नई दिल्ली। उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू का रविवार को कनॉट प्लेस में आम लोगों के बीच अचानक पहुंचना सिर्फ एक औपचारिक दौरा नहीं, बल्कि शहर को करीब से समझने की कोशिश नजर आया। देश की राजधानी के शक्तिशाली पद पर बैठे संधू का इस तरह सड़कों पर उतरना दिल्ली के भविष्य के लिहाज से अहम संकेत माना जा रहा है। दिल्ली के उपराज्यपाल ने कनॉट प्लेस में आम लोगों के बीच जाकर सीधे संवाद किया। यह दौरा बिना किसी पूर्व योजना के था, जहां उन्होंने अलग-अलग पृष्ठभूमि के लोगों, खासकर युवाओं और प्रोफेशनल्स से लंबी बातचीत की। संधू सबसे पहले मशहूर जैन चावल वाले की दुकान पर पहुंचे। यहां वे आम लोगों की तरह लाइन में लगे और कढ़ी-चावल खरीदे। उन्होंने वहीं खड़े होकर खाना खाया और लोगों से उनके काम, करियर, रोजगार, परेशानियों और उम्मीदों पर बात की। इसके बाद वे केवेंटर्स पहुंचे, जहां मिल्कशेक लेते हुए भी लोगों से बातचीत जारी रखी।

बातें सुनीं, समस्याओं का समाधान पूछा

इस दौरान उपराज्यपाल ने न सिर्फ लोगों की बातें सुनीं, बल्कि उनसे समस्याओं के समाधान भी पूछे। उन्होंने कहा कि अनुभव ने उन्हें सिखाया है कि बेहतर प्रशासन वही होता है, जो लोगों के बीच से निकलता है। उन्होंने टॉप डाउन के बजाय बॉटम-अप अप्रोच पर जोर देते हुए कहा कि नीतियां लोगों की जरूरतों के हिसाब से बननी चाहिए। उन्होंने कनॉट प्लेस में साफ-सफाई, ट्रैफिक और अन्य व्यवस्थाओं का भी जायजा लिया। यहां आने वाले लोगों से उन्होंने दिल्ली के अलग-अलग इलाकों की स्थिति के बारे में भी जानकारी ली। इससे पहले भी उपराज्यपाल मॉडल टाउन, वसंत विहार, चित्तरंजन पार्क और लाल किले जैसे इलाकों में इस तरह लोगों के बीच जाकर संवाद कर चुके हैं।

बड़े शहरों का अनुभव दिल्ली के काम आए

भारतीय विदेश सेवा के पूर्व अधिकारी संधू श्रीलंका में भारत के उच्चायुक्त और अमेरिका में भारत के राजदूत रह चुके हैं। दुनिया के बड़े शहरों का अनुभव रखने वाले संधू अब दिल्ली को बेहतर बनाने की दिशा में जमीनी समझ विकसित कर रहे हैं। दिल्ली जैसे बड़े और जटिल शहर में, जहां हर बड़े फैसले पर उपराज्यपाल की अहम भूमिका होती है, उनका इस तरह लोगों के बीच जाना उम्मीद जगाता है कि आने वाले समय में फैसले और ज्यादा लोगों की जरूरतों के करीब होंगे।