क्या प्रदेश के भाजपाई नेताओ पर,साढ़े साती तो नहीं चल रही? पहले विजय शाह,फिर कैलाश विजयवर्गीय,बाद में प्रीतम सिंह लोधी लोधी और अब संजय पाठक- भाजपाई शीर्ष नेतृत्व आखिर में क्यों है मौन? -दलील दी,गलती से जज को फोन लग गया था
क्या प्रदेश के भाजपाई नेताओ पर,साढ़े साती तो नहीं चल रही? पहले विजय शाह,फिर कैलाश विजयवर्गीय,बाद में प्रीतम सिंह लोधी लोधी और अब संजय पाठक- भाजपाई शीर्ष नेतृत्व आखिर में क्यों है मौन? -दलील दी,गलती से जज को फोन लग गया था
झाबुआ/इंदौर। संजय जैन-सह संपादक। प्रदेश के कद्दावर भाजपा विधायक संजय पाठक के लिए न्यायिक मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। हाई कोर्ट के एक माननीय जस्टिस को फोन कर सुनवाई प्रभावित करने के मामले में विधायक को मंगलवार को चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ के सामने व्यक्तिगत रूप से पेश होना पड़ा। विधायक ने कोर्ट के सामने सिर झुकाकर अपनी गलती स्वीकार की और बिना शर्त माफी मांगी, लेकिन अदालत ने फिलहाल उन्हें पूरी तरह राहत नहीं दी है। पहले विजय शाह,फिर कैलाश विजयवर्गीय,बाद में लोधी और अब संजय पाठक-क्या भाजपाई नेताओ पर साढ़े साती तो नहीं चल रही..? भाजपाई शीर्ष नेतृत्व आखिर में मौन क्यों है....?
क्या था पूरा विवाद
मामले की जड़ 1 सितंबर 2025 की एक सुनवाई में है। कटनी निवासी आशुतोष दीक्षित की याचिका के अनुसार,विधायक संजय पाठक से जुड़ी एक कंपनी के अवैध उत्खनन मामले की सुनवाई जस्टिस विशाल मिश्रा कर रहे थे। जस्टिस मिश्रा ने तब यह खुलासा कर सबको चौंका दिया था कि विधायक ने उनसे फोन पर संपर्क करने की कोशिश की। इस हस्तक्षेप से नाराज होकर जस्टिस ने खुद को केस से अलग कर लिया और मामला चीफ जस्टिस को भेज दिया था। कोर्ट ने इसे अपराधिक अवमानना माना था।
विधायक ने बिना शर्त मांगी माफी
संजय पाठक की ओर से पेश हुए वकीलों ने दलील दी कि विधायक ने हलफनामे में अपनी गलती मान ली है। तर्क दिया गया कि अवमानना में दंड तभी दिया जाना चाहिए,जब गलती जानबूझकर की गई हो या आरोपी उसे स्वीकार न करे। उन्होंने इसे राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता से प्रेरित मामला भी बताया। हालांकि,युगल पीठ ने इस माफीनामे को रिकॉर्ड पर लेते हुए विधायक की उपस्थिति की अनिवार्यता को फिलहाल खत्म नहीं किया है। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की युगल पीठ ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए अगली सुनवाई 14 मई तय की है।
संजय पाठक केस में हाईकोर्ट ने अपनाया सख्त रुख
जबलपुर हाईकोर्ट में भारतीय जनता पार्टी के विधायक संजय पाठक द्वारा जज को फोन करने के मामले पर चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने सुनवाई की,जहां विधायक पाठक खुद मौजूद थे। संजय पाठक के वकील की दलीलों से हाईकोर्ट नाखुश नजर आया। हाईकोर्ट की तरफ से कहा गया है कि यह कोई दो पार्टी का युद्ध नहीं है। हमने मामले का स्वत संज्ञान लिया है,हाईकोर्ट की तरफ से सख्त लहजे में पूछा गया कि आखिर इतनी बड़ी गलती कैसे हो गई...? संजय पाठक की ओर से एडवोकेट देवदत्त कामत ने दलील दी कि गलती से जज को फोन लग गया था।
संजय पाठक ने कही ये बात
मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए संजय पाठक ने कहा कि नर्मदे हर कोर्ट का मामला है,इसलिए इस पर कोई टिप्पणी नहीं करुंगा। गलती से फोन लगने के सवाल पर संजय पाठक ने कहा कि 14 मई की तारीख पर पता चलेगा। इसके बाद वह सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिलने के बारे में कुछ नहीं बोले।
14 मई को होगी अगली सुनवाई
याचिकाकर्ता के वकील राजेंद्र सिंह ने कहा कि मैं आशुतोष दीक्षित की ओर से पैरवी कर रहा है। मैंने इंटरवेंशन की एप्लीकेशन मूव की थी,इस पर काफी चर्चा हुई,लेकिन हाईकोर्ट ने कहा कि इंटरवल एप्लीकेशन की जरूरत नहीं है और इसे खारिज कर दिया। अगर आप चाहें,तो हाईकोर्ट को असिस्ट या फिर सहयोग कर सकते हैं। संजय पाठक खुद मौजूद थे,व्यक्तिगत कोई भी टिप्पणी नहीं हुई,अब अगली सुनवाई 14 मई को होगी।

