जिम्मेदार फिर भूले,गैस उपभोक्ता हो रहे परेशान- दो दिन ही चली कार्रवाई,र्जिसके बाद अभी फिर से घरेलू गैस सिलेंडर के व्यावसायिक इस्तेमाल से बढ़ रहा संकट-आम जनता  हो रही परेशान

झाबुआ। संजय जैन-सह संपादक।  जिले में बीते दिनों घरेलू गैस सिलेंडर की कालाबाजारी,भंडारण, इनका व्यवसायिक उपयोग पर कार्रवाई की गई थी। इस दौरान कुछ स्थानों पर कार्रवाई की गई थी,लेकिन इसके बाद कार्रवाई  बंद कर दी गई। जिसके बाद अभी फिर से  दुकानो, रेस्टोंरेंटों में घरेलू गैस सिलेंडरों का उपयोग खुलेआम किया जा रहा है। घरेलू सिलेंडरों का होटल, ढाबों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में धड़ल्ले से अवैध इस्तेमाल दिक्कतें बढ़ा रहा है। उल्लेखनीय यह भी कि गैस नहीं मिलने और दाम बढ़ने पर होटल व्यवसायियों ने नाश्ते और अन्य सामान की दरें बढ़ा ली है। दूसरी तरफ  रसद विभाग के नियम धरे के धरे रह गए है।

बेचे-खरीदे जा रहे हैं,मनमाने दामों में

अमेरिका व ईरान के बीच चल रहे अंतरराष्ट्रीय संघर्ष के बीच दुनियाभर में पेट्रोलियम पदार्थों का आयात-निर्यात प्रभावित होने से क्षेत्र में भी रसोई गैस की किल्लत है। घरेलू सिलेंडरों का होटल,ढाबों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में धड़ल्ले से अवैध इस्तेमाल दिक्कतें बढ़ा रहा है। दरअसल, सप्लाई में कमी और कीमत बढ़ने के अंदेशे पर घरेलू उपभोक्ताओं में अतिरिक्त सिलेंडर सुरक्षित रखने की होड़ है। व्यावसायिक सिलेंडर महंगे और कम मात्रा में उपलब्ध होने से भी घरेलू सिलेंडर की कालाबाजारी बढ़ी है। घरों से ये सिलेंडर घूमाकर चाय की थड़ियों,मिठाई की दुकानों,रेस्तरां और वेल्डिंग यूनिट्स में मनमाने दामों में बेचे-खरीदे जा रहे हैं।

उज्ज्वला से भी मुनाफाखोरी

सूत्र बताते हैं कि उज्ज्वला योजना में सब्सिडी पर मिल रहे सिलेंडर भी मुनाफाखोरी की भेंट चढ़ रहे हैं। वैसे इन उपभोक्ताओं को सिलेंडर तो सामान्य दर में ही मिल रहे हैं, लेकिन बिल कटते ही सब्सिडी लाभार्थी के खाते में आ जाती है। इसके बाद सिलेंडर 200 सौ 300 सौ रुपए ब्लैक में दुकानदारों को बेचे जा रहे हैं। दुकानदार भी कमर्शियल गैस के मुकाबले यह सस्ती पाकर हाथों हाथ ले रहे हैं। इससे घरेलू सिलेंडर को आपूर्ति पर भी संकट बढ़ रहा है।

परेशान हो रहे गैस उपभोक्ता

अमेरिका व ईरान के बीच चल रहे अंतरराष्ट्रीय संघर्ष के बीच जिले में लोगों को समय पर गैस सिलेंडर नहीं मिलने से गैस उपभोक्ता परेशान हो रहे हैं। घर की रसोई की सब्सिडी वाली गैस होटलों,रेस्टोरेंट और नाश्ते के ठेलों पर उपयोग की जा रही हैं। प्रशासन की अनदेखी के चलते दुकानदारों व होटल संचालकों को आवश्यक वस्तु अधिनियम के प्रावधान का जरा भी खौफ  नहीं है। जिले में सैकड़ों वाहन भी इसी के उपयोग से चल रहे हैं। इससे जिले में कई स्थान पर अवैध गैस रिफिलिंग सेंटर खुल गए हैं,प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है।

बच रहे हैं कार्रवाई करने से

बीते दिनों कुछ स्थानों में कार्रवाई करने के बाद टीमों ने मामले ठंडे बस्ते में डाल दिए हैं। अब फिर से घरेलू सिलेंडरों का उपयोग किया जाने लगा है। हालात हैं कि पुलिस लाइन के सामने,बस स्टैंड, चौक-चौराहों में स्थित रेस्टोरेंट,मिठाई दुकान,चाय समोसे की दुकान व हाथ ठेला में खुलेआम घरेलू गैस सिलेंडर का उपयोग कर रहे हैं। इसकी जानकारी जिम्मेदार अधिकारियों को है और वह आते जाते उसको देख भी रहे हैं,फिर भी कार्रवाई करने से बच रहे हैं।

वितरण केंद्र में लग रहीं लाइनें

जिले में घरेलू गैस सिलेंडर लेने के लिए एजेंसियों द्वारा बनाए गए वितरण सेंटरों में लोगों को भीड़ लग रही है। लोगों को गैस सिलेंडर के लिए 8 से 10 दिनों का भी इंतजार करना पड़ रहा है। वहीं होम डिलेवरी के लिए भी लोगों को 15 से 18 दिनों तक का इंतजार करना पड़ रहा है। लेकिन व्यवसायिक उपयोग करने वालों को गैस सिलेंडर तत्काल ही उपलब्ध हो जाते हैं।

दर में बड़ा अंतर

व्यावसायिक सिलेंडर से 2166 रुपए कीमत में 19 किलो यानी 114 रुपए प्रति किलो गैस मिल रही है। जबकि 937 रुपए के घरेलू सिलेंडर से 14.2 किलो यानी 65.98 रुपए प्रति किलो भाव ही है।

यह है कानूनी प्रावधान

रेस्टोरेंट,होटल,नाश्ता सेंटर और चाय थड़ी पर घरेलू सिलेंडर का उपयोग खुलेआम किया जा रहा है,लेकिन रसद विभाग और प्रशासन के अफसर तवज्जो नहीं दे रहे। घरेलू गैस की ब्लैक मैकेटिंग कर व्यावसायिक उपयोग पर प्रशासन और रसद विभाग की धरपकड़ उपरांत आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत कार्रवाई की जाती है। इसमें दोषी को सात साल की जेल या जुर्मान की सजा है।

अवैध और दंडनीय अपराध है

होटलों,ढाबों या व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में रियायती दर वाले घरेलू गैस सिलेंडर 14.2 किलो का उपयोग करना अवैध और दंडनीय अपराध है। घरेलू गैस बनाम व्यावसायिक गैस में अंतर के तहत, व्यवसायों के लिए कमर्शियल सिलेंडर 19 किलो या अधिक अनिवार्य हैं। ऐसा करने पर आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कार्रवाई,जुर्माना और सिलेंडर जब्ती हो सकती है।

संजय पाटिल- खाद्य आपूर्ति अधिकारी, झाबुआ