लापरवाही-नलों में टोटी नहीं होने से हर महीने बर्बाद हो रहा करीब 20 लाख लीटर पानी-जल बचाने और संरक्षण के प्रति नगर पालिका का रवैया उदासीन,टोंटियां लगाने नजर नहीं आ रही गंभीरता

झाबुआ। संजय जैन-सह संपादक। बिना टोंटी वाले नलों से पानी का बहाव एक गंभीर समस्या है,जिससे हर महीने लाखों लीटर पानी की बर्बादी होती है। स्थानीय प्रशासन को इन सार्वजनिक स्टैंड पोस्टों पर तुरंत नई टोंटियां लगाना चाहिए ताकि जल संरक्षण सुनिश्चित हो सके। निवासियों को भी जागरूक होकर पानी की बर्बादी रोकने के लिए नगर निगम में शिकायत करनी चाहिए। नगर पालिका प्रशासन नलों में टोंटियां लगाने के प्रति बिल्कुल भी गंभीर नजर नहीं आ रहा है। यही कारण है नपा के सार्वजनिक नलों से भी टोटियां गायब हो चुकी हैं। शहर के 18 वार्डो में अधिकांश सार्वजनिक नलों में टोटियां नहीं होने से प्रतिदिन पानी की बर्बादी हो रही है। नालों में टोटियां लगवाने को लेकर सालों से नपा की तरफ  से किसी प्रकार का सर्वे नहीं होने से यह स्थिति बनी हुई है। पानी का दुरुपयोग हो रहा है,जिससे भविष्य में जल संकट पैदा हो सकता है।

हो जाता है लाखों लीटर पानी बर्बाद

शहर में जब भी पेयजल सप्लाई होता है,बिना टोंटी के नल से लाखों लीटर पानी बर्बाद हो जाता है। इसके लिए सरकारी महकमे से ज्यादा हम जिम्मेदार है। बात चाहे सार्वजनिक स्टैंड पोस्ट की या फिर गली- मोहल्लों में लगे बिना टोंटी के नल की। पानी के दुरुपयोग की बातें तो सभी करते हैं,लेकिन इस समस्या से हर कोई बेपरवाह बना रहता है। हर किसी का एक ही जवाब होता है हमें क्या करना ? अधिकांश सार्वजनिक स्टैंड पोस्ट में कहीं भी नल की टोंटी नहीं लगी है। इतना ही नहीं कुछ स्टैंड पोस्ट से नल ही गायब हो गए हैं। लगभग 250 घरेलू नल कनेक्शन भी उसी स्थिति में हैं। लिहाजा, सप्लाई के दौरान आधा पानी व्यर्थ बह जाता है।

अधिकांश सार्वजनिक नलों में टोटियां नहीं, बर्बाद होता है पानी

शहर में करीब 45 से 60 मिनट पानी की सप्लाई होती है। इस दौरान सार्वजनिक नलों में टोटी नहीं होने से पानी बहता है। गली-मोहल्ले में नलों से पानी बहकर नालियों में एकत्रित होता है। जहां नालियों की सफाई नहीं होने से मच्छरों का लार्वा पनपते हैं। जिससे मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ता है। सालों से इसी तरह सार्वजनिक नलों और घरेलू कनेक्शनों से पानी बहता है। लेकिन नगरपालिका द्वारा किसी प्रकार का सर्वे भी नहीं किया जाता है, जिससे कि सार्वजनिक नलों और घरेलू नल कनेक्शनों में टोंटी लगाने के प्रति नागरिकों को पाबंद किया जा सके।

जलसंकट बढ़ रहा है,पानी की एक-एक बूंद को बचाना जरूरी

वक्त आ गया है कि पानी की बर्बादी के बारेे में गंभीरता से विचार किया जाए। जिससे पानी की एक-एक बूंद का सही उपयोग हो सके क्योंकि गर्मी लगातार अपना रौद्र रूप दिखा रही है और तेज धूप की वजह से जल स्रोत का पानी भी जल्दी सूख रहा है। शहर में ही कई कॉलोनियों में जल संकट की स्थिति बन गई है। लिहाजा पानी बचाने की सख्त आवश्यकता है। नगरपालिका के अनुसार एक बार की सप्लाय में एक नल से 5000-10000 लीटर पानी मिलता है। टोंटी नहीं होने पर इसमें से करीब 500 लीटर पानी निश्चित तौर से उपयोग नहीं हो पाता है। यदि 400 टोंटी विहीन नल कनेक्शन के लिहाज से देखें तो एक बार में ही 2 लाख लीटर पानी सड़क व नाली में बह जाता है।

दो दिन छोड़कर होता है पेजयल सप्लाय

वर्तमान में शहर में दो दिन छोड़कर पेयजल सप्लाई हो रहा है। इस लिहाज से महीनेभर में 10-11 बार लोगों को पानी मिलता है। यदि एक बार में दो लाख लीटर पानी व्यर्थ बह जाता है तो 10 बार में यह आंकड़ा 20 लाख लीटर हो जाता है।

कोई ठोस कदम नहीं

शहर के जागरूक नागरिकों का कहना है कि अभी डेम भरा हुआ है,लेकिन जैसे-जैसे गर्मी आती है, डेम का जलस्तर कम हो जाता है और गर्मी में लोगों को जलसंकट का सामना करना पड़ता है। यदि नगर पालिका अभी से पानी बचाने का प्रयास करे तो गर्मी में लोगों को पानी की समस्या नहीं आयेगी। लोगों ने बताया कि नगरपालिका द्वारा व्यर्थ बहते पानी को रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता है।

समाधान

-स्थानीय नगर पालिका या जल विभाग को सूचित करें ताकि वे का उपयोग करके मरम्मत करा सकें।
-स्थानीय नगर पालिका में शिकायत करें।
-जब तक मरम्मत न हो,नल के मुंह को लकड़ी या कपड़े से अस्थायी रूप से बंद करने का प्रयास करें।
-पड़ोसियों को भी टोंटी लगाने के लिए प्रेरित करें।

लोग समझदारी दिखाएं तो,बच जाएगा पानी

घरेलू नल कनेक्शन में जहां टोंटी नहीं लगी है,उन्हें खुद समझना होगा। वैसे ही जलसंकट के हालात है। ऐसे में यदि थोड़ी समझदारी बरतेंगे तो समस्या हल हो जाएगी। नल  में टोटियां नहीं लगी है,पानी व्यर्थ बह रहा है। इसके लिए सतत मुहिम भी हमारे द्वारा चलाई जाएँगी। नगर पालिका कार्रवाई करेगी,जुर्माना भी वसूला जाएगा।

मिलन पटेल-नगर पालिका, सीएमओ- झाबुआ