आज से  शुरू होगा आईपीएल-सटोरियों ने कर ली अपनी पूरी बिछात ,साथ ही क्या पुलिस की भी इन पर नकेल कसने की तैयारी कर ली है या नहीं? 

बैंको को भी होना होगा अलर्ट-सख्त कार्रवाई की जरूरत-सटोरिये खौफ  में तो है

झाबुआ। संजय जैन-सह संपादक। पुलिस विभाग का यह प्रथम दायित्व होता है आमजन के जान माल की रक्षा व सुरक्षा करें। शिकायती आवेदन को जांच कर तत्काल कार्यवाही करें तथा अपराधियों पर नकेल कसे। लेकिन झाबुआ जिले में पुलिस विभाग की लचीली कार्यप्रणाली के कारण जिले में अवैध रूप से सट्टा संचालन,शराब विक्रय ,मांस मटन विक्रय तथा अनैतिक गतिविधियां भी अपने पैर पसार रही है। पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली के कारण आज जिले में जहां अपराधियों में पुलिस का भय होना चाहिए,वहीं आमजन में पुलिस का भय बढ़ता जा रहा है।

आज से  शुरू होगा आईपीएल-सटोरियों ने कर ली अपनी पूरी बिछात

पूरे जिले में क्रिकेट सट्टे का अवैध कारोबार तेजी से फैलता जा रहा है। आज से आईपीएल शुरू होगा -सटोरियों ने कर ली अपनी पूरी बिछात कर ली है। सट्टा किंग भले ही भूमिगत हो गए हों,लेकिन उनके गुर्गे गली-मोहल्लोंए किराए के फ्लैटों और होटलों से बेखौफ  होकर सट्टा खिला रहे हैं। जनता से रिश्ता लगातार पुलिस को इस अवैध गतिविधि के प्रति आगाह करता रहा है,इसके बावजूद शहर के कई इलाकों में क्रिकेट सट्टा धड़ल्ले से संचालित हो रहा है। सटोरिए महादेव ऑनलाइन एप के जरिए क्रिकेट सट्टा संचालित कर रहे हैं,जिनका सीधा संपर्क इंटरनेशनल खाईवालों से बताया जा रहा है।

जिले में अवैध सट्टे का कारोबार

जिले में अवैध सट्टे का कारोबार धीरे-धीरे फलता फूलता जा रहा हैै। झाबुआ जिले के शहरी क्षेत्र के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी अब तो सट्टे का कारोबार अपना पैर पसारते हुए नजर आ रहा है । झाबुआ शहर में ही अनेक स्थानों पर सट्टे के कारोबारी आसानी से नजर आते हैं । कई क्षेत्रों में यह सट्टा विगत कई वर्षों से लगातार जारी है। कई समाचार पत्रों में एवं न्यूज़ पोर्टल पर सट्टे के कारोबार को लेकर लगातार खबरों का प्रकाशन किया गया। इन खबरों में सट्टे के कारोबारियों का नाम, मोबाइल नंबर तक दर्शाया गया था तथा किन-किन ग्रुप के माध्यम से यह व्यापार संचालित होता है,यह भी खुले रूप से खबरों के माध्यम से प्रकाशित किया गया था। संभवत: पुलिस विभाग को इन सट्टा कारोबारियों का कारोबार ही नजर नहीं आ रहा है। शहर के अलावा,जिले के विभिन्न क्षेत्रों  व रहवासी क्षेत्रों में यह सट्टे के कारोबारी आसानी से सट्टा,मोबाइल के द्वारा संचालित करते हुए देखे जा सकते हैं तथा कौन-कौन इन सटे के कारोबार में शामिल है....? इसकी जानकारी आमजन को तो है,पर पुलिस को है या नहीं  ....यह समझ से परे है ..?

बैंको को भी होना होगा अलर्ट

आज से आईपीएल होगा शुरू होगा। सटोरिये मोबाइल,लैपटॉप और महादेव एप के जरिए ऑनलाइन करोड़ों रुपये का लेनदेन ट्रांजैक्शन करते  है। सटोरिये इंस्टेंट बैंक अकाउंट का इस्तेमाल करते हैं, जो 5 से 10 मिनट में खुल जाते हैं। वेरिफिकेशन से पहले ही इन खातों में लाखों का लेनदेन कर अकाउंट बंद कर दिया जाता है। सट्टे का नेटवर्क अब शहरों तक सीमित नहीं रहा। छोटे कस्बों और गांवों तक खाईवालों के गुर्गे घूम-घूमकर सट्टा खिला रहे हैं। जिले में कई सट्टे के मामले सामने आने के बाद से तो अब बैंको को भी अलर्ट रहने कि आवश्यकता है उन्हें नए खातों के वेरिफिकेशन में 15-20 दिन के लिए का समय लेना चाहिए,ताकि सट्टे से जुड़े लेनदेन पर नजर रखी जा सके।

दुबई तक जुड़े हैं तार

सूत्रों के अनुसार,सट्टेबाजों और खाईवालों के तार मुंबई, दिल्ली जैसे बड़े शहरों के साथ-साथ दुबई तक जुड़े हैं। किसी भी विवाद या रकम फंसने की स्थिति में खाईवाल अपने गुर्गों के जरिए धमकी देने से भी नहीं चूकते।

सटोरियों की जानकारी आमजन को है तो पुलिस को क्यों नहीं?

पुलिस कार्रवाई के अभाव में सट्टे के कारोबारी दिन दुगनी रात चौगुनी की तर्ज पर विकास कर रहे हैं । इनमें से कुछ सट्टे कारोबारी तो अपने आप को समाजसेवी के रूप में दर्शाने का प्रयास कर रहे हैं। जहां तक जानकारी का सवाल है शहर के करीब-करीब आमजन से लेकर वार्डवासियों तक को इन सटोरियों की जानकारी है तो पुलिस को क्यों नहीं ....? और यदि पुलिस को जानकारी है तो फिर यह सट्टे कारोबारी खुलेआम शहर में सट्टा लेते हुए क्यों नजर आ रहे हैं....?

नहीं होता है नकद में लेनदेन

भारत में सट्टा और जुआ पूरी तरह से बैन है,लेकिन इसके बाद भी लोग सट्टेबाजी करने या फिर क्रिकेट में सट्टा लगाने से बाज नहीं आते है। सट्टा लगाकर लोग शॉर्टकट के चक्कर में लखपति बनने की फिराक में रहतहै। आज से शुरू होने वाला है जिसमें करोड़ों का सट्टा लगाया भी जायेगा। आपको बता दे कि आईपीएल में सट्टा लाइन पर चलता है। लाइन का नंबर छोटे शहरों में बैठे बुकी के पास होता है। बुकी ही लोगों को सट्टा खिलवाते है। मैच शुरू होने के साथ ही एक-एक गेंद पर भाव तय हो जाता है। मजबूत और कमजोर टीम के हिसाब से भाव तय होता है। इसी भाव के आधार पर ही प्रति ओवर और प्रति बॉल के हिसाब से सट्टा लगाया जाताहै। आईपीएल में सट्टा लगाने पर नकद में लेनदेन नहीं होता है। सारा खेल फोन पर बैठे-बैठे होताहै। मोबाइल वॉलेट और खाते के जरिए पैसे इधर-उधर ट्रांसफर किए जात ेहै। अगर बिना सरकार की इजाजत के सट्टा खेला जाता है तो आईपीसी 1860 की धारा 294/क के तहत कार्रवाई होती है। केंद्रीय कानून सार्वजनिक जुआ अधिनियम 1867 के तहत अगर कोई व्यक्ति सट्टा खेलते हुए पकड़ा जाता है तो पुलिस उसको तुरंत गिरफ्तार कर लेतीहै। इसके बाद उसको अदालत में पेश किया जाता है और अदालत में सट्टा खेलने के जुर्म में 200 रुपये का जुर्माना या तीन महीने की सजा का प्रावधान है। कई बार सजा और जुर्माना दोनों होते है।

फल फूल रहा,अवैध शराब का कारोबार

झाबुआ शहर के साथ- साथ जिले में भी अवैध रूप से शराब का कारोबार,एफएमसीजी कंपनियों की तरह फैलता जा रहा है,यह माना जा सकता है । अवैध शराब पर कार्रवाई के लिए , आबकारी विभाग का दायित्व है । लेकिन यह भी सच है कि बिना पुलिस की सहमति से यह अवैध शराब का कारोबार संभव नहीं है। झाबुआ शहर के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी अब तो किराना की दुकानों पर भी दूध,दही,शक्कर,चाय पत्ती के अलावा शराब भी इन दुकानों पर आसानी से उपलब्ध हो रही है। जहां तक कार्रवाई का सवाल है,पुलिस विभाग को भी इसकी संपूर्ण जानकारी है व आबकारी विभाग को भी, लेकिन दोनों ही विभाग की गैर जिम्मेदार कार्यप्रणाली के कारण यह व्यापार जिले का सबसे बड़ा व्यापार के रूप में स्थापित हो रहा है। सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि युवा पीढ़ी इस अवैध शराब के चुंगल में फंस कर अपने भविष्य को बिगड़ रही है,लेकिन जिम्मेदार आंखें मूंद कर बैठे हैं। नगर सहित जिले भर मे कई ऐसे ढाबे संचालित हो रहे है ,जहां पर आसानी से कम से कम ओर महंगी से महंगी शराब आसानी से मिल जाती है। इसी के साथ ही कई ऐसे रहवासी इलाके भी नगर में है,जहां पर अवैध शराब कारोबारी अपना धंधा आसानी से चला रहे है। वही उनके द्वारा खुद यहा तक कहा जाता है कि हमें किसी का डर नहीं है। वही शराब ठेके से कंपनी के गाडियो में खुद शराब को भरकर आसपास के क्षेत्रों में सप्लाई किया जा रहा है। थांदला क्षेत्र के बठ्ठा में आज भी लाखों की शराब का परिवहन अवैध रूप से आसानी से किया जा रहा है,लेकिन पुलिस के द्वारा छोटे छोटे केस बनाकर इन पर इतिश्री कर ली जाती है। आखिर इस अवैध परिवहन का सिलसिला कब तक रूकेगा? इसे बताना मुश्किल है।

सख्त कार्रवाई की जरूरत-सटोरिये खौफ  में तो है

सूत्रों का दावा है कि यदि पुलिस किराए के फ्लैटों और होटलों की गहन जांच करे,तो बड़ी संख्या में सटोरिए गिरफ्त में आ सकते हैं। लगातार फैलते इस अवैध कारोबार पर लगाम लगाने के लिए ठोस और सख्त कार्रवाई की मांग उठने लगी है। इस बार देखा जा रहा है कि पुलिस कप्तान डॉ.शिवदयाल सिंह के रहते सटोरिये पूरी तरह से खौफ  में तो है । लेकिन यह खौफ  कितना प्रभावी रहेगा....? यह तो आगे आने वाला वक्त ही बताएगा?