क्या इसे कहते है जीरो टॉलरेंस?-भाजपाई  शीर्ष नेतृत्व आखिर क्यों है मौन? संघ,संगठन और सरकार के निर्देश तार तार-बीजेपी मंत्री, विधायक और नेता ही करा करे पार्टी की फजीहत,आखिर भाजपा सरकार में यह सब कुछ चल क्या रहा है?

झाबुआ/इंदौर। संजय जैन-सह संपादक। पूरे देश में भारतीय जनता पार्टी की छवि एक अनुशासित और संस्कारी पार्टी की है। पार्टी अपने अनुशासन के लिए जानी जाती है लेकिन प्रदेश में पार्टी अपने लक्ष्य और मकसद से भटकती नजर आ रही है। यहां पर बीजेपी नेताओं, मंत्रियों, विधायकों से लेकर कार्यकर्ताओं तक ने पार्टी के लिए मुश्किलें खड़ी करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। भाजपाई  शीर्ष नेतृत्व आखिर में मौन क्यों है? क्या इसे ही कहते है जीरो टॉलरेंस?आज आमजन के दिलो दिमाग पर सिर्फ  एक ही सवाल छाया हुआ है कि आखिर भाजपा सरकार में यह सब कुछ चल क्या रहा है?

अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करने के मामले लगातार

प्रदेश में भाजपा सरकार के मंत्रियों,विधायकों और पदाधिकारियों द्वारा अधिकारियों को धमकी देने के साथ ही अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं जो पार्टी की खासी किरकिरी करा रहे हैं। इन सबके बीच गौर करने वाली बात ये है कि ये सब तब हो रहा है जब सत्ता,संगठन के साथ ही संघ के सख्त दिशा निर्देश हैं। नेताओं जनप्रतिनिधियों को अनुशासन,भाषा और आचरण पर विशेष ध्यान देने का फरमान है,लेकिन इन सिद्धांतों को तार तार करके पार्टी लाइन से हटकर काम किया जा रहा है। इस क्रम में नेताओं मंत्रियों और पदाधिकारियों की लंबी फेहरिस्त है,जिन्होंने पार्टी को असहज स्थिति में डाला है। वरिष्ठ नेताओं के बिगड़े बोल और अधिकारियों को खुलेआम दी जा रही धमकियों ने पार्टी की किरकिरी कराई है।

बीजेपी मंत्री और विधायक ही करा करे,पार्टी की फजीहत

पिछोर विधायक प्रीतम लोधी की तो उन्होंने करैरा के एसडीओपी आयुष जाखड़ को खुलेआम धमकी दी। इसके बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया है। वहीं विधानसभा के बजट सत्र में संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के विरुद्ध अमर्यादित भाषा बोली थी,जो काफी बड़ा मुद्दा बनी थी। इसके साथ साल 2025 में प्रदेश सरकार के मंत्री विजय शाह ने कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ  अमर्यादित और आपत्तिजनक टिप्पणी की थी,जिसके बाद मंत्री के साथ ही पूरी बीजेपी के लिए ये बयान गले की फांस बन गया था। इसके साथ ही हाई कोर्ट ने भाजपा विधायक संजय पाठक के खिलाफ  आपराधिक अवमानना के मामले में निर्देश जारी किए। उन पर अवैध उत्खनन मामले की सुनवाई कर रहे हाई कोर्ट जज से संपर्क करने की कोशिश का आरोप है।

इन बीजेपी विधायकों की भी कार्यप्रणाली और बयानों ने पार्टी की मुश्किल में डाला

दरअसल कुछ विधायकों ने पिछले कुछ समय के दौरान ऐसी हरकते की है,जो राजनीतिक गलियारों में काफी चर्चित हो रही हैं। सागर की देवरी विधानसभा सीट से भाजपा विधायक बृजबिहारी पटैरिया ने एक मामले में पुलिस द्वारा डॉक्टर के खिलाफ  एफआईआर दर्ज न करने से नाराज होकर केसली थाने के भीतर ही अपना इस्तीफा लिख दिया था। वहीं कुछ दिन पहले उनकी बेटी प्रियंका पटेरिया पर एक युवक को जूते से मारने के कारण भी काफी चर्चा हो चुकी है। वहीं दूसरी ओर  मऊगंज विधायक प्रदीप पटेल एक वीडियो में एडिशनल एसपी अनुराग पांडेय के सामने दंडवत होते नजर आए थे। आरोप लगाया कि पुलिस अधिकारी अपराधियों के साथ मिलकर उनकी हत्या की साजिश रच रहे हैं। इसके साथ ही भिंड विधायक नरेंद्र सिंह ने कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव पर मुक्का तान दिया था और गलत शब्द कहे थे। कहा जा सकता है कि बीजेपी की जो छवि है उसकी सिद्धांतों पर खुद पार्टी के नेता ही बट्टा लगा रहे हैं और संघ संगठन के निर्देशों को सरेआम ठेंगा दिखा रहे हैं।