आग लगने पर हो सकता है बड़ा हादसा-बिना फायर सेफ्टी के ही बन रहे व्यवसायिक भवन, धड़ल्ले से दे दी जा रही अनुमति-दिनोंदिन बढ़ रही है व्यवसायिक भवनों की संख्या

झाबुआ। संजय जैन-सह संपादक। शहर के मुख्य मार्गों सहित बाजार में बड़े-बड़े व्यवसायिक भवन बनाए जा रहे हैं,जिसमें नियमों को ताक पर रखा जा रहा है। इन भवनों में फायर सेफ्टी के लिए कोई व्यवस्था नहीं है और फिर भी इन्हें टाउन एंड कंट्री प्लानिंग से अनुमति मिल जाती है।

फायर सेफ्टी सिस्टम व्यावसायिक भवनों में होना चाहिए

व्यवसायिक भवन बनाते समय पार्किंग,फायर सेफ्टी सहित अन्य सुविधाएं होने पर ही नपा या टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग से अनुमति दी जाती है, लेकिन यहां कई भवन ऐसे हैं,जहां यह सुविधाएं नहीं हैं। इन भवनों में दुकानें संचालित हो रही हैं। फायर सेफ्टी के नाम पर सिर्फ छोटे-छोटे अग्निशमन यंत्र रख दिए जाते हैं,जो आग पर काबू पाने के पहले ही खाली हो जाते हैं। नियमानुसार पूरा फायर सेफ्टी सिस्टम भवनों में होना चाहिए।

पता नहीं कितनों के पास फायर सिस्टम है और कितनों ने ले रखी है एनओसी ?

शहर के 18 वार्ड में निजी कॉलोनियों के अलावा पुराने रहवासी क्षेत्र है। नपा की राजस्व शाखा के अनुसार कॉलोनियों व रहवासी क्षेत्रों में 4 हजार से ज्यादा छोटी-बड़ी बिल्डिंग बनी हुई है। इसमें 2 मंजिला से लेकर 3 मंजिला तक के भवन व मल्टी, काम्प्लेक्स, अस्पताल और होटल आदि बने है। करीब 400 बिल्डिंग ऐसी है,जिनकी ऊंचाई 9 मीटर या इससे ज्यादा है। नपा की राजस्व व लोक निर्माण शाखा के कर्मचारी व इंजीनियर इस आंकड़े को मानते है, उनके पास रिकॉर्ड नहीं है। उन्हें यह भी पता नहीं है कि कितनी बिल्डिंग में नियमानुसार फायर सिस्टम लगे है?और कितनों ने एनओसी ले रखी है? जबकि नए नियम के दायरे में आने वालों को फायर सिस्टम लगवाने के साथ एनओसी लेना आवश्यक है।

नहीं है पार्किंग व्यवस्था

व्यावसायिक भवनों में नियमानुसार बेसमेंट में पार्किंग होना चाहिए,लेकिन बेसमेंट में भी दुकानें खुली हुई हैं। इसके बाद भी नगर पालिका द्वारा कार्रवाई नहीं की जाती है। जिन भवनों में बैंक संचालित हो रहे हैं, वहां भी पार्किंग नहीं है,जबकि बैंक खोलते समय एग्रीमेंट में पार्किंग के लिए जगह का उल्लेख रहता है, लेकिन वाहन सडक़ों पर ही खड़े होते हैं। इन दुकानों में फायर सेफ्टी के नाम पर सिर्फ  छोटे-छोटे अग्निशमन यंत्र रख दिए जाते हैं,जो आग पर काबू पाने के पहले ही खाली हो जाते हैं।

यह है नियम

फायर एक्सटिंग्विशर होना ही चाहिए, लेकिन मल्टी,काम्प्लेक्स,अस्पताल और होटल बिल्डिंग या कॉलोनी का काम होने के बाद बिल्डर्स कंप्लीशन सर्टिफिकेट नहीं लेते और जो लेते हैं उन्हें इंजीनियर सिर्फ  स्ट्रक्चर का कंप्लीशन दे देते हैं।

सर्वे कराएंगे

व्यावसायिक भवनों में नियमानुसार बेसमेंट में पार्किंग और फायर सेफ्टी होना चाहिए,लेकिन बेसमेंट में भी दुकानें खुली हुई हैं। जानकारी लेने के साथ ही,ऊँची बिल्डिंग मल्टी, काम्प्लेक्स, अस्पताल और तलघर का सर्वे करवाएंगे।

मिलन पटेल-नगर पालिका, सीएमओ- झाबुआ