रतलाम जिले के तीनों सांसद जनता की अदालत (फेसबुक) में पूरी तरह से रहे नाक़ाम-90 प्रतिशत यूजर्स ने तीनो सांसदों को बताया पूरी तरह से निष्क्रिय और उदासीन

झाबुआ।संजय जैन-सह संपादक। जैसा की सभी जानते है कि रतलाम देश के महत्वपूर्ण चुनिंदा जिलों में शुमार है। जहां देश के सबसे बड़े सीधे निर्वाचित पद 'सांसद' के रूप में एक या दो नहीं बल्कि तीन-तीन प्रतिनिधि हैं। परंतु तीनों ही सांसदों की कार्यशैली और जनता से जुड़ाव को लेकर जनता की राय बेहद ही निराशा जनक है। हाल ही में इसका खुलासा फेसबुक पोस्ट से हुआ है। जिसमें तीनों सांसदों के कार्यों पर वरिष्ठ पत्रकार मुकेशपुरी गोस्वामी रतलाम ने आमजन से प्रतिक्रिया मांगी थी, जिसमें लगभग 24 घंटे में ही सवा लाख लोगों ने पोस्ट को देखा और अपनी-अपनी ढेरो प्रतिक्रिया दी । उल्लेखनीय और खास बात यह है कि लगभग 90 प्रतिशत से ज्यादा यूजर्स ने तीनों सांसदों की कार्यशैली पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई और आमजन से सहज संपर्क में तीनो सांसद पूरी तरह से नाकाम रहे है,यह भी बताते हुए तीखे कमेंट किए हैं।

रतलाम जिले के तीनो सांसदों में किसका काम सबसे बेहतर है?

आपको बता दे कि मीडिया जगत के मेरे अभिन्न मित्र रतलाम प्रेस क्लब के अध्यक्ष वरिष्ठ पत्रकार मुकेशुपुरी गोस्वामी ने गत 11 अप्रैल को अपनी फेसबुक आईडी पर एक पोस्ट डालकर उन्होंने आमजन के समक्ष यह एक बड़ा गंभीर सवाल रखा कि रतलाम जिले के तीनो सांसदों में किसका काम सबसे बेहतर है...? पोस्ट में रतलाम झाबुआ ­संसदीय क्षेत्र की सांसद अनीता नागर सिंह चौहान, मंदसौर-जावरा संसदीय क्षेत्र के सांसद सुधीर गुप्ता और उज्जैन- आलोट क्षेत्र के सांसद अनिल फिरोजिया के कार्यकाल और कार्यशैली पर सवाल किए थे।

हर वर्ग  के लोगो ने खुलकर साझा की अपनी अपनी राय

मात्र 24 घंटे में ही सवा लाख से अधिक लोगों ने पोस्ट को देखा है और अपनी- अपनी प्रतिक्रिया दी। कई यूजर तो अब तक भी सतत कमेंट कर रहे हैं। गौरतलब  है कि प्रतिक्रिया देने वालों में किसान, युवा, महिलाओं के साथ भाजपा, कांग्रेस और अन्य राजनैतिक पार्टियों से जुड़े कार्यकर्ता तक भी शामिल हैं। लगभग सभी ने अपने क्षेत्र के सांसदों के कार्यो पर तीखी प्रतिक्रिया दी। कुछ लोगो ने तो सीधे ही 0 शून्य अंक दिए, जबकि कुछ ने खुल कर लिखा है कि 3 सालों में चुनाव जीतने के बाद सांसदों का योगदान लगभग शून्य ही रहा है। हालांकि बहुत कम लोगों ने अपनी पसंद से सांसद गुप्ता को चौहान और फिरोजिया से बेहतर करार भी दिया ,वही मजबूरी वश कुछ एक्का दुक्का पार्टी के कार्यकर्ताओं ने लिखा कि काम शानदार हो रहा है।

राष्ट्रवाद और मोदीजी के नाम सिवा कोई उपलब्धि नहीं

फेसबुक पर आई सैकड़ों प्रतिक्रियाओं में लोगों ने लिखा है कि रतलाम से जुड़े तीनों सांसदों की कोई व्यक्तिगत उपलब्धि तो नहीं है। एक व्यक्ति ने लिखा है कि मोदीजी के नाम पर यह सांसद जीते है, इसके अलावा इनकी कोई उपलब्धि नही है, न वे कुछ करने की कोशिश ही कर रहे हैं। वे अब अगली बार भी केवल मोदीजी के नाम पर वोट मांगेंगे, क्योंकि खुद तो कुछ भी नहीं कर रहे है। एक यूजर ने लिखा है कि रतलाम खास जिला है जिसमें तीन संसदीय क्षेत्र हैं, लेकिन एक भी सांसद जिले के किसी भी क्षेत्र पर ध्यान नहीं दे रहा है। कुछ अन्य यूजर ने तो तीनों को फर्जी तक करार दे दिया, जबकि अन्य ने उदासीन, किसी ने कमजोर और पूरी तरह से नाकामयाब तक लिखा। एक ने तो लिखा कि सांसद सिर्फ चुनाव में दर्शन देते हैं,उसके बाद पूरे 5 साल गायब रहते हैं, फिर  दोबारा से राष्ट्र की बात कहकर वोट मांगने चले आते हैं। कई लोगों ने बेहद सख्त लहजे में भी राय रखी है कि सांसदों का जनता से कही से कही तक कोई जुड़ाव ही नहीं है।

अनीता नागर सिंह का नाम  याद नहीं

तीनों सासंदों के मामलो में लोगों ने सांसद अनीता सिंह की सक्रियता सबसे कम बताई है। एक फेसबुक यूजर ने यहां तक लिखा है कि अनीता नागर सिंह चौहान रतलाम सांसद हैं,वे भूल ही गए है। एक ने लिखा है कि रतलाम सांसद अनीता सिंह ने एक साल में रतलाम जिले पर 1रुपया  भी विकास के नाम पर खर्च नहीं किए हैं। एक ने लिखा है कि भाजपा के नाम पर वोट करने वाले 80 प्रतिशत मतदाताओं को अनीता नागर सिंह का नाम भी याद नहीं है। एक ने लिखा है कि महिला होकर भी न तो महिला, न युवा, न किसान,न पिछड़ों के लिए ही सांसद ने कभी कोई पहल नहीं की है।

सांसद गुप्ता की जावरा से है लड़ाई

मंदसौर सांसद सुधीर गुप्ता को लेकर भी लोगों ने इसी तरह की प्रतिक्रिया दी है। एक व्यक्ति ने लिखा है कि सांसद गुप्ता को नोबल पुरस्कार मिलना चाहिए, जावरा विधानसभा से उनकी लड़ाई है। अन्य ने लिखा है कि जावरा क्षेत्र से सांसद महोदय की हमेशा से लड़ाई रही है। कई यूजर ने लिखा है कि चुनाव के बाद से गांव में समस्या और कार्यक्रमों में सांसद के आने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन सांसद उन्हें वक्त हो नहीं देते।

फिरोजिया को देखा ही नहीं

उज्जैन सांसद अनिल फिरोजिया को लेकर तो लगभग अधिकांश यूजर्स ने यही लिखा है कि उन्हें आलोट, ताल क्षेत्र में देखा ही नहीं गया है। एक यूजर ने लिखा है कि चुनाव के वक्त प्रचार सामग्री में उनका फोटो देखा था फिर दोबारा उन्हें तो देखा ही नहीं है। एक यूजर ने फोटो डालकर शमशान की बदहाल स्थिति बयां की है। वहीं अन्य ने लिखा है कि चंबल बांध हो या सड़क, पुलिया और समस्याओं के अधिकतर आवेदनों पर  से धूल की परत ही नहीं हट रही है।