रस से भरपूर-गुठली छोटी,फुटकर बाजार में 140 रुपए किलो वाले आमों का राजा बादामी आम की एंट्री,बना लोगों की पहली पसंद-आमों की मल्लिका-नूरजहां आम-पपीता जितना बड़ा 1 फीट लंबा और वजन 2.5 से 5 किलोग्राम
रस से भरपूर-गुठली छोटी,फुटकर बाजार में 140 रुपए किलो वाले आमों का राजा बादामी आम की एंट्री,बना लोगों की पहली पसंद-आमों की मल्लिका-नूरजहां आम-पपीता जितना बड़ा 1 फीट लंबा और वजन 2.5 से 5 किलोग्राम
झाबुआ। संजय जैन-सह संपादक। गर्मियों का मौसम और आम का साथ हर किसी को पसंद है। इसे भला कौन भूल सकता है....? जैसे-जैसे गर्मी का मौसम दस्तक दे रहा है,लोगों को आम की याद आने लग गई है। गर्मियों के मौसम की शुरुआत के साथ ही लोग आम का इंतजार करने लग गए है। सूरज की बढ़ती तपिश के साथ लोगों के बीच आम का क्रेज भी बढ़ता जा रहा है। आमतौर पर बाजारों में अल्फांसो, दशहरी, केसर,लंगड़ा और तोतापरी जैसे आमों का दबदबा रहता है,लेकिन एक ऐसी भी किस्म है जिसके बारे लोग कम जानते है। इस आम का साइज इतना बढ़ा होता है कि एक आम से ही पेट भर जाए,यह अनोखी किस्म प्रदेश के क_ीवाड़ा में पैदा होती है। इस खास से आम का नाम है नूरजहां साइज में पपीता जितना बड़ा यह आम अपने स्वाद के लिए जाना जाता है।
आमों का राजा बादामी आम
भीषण गर्मी के बीच झाबुआ के बाजार में एक मीठी राहत देखने को मिल रही है। गर्मी के इस सीजन में अगर कुछ सबसे ज्यादा चर्चा में है, तो वह है आमों का राजा बादामी आम ने इस समय बाजार में अपनी खास जगह बना ली है। मीठा स्वाद,ज्यादा रस और बेहतर क्वालिटी के कारण यह लोगों की पहली पसंद बनता जा रहा है। दक्षिण भारत से आया बादामी आम इन दिनों लोगों की पहली पसंद बनता जा रहा है। अपने खास स्वाद और रस के कारण यह आम तेजी से मार्केट में छा गया है। बादामी आम मुख्य रूप से आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के बागानों से आता है। इस बार तेलंगाना की आवक भी ज्यादा देखने को मिल रही है। बाजार में इस समय बादामी आम का बोलबाला है।
बाजार में 140-150 रुपए किलो रेट
फिलहाल झाबुआ के फुटकर बाजार में बादामी आम 140 से 150 रुपए किलो बिक रहा है। वहीं थोक बाजार में इसका भाव करीब 90 से 100 रुपए किलो तक है। व्यापारियों का कहना है कि शुरुआत में आम के दाम ज्यादा रहते हैं,लेकिन 10-15 दिन में कीमतें कम हो जाएंगी। इस बार मौसम का असर आम के व्यापार पर भी पड़ा है। समय से पहले बारिश और कम उत्पादन के कारण बादामी आम की आवक कम रही,इसी वजह से बाजार में इसके दाम थोड़े ज्यादा देखने को मिल रहे है।
व्यापारी बोले,जल्द सस्ता होगा आम
फल व्यापारी मोहम्मद जहीर के मुताबिक,इस समय आम की सप्लाई सीमित है,लेकिन आने वाले दिनों में आवक बढ़ेगी और कीमतों में गिरावट आएगी। तब आम हर वर्ग के लोगों की पहुंच में और आसानी से आ जाएगा। इस आम में भरपूर रस होता है,जिससे मैंगो शेक के लिए यह सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है। इसमें गुठली छोटी होती है,जिससे खाने में गूदा ज्यादा मिलता है। इसका स्वाद बेहद मीठा और रसीला होता है,जो हर उम्र के लोगों को पसंद आता है। इसका गूदा गाढ़ा और मुलायम होता है,जिससे इसकी क्वालिटी और बढ़ जाती है।
आमों की मल्लिका- नूरजहां आम
प्रदेश के अलीराजपुर जिले के कट्ठीवाड़ा क्षेत्र में पाई जाने वाली नूरजहां आम की किस्म अपने विशाल आकार से और बेहतरीन स्वाद के लिए प्रसिद्ध है,जिसे बादाम की तरह कीमती और खास माना जाता है। यह दुर्लभ शाही आम मुख्य रूप से कट्ठीवाड़ा में ही पाया जाता है और इस नूरजहां आम के बेहद सीमित 10 पेड़ हैं, जिसकी बुकिंग महीने पहले ही हो जाती है। आमों की मल्लिका नूरजहां आम अपने आकार,स्वाद के लिए जानी जाती है। इसका आकार एक पपीते के बराबर होता है। अफगानिस्तानी मूल के इस आम की खेती प्रदेश के अलीराजपुर जिले के कट्ठीवाड़ा क्षेत्र में की जाती है,लेकिन इस आम के पेड़ों की संख्या लगातार घटती जा रही है,जिसका संरक्षण के लिए वन विभाग ने प्रयास तेज कर दिये है।
नूरजहां आम की विशेषताएं
आकार- एक आम का वजन 2.5 से 5 किलोग्राम तक हो सकता है,जो पपीते जितना बड़ा होता है।
मूल स्थान- यह आम मुख्य रूप से कट्ठीवाड़ा अलीराजपुर जिले में पाया जाता है।
कीमत- इस आम की कीमत काफी ऊंची होती है-लगभग 1000-1200 रुपये प्रति आम।
विशेषता- अपनी मिठास और सुगंधित स्वाद के लिए प्रसिद्ध है।
संरक्षण और बुकिंग
नूरजहां आम की मांग बहुत अधिक है और इसके पेड़ों की घटती संख्या(केवल 10-12 पेड ़)को देखते हुए सरकार अब इसके संरक्षण और विस्तार के लिए वैज्ञानिक प्रयास कर रही है। इसके फल की बुकिंग आम पकने से कई महीने पहले ही हो जाती है। एक अलग आम की किस्म है,जिसे कर्नाटक में भी उगाया जाता है,लेकिन अलीराजपुर की इस दुर्लभ -नूरजहां* किस्म को इसके ऊंचे मूल्य और स्वाद के कारण बादाम जैसी ही शाही उपाधि दी जाती है।
आसान नहीं नूरजहां आम पाना
इस विशाल किस्म के हर एक आम की बुकिंग पकने से बहुत पहले ही हो जाती है। जैसे-जैसे आम पकते हैं,पेड़ों को सहारा देना पड़ता है क्योंकि वे उनका वजन सहन नहीं कर पाते। नूरजहाँ किस्म का आम पाना आसान नहीं है क्योंकि इसकी बुकिंग तीन महीने पहले ही करानी पड़ती है। इस आम की किस्म को उगाने की पूरी प्रक्रिया में कम से कम तीन महीने लगते हैं। अपने विशाल आकार के कारण यह आम लोगों के बीच हंसी-मजाक का विषय बना हुआ है। हालांकि, इस किस्म के आम की खेती आसान नहीं है क्योंकि ग्राफ्टिंग के बाद आम के बड़े होने तक पर्याप्त देखभाल और ध्यान की आवश्यकता होती है।

