कॉलोनी बनाई जा रही है। आरोप है कि बीती 8 अप्रैल को पड़ोसी जमीन मालिक और भाजपा के प्रदेश कार्यसमिति सदस्य किशन मुदगल, जितेंद्र मुद्गल और राधारमन शर्मा कई लोगों के साथ मौके पर पहुंचे। आरोप है कि भाजपा नेता समेत उनके साथियों ने मारपीट और गाली-गलौज शुरू कर दी। इसी के साथ ही जेसीबी मशीन से कॉलोनी की बाउंड्रीवाल को तोड़ना शुरू कर दिया। मामले में विरोध करने पर कॉलोनी के चौकीदार और काम में जुटे मजदूरों से मारपीट का आरोप भी लगाया गया। मौके पर अफरा-तफरी मची देख आसपास के लोगों की भीड़ जुटने लगी,तभी आरोपी लोगों को आते देख भाग निकले। इस पूरी घटना का वीडियो कॉलोनी में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हुआ है। पुलिस को सीसीटीवी फुटेज सौंपा गया है। पीड़ित कि शिकायत पर आरोपी भाजपा नेता के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
राज्य मंत्री प्रतिमा बागर-जाति प्रमाण पत्र फर्जी!
प्रदेश सरकार की नगरीय प्रशासन राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र को लेकर चल रहे विवाद पर मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय जबलपुर ने कड़ा रुख अपनाया है। कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष एवं याचिकाकर्ता प्रदीप अहिरवार द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायालय की डबल बेंच ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। न्यायालय ने स्पष्ट रूप से कहा कि पिछले लगभग 1 वर्ष से इस मामले की जांच लंबित क्यों रखी गई और इसे दबाकर क्यों रखा गया ? कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देशित किया है कि उच्च स्तरीय छानबीन समिति इस मामले की 60 दिनों के भीतर जांच कर निर्णय प्रस्तुत करे। आपको बता दें किं प्रदीप अहिरवार द्वारा राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र को लेकर उच्च स्तरीय जांच समिति में शिकायत दर्ज कराई गई थी। प्रदीप अहिरवार का कहना है कि प्रतिमा बागरी ने सामान्य वर्ग के राजपूत बागरी-बागड़ी समाज से संबंध रखने के बावजूद अनुसूचित जाति वर्ग का फर्जी प्रमाण पत्र बनवाया गया है। राजपूत होने के बाद भी प्रतिमा ने अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र बनवाया और मंत्री बन गई। कोर्ट फैसले पर उत्साहित प्रदीप अहिरवार ने कहा है कि श्मंत्री प्रतिमा बागरी अब महज दो महीने की मंत्री ही शेष बची हुई हैं। जांच समिति की रिपोर्ट आने के बाद हमें पूरा विश्वास है कि उनका जाति प्रमाण पत्र फर्जी पाया जाएगा और उन्हें मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ेगा। मोहन यादव की सरकार अधिकारियों और अपने मंत्रियों को बचाने में लगी हुई है। इसलिए छानबीन समिति लगातार दबाव में आकर जांच को धीमा रखे हुए थी।
बीजेपी में विरोध की चिंगारी
राज्य महिला आयोग के अध्यक्ष के खिलाफ बीजेपी नेताओं ने मोचा खोला और कहा पार्टी विरोधी काम करने वाले को दी बड़ी नियुक्ति दे दी है। पूर्व विधायक रेखा यादव को राज्य महिला आयोग का अध्यक्ष बनाए जाने की चर्चाओं ने भाजपा के भीतर ही असंतोष को हवा दे दी है। आधिकारिक घोषणा से पहले ही जिले के पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने खुलकर विरोध दर्ज कराना शुरू कर दिया है। शनिवार को बड़ी संख्या में पदाधिकारी जिला भाजपा कार्यालय पहुंचे और रेखा यादव के नाम पर आपत्ति जताई। कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि रेखा यादव लंबे समय से पार्टी विरोधी गतिविधियों में संलिप्त रही हैं,ऐसे में उन्हें किसी महत्वपूर्ण पद पर नियुक्त करना संगठन के हित में नहीं होगा। बड़ामलहरा क्षेत्र के भाजपा पदाधिकारियों ने प्रदेश अध्यक्ष के नाम जिला अध्यक्ष को ज्ञापन सौंपकर अपनी नाराजगी जाहिर की।
निगम-मंडलों की बहुप्रतीक्षित सूची जल्द जारी होने के संकेत
प्रदेश में चार आयोगों में राजनीतिक नियुक्तियों के बाद अब निगम-मंडलों की बहुप्रतीक्षित सूची जल्द जारी होने के संकेत मिल रहे हैं। लंबे समय से इंतजार कर रहे नेताओं के लिए यह खबर राहत देने वाली है। सूत्रों के मुताबिक कई दौर की बैठकों और मंथन के बाद तैयार की गई सूची को राष्ट्रीय नेतृत्व की मंजूरी मिल चुकी है। हाल ही में मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने भाजपा पदाधिकारियों की बैठक में संकेत दिए थे कि निगम-मंडलों में अध्यक्ष,उपाध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति एक साथ की जाएंगी। इसी क्रम में हाल में जारी आदेशों में अध्यक्षों के साथ सदस्यों की नियुक्ति भी देखने को मिली है,जिससे यह स्पष्ट है कि प्रक्रिया अब अंतिम चरण में है। इसी बीच निगम मंडलों की सूची में शामिल संभावित नाम सामने आए हैं। सूत्रों के अनुसार निगम-मंडलों और प्राधिकरणों की सूची में लगभग 30 से 32 नाम शामिल हो सकते हैं। जिन नेताओं के नाम चर्चा में हैं,उनमें चेतन सिंह, विनोद गोटिया और संजय नगायच प्रमुख बताए जा रहे हैं। इनके अलावा पूर्व मंत्री अरविंद भदौरिया, रामनिवास रावत,उमाशंकर गुप्ता, कमल पटेल,रामपाल सिंह,अचल सोनकर,इमरती देवी,ध्रुव नारायण सिंह, अभिलाष पांडे,आशीष शर्मा, अजय विश्नोई,शैलेंद्र जैन,प्रदीप लारिया,इसके साथ ही संजय शुक्ला , अलकेश आर्य और कलसिंह भाबर के नाम भी चर्चा में बने हुए हैं।
राजनीतिक नियुक्तियों का दौर शुरु
प्रदेश में राजनीतिक नियुक्तियों का दौर शुरु हो चुका है। कई आयोग अध्यक्षों के नाम सामने आ चुके हैं। ऐसे में अब विकास प्राधिकरणों की नियुक्तियों को लेकर हलचल तेज हो गई है। सरकार और संगठन स्तर पर नामों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया जारी है और सूत्रों के मुताबिक सूची कभी भी जारी की जा सकती है। कई शहरों के लिए नाम लगभग तय माने जा रहे हैं,जबकि बड़े प्राधिकरणों को लेकर अभी भी मंथन जारी है। प्रदेश अध्यक्ष ने स्पष्ट कहा था कि इस बार केवल अध्यक्ष पद ही नहीं, बल्कि कुछ विकास प्राधिकरणों में उपाध्यक्षों की नियुक्ति भी ही की जाएगी। ऐसे में अटकलें है कि जल्द ही सारे नाम सामने आ सकते हैं। इन नियुक्तियों के जरिए क्षेत्रीय, सामाजिक और संगठनात्मक संतुलन साधने की रणनीति पर काम किया जा रहा है। पार्टी संगठन में लंबे समय से सक्रिय नेताओं को जिम्मेदारी मिलने की चर्चा भी तेज है। सूत्रों के अनुसार विभिन्न विकास प्राधिकरणों के लिए जिन नामों की चर्चा है,उनमें देवास के लिए बहादुर सिंह मुकाती, जबलपुर के लिए संदीप जैन,ग्वालियर के लिए मधुसूदन भदौरिया, उज्जैन के लिए रवि सोलंकी और रतलाम के लिए मनोज पोरवाल के नाम शामिल बताए जा रहे हैं। इसके अलावा कटनी के लिए शशांक श्रीवास्तव, ओरछा के लिए अखिलेश अयाची और विंध्य क्षेत्र के लिए पंचूलाल प्रजापति के नाम भी चर्चा में हैं।ग्वालियर विकास प्राधिकरण में उपाध्यक्ष पद को लेकर सुधीर गुप्ता और वेद प्रकाश शिवहरे के नाम सामने आए हैं।
भोपाल और इंदौर को लेकर अभी तस्वीर साफ नही
विकास प्राधिकरणों के अलावा निगम-मंडलों में भी नियुक्तियों को लेकर अटकलें जारी हैं। मप्र नागरिक आपूर्ति निगम के लिए केपी यादव,अपैक्स बैंक के लिए महेंद्र सिंह यादव और वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन के लिए संजय नगाइच के नाम चर्चा में हैं। हालांकि भोपाल और इंदौर जैसे बड़े विकास प्राधिकरणों को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। इन पर शीर्ष स्तर पर लगातार मंथन जारी है और संभावना है कि सहमति बनने के बाद पूरी सूची एक साथ जारी की जाएगी। बता दें कि ये संभावित चेहरे हैं। इन चेहरों की पुष्टि आधिकारिक सूचना के बाद ही हो सकेगी।

