अब 2 से ज्यादा बच्चे वालों को भी मिलेगी सरकारी नौकरी बदलेगा 25 साल पुराना नियम, 30 हजार से ज्यादा शिक्षकों को मिलेगी राहत
अब 2 से ज्यादा बच्चे वालों को भी मिलेगी सरकारी नौकरी बदलेगा 25 साल पुराना नियम, 30 हजार से ज्यादा शिक्षकों को मिलेगी राहत
पुराने नियम के तहत तीसरी संतान वालों के लिए बजी थी,खतरे की घंटी इसके चलते छीन गई थी,महिला शिक्षिका की सरकारी नौकरी
झाबुआ/इंदौर। संजय जैन,सह-संपादक। प्रदेश में अब दो बच्चों वाला नियम खत्म होने जा रहा है। जल्द ही तीन या उससे ज्यादा बच्चों वाले लोगों को भी सरकारी नौकरी का मौका मिलेगा। मुख्यमंत्री ने नियम खत्म करने की सैद्धांतिक मंजूरी दे दी हैं। मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरी से जुड़ा करीब 24 साल पुराना दो बच्चों वाला नियम अब खत्म होने की तैयारी में है। सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री ने प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। यह प्रतिबंध 2001 में दिग्विजय सिंह सरकार ने सिविल सेवा नियम, 1961 में संशोधन कर लागू किया था।सामान्य प्रशासन विभाग ने इस संबंध में प्रस्ताव तैयार कर लिया है,जिसे मुख्यमंत्री से सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है। अब इसे जल्द ही कैबिनेट में पेश किया जाएगा। अगर कैबिनेट से मंजूरी मिलती है,तो तीन या उससे अधिक बच्चों वाले लोगों को सरकारी नौकरी से न तो बाहर किया जाएगा और न ही नौकरी पाने से रोका जाएगा। अभी तक इस नियम के कारण कई कर्मचारी और उम्मीदवार प्रभावित हो रहे थे।
क्या था पुराना नियम?
साल 2001 में तत्कालीन सरकार ने सिविल सेवा नियमों में बदलाव कर यह प्रावधान लागू किया था। इसके तहत दो से ज्यादा बच्चे होने पर सरकारी नौकरी में नियुक्ति या नौकरी जारी रखने में दिक्कत आती थी। यानी उनको अपात्र माना जाता था। इस बदलाव का सबसे ज्यादा फायदा शिक्षा विभाग को मिलेगा। जानकारी के अनुसार,बड़ी संख्या में शिक्षक ऐसे हैं जो इस नियम से प्रभावित थे।
हो जाएगी नौकरी सुरक्षित
2 साल पहले प्रदेश के छतरपुर जिले में एक महिला शिक्षक को तीन बच्चों की मां होना उन्हें बहुत भारी पड़ गया था। स्कूल शिक्षा विभाग ने उसे नौकरी से हटा दिया था। महिला शिक्षक शासकीय स्कूल धमौरा में अध्यापक के पद पर पदस्थ थी। किसी ने 4 साल पहले उनकी शिकायत की थी कि मैडम की तीन संतान हैं। शिकायतकर्ता के अनुसार वे तीसरी संतान की बात को छिपाकर नौकरी का लाभ ले रही थी। शिकायत के बाद,दो वर्ष पहले 2023 में मैडम को आरोप पत्र जारी कर अपनी स्थिति स्पष्ट करने को कहा गया था। आरोप पत्र के बाद वे स्पष्ट नहीं कर पायी थी कि उनकी तीन संतान नहीं है और उन्होंने कोई नियम नहीं तोडा है। ज्ञात हो कि इसके बाद विभागीय जांच शुरू हुई थी। जांच में ये बात सामने आई थी कि रंजीता साहू ने 2001 के बाद तीसरी संतान के जन्म का तथ्य छिपाया था। जिसके चलते संयुक्त संचालक सागर ने गत 21 मार्च 2025 को बाकायदा आदेश जारी कर उनकी सेवा समाप्त कर दी थी। आपको बता दे कि ऐसे मामलों को लेकर लगातार शिकायतें कई विभागों में अब भी लंबित हैं। अब नया नियम लागू होने के बाद उनकी नौकरी सुरक्षित हो जाएगी। इसके अलावा स्कूल शिक्षा,उच्च शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग में भी हजारों मामले लंबे समय से लंबित हैं,जिन्हें अब सुलझाया जा सकेगा।
बना था दिग्विजय सरकार में नियम- अब फैसला कैबिनेट में होगा
उल्लेखनीय है कि सरकारी सेवक की तीसरी संतान होने पर उन्हें अयोग्य घोषित किए जाने का नियम 2001 में कांग्रेस शासनकाल अर्थात दिग्विजय सिंह की सरकार में बना था। तब से लेकर अब तक कई सरकारी कर्मचारियों की नौकरियां जा भी चुकी हैं। प्रदेश में जून 2023 में भी एक ऐसा ही मामला सामने आया था। जिसमें रहमत बानो मंसूरी को तीसरी संतान होने पर 7 जून 2023 को उन्हें पद से हटा दिया था। उन्हें हटाने के पीछे मध्यप्रदेश सिविल सेवा 1961 नियम छह का उल्लंघन होना पाया गया था। रहमत बानो की शिकायत मध्यप्रदेश शिक्षक कांग्रेस ने 2020 में की थी,इसके बाद रहमत बानो मंसूरी हाईकोर्ट पहुंची थी। उन्होंने अपने ब्लॉक के 34 शिक्षकों की सूची भी लगाई थी, जिनके 3 या उससे अधिक बच्चे हैं,वह भी इस नियम के तहत आते हैं। यह मामला स्कूल शिक्षा विभाग का था,लेकिन अन्य विभागों के अनेक कर्मचारी और अधिकारी भी इस नियम की हद में आते हैं। पुराने नियम के तहत उपरोक्त जिन जिन कर्मचारियों को अपनी नॉकरी से हाथ धोना पड़ा था,अब इनका सबका फैसला कैबिनेट में होगा।
पुराने मामलों पर भी होगा फैसला
सरकार उन कर्मचारियों को भी राहत देने पर विचार कर रही है,जिन्हें तीसरी संतान के कारण नौकरी से हटाया गया था या जिनके मामले कोर्ट में चल रहे हैं। कैबिनेट इन सभी मामलों पर अंतिम निर्णय ले सकती है। बता दें पिछले कुछ वर्षों में इस नियम को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता के खिलाफ बताया गया और बदलते सामाजिक हालात के हिसाब से इसे पुराना माना गया। इसी बीच जनसंख्या संतुलन को लेकर भी चर्चा तेज हुई,जिसके बाद सरकार ने इस पर पुनर्विचार शुरू किया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने प्रस्ताव तैयार कर लिया है और इस पर सहमति बन गई है,इसे जल्द ही कैबिनेट में रखा जाएगा। इसके बाद तीसरी संतान होने पर किसी कर्मचारी को बर्खास्त नहीं किया जा सकेगा।
क्यों किया जा रहा नियम में बदलाव?
कुछ वर्षों में इस नियम की प्रासंगिकता पर सवाल उठे। इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता के खिलाफ माना गया। हाल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ.मोहन भागवत ने तीन बच्चों पर जोर दिया। इसके बाद बदलाव की प्रक्रिया तेज हुई।18 फरवरी को लखनऊ में मोहन भागवत ने घटती जनसंख्या पर चिंता जताते हुए कहा कि तीन बच्चों का औसत समाज के अस्तित्व के लिए जरूरी है। जिस समाज में परिवार में तीन बच्चे नहीं होते,वो भविष्य में खत्म हो जाता है। उन्होंने भारत की 2.1 प्रजनन दर का हवाला देते इसे वैज्ञानिक तरीके से समझाया।
विधानसभा भी पहुंचा था मामला,तर्क भी था रोचक
2 साल पहले मध्यप्रदेश के विदिशा जिले में 955 शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था,जिनके तीन या तीन से अधिक बच्चे हैं। इस कार्रवाई के बाद विभाग में हड़कंप मच गया था। यह मामला सुर्खियों में आ गया था,जब विधानसभा में तीन या तीन से अधिक संतान वाले कर्मचारियों के बारे में प्रश्न पूछा गया था,इन सभी से जवाब मांगा गया था। इनमें से 156 शिक्षकों ने जवाब दिया था, इनमें से कई कर्मचारियों ने नौकरी बचाने के लिए तीसरी संतान को गोद देने जैसे दावे भी किए थे। किसी ने लिखा था कि ऑपरेशन फेल हो गया था।
बैठे है 30 से 45 साल तक के कई लड़के कुंवारे
आकड़ो नुसार जानकारी निकल कर आयी है कि कई समाज में लड़कियों की कमी होने से विवाह योग्य लड़कों के लिए लड़कियां नहीं मिल पा रही हैए इसके चलते 30 से 45 साल तक के उम्र लड़के कुंवारे बैठे हुए है वही दूसरी ओर कुछ ने तो अंतर्जातीय विवाह भी कर लिया है। ऐसे में अब अधिक संतान पैदा करने की बात भी होने लगी है।
फैसले का होगा यह असर
-कोर्ट और विभागीय स्तर पर लंबित मामलों पर कैबिनेट फैसला करेगी।
-तीसरी संतान से जुड़े मामलों में कर्मचारियों को कानूनी लड़ाई और तनाव से राहत मिलेगी।
-बर्खास्तगी का डर खत्म होगा,प्रभावित कर्मचारियों की नौकरी सुरक्षित होगी।
-नई भर्तियों में तीन संतान वाले उम्मीदवार भी पात्र होंगे,जिससे प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।
-2001 के बाद बर्खास्त कर्मचारियों के मामले पर भी कैबिनेट निर्णय लेगी।
सैद्धान्तिक अनुमति मिल चुकी
प्रस्ताव को मुख्यमंत्री की सैद्धान्तिक अनुमति मिल चुकी है। जिन कर्मचारियों की नौकरी गयी है,जिनके मामले कोर्ट में लंबित है उनका फैसला अब कैबिनेट में होगा।
नीरज मंडलोई- प्रमुख सचिव, सीएमओ

