क्या मनरेगा का खेल,अब जी राम जी स्कीम में भी यथावत रहेगा?-मप्र में 9 साल में 6963 खेल मैदानों पर खर्च किए 115 करोड़ झाबुआ जिले में 25 फीसदी भी अस्तित्व में नही-जिले में 395 खेल मैदानों के लिए खर्च किए जा चुके है -6.04 करोड़ रुपए-जमीनी हकीकत, गड्ढे व झाड़ियों से पटे ज्यादातर मैदान,कई जगह कब्जेधारी खेती कर रहे,युवा सड़कों पर दौड़ लगाने को मजबूर
क्या मनरेगा का खेल,अब जी राम जी स्कीम में भी यथावत रहेगा?-मप्र में 9 साल में 6963 खेल मैदानों पर खर्च किए 115 करोड़ झाबुआ जिले में 25 फीसदी भी अस्तित्व में नही-जिले में 395 खेल मैदानों के लिए खर्च किए जा चुके है -6.04 करोड़ रुपए-जमीनी हकीकत, गड्ढे व झाड़ियों से पटे ज्यादातर मैदान,कई जगह कब्जेधारी खेती कर रहे,युवा सड़कों पर दौड़ लगाने को मजबूर
झाबुआ। संजय जैन-सह संपादक। ग्रामीण विकास की सबसे बड़ी कोई योजना है तो वह है मनरेगा। विकास कार्यों के साथ लोगों को रोजगार मुहैया करने के लिए लागू महात्मागांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी स्कीम में हर साल हजारों करोड़ का बजट आता है। 2022-23 के लिए केंद्र सरकार ने 73000 करोड़ बजट प्रावधान किया। इसी योजना से औसत हर ग्राम पंचायत स्तर पर एक-एक खेल मैदान बनाया। प्रदेशभर में करीब 6963 खेल मैदान बनाए,जिन पर 115 करोड़ खर्च हुए। सर्वाधिक 92 फीसदी निर्माण 2016 से 2018 के बीच हुए। उद्देश्य था ग्रामीण प्रतिभाओं को खेल के लिए बेहतर मैदान व माहौल मिलेगा। आर्मी,पुलिस भर्ती की तैयारी कर रहे युवा दौड़ या अन्य वर्क आउट कर सकेंगे लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ,न ही ज्यादातर मैदान साबूत ही बचे है।
खर्चे गए 9 साल के दरम्यान मनरेगा में 395 खेल मैदान बनाने पर 6.04 करोड़
52 जिलों के 313 ब्लॉक में कुल 23169 ग्राम पंचायतें वर्तमान में हैं। जिले में 9 साल के दरम्यान मनरेगा में 395 खेल मैदान बनाने पर 6.04 करोड़ खर्चे गए, इनमें 25प्रतिशत भी साबूत नहीं हैं। कही गड्ढे,झाड़ियां तो कही अतिक्रमणकर्ताओं ने कब्जे जमा लिए हैं। कही पंचायत में युवाओं द्वारा तैयार किए खेल मैदान पर कुछ लोगों ने जेसीबी चला कर खाई खोद भूखंड बांट दिए। मैदान मे झांड़ियां उग रही व पशु विचरण कर रहे,जिले में 75 फीसदी खेल मैदानों का यही हाल है। क्या मनरेगा का यही खेल,अब जी राम जी स्कीम में भी यथावत रहेगा?
खर्च दी पंचायतों ने मस्टर भरकर राशि
पंचायतों ने मस्टर भरकर राशि खर्च दी,लेकिन सही प्लानिंग व मेंटेनेंस नही होने से मैदान कागजों में दर्ज होकर रह गए, हकीकत में कुछ नहीं है। यह तो झाबुआ जिले का उदहारण है ै। यदि मप्र में बाकी जगह भी ऐसा हुआ तो यह बड़े घोटाले से कम नहीं। हैरानी इस बात की है मनरेगा हर साल सोशल ऑडिट करता है,लेकिन इसमें भी,जमीनी हकीकत सरकार तक नहीं पहुंच रही,वरना मैदानों की सुध लेकर या अतिक्रमण मुक्त कर उपयोगी बना सकते हैं। क्या मनरेगा का यही खेल,अब जी राम जी स्कीम में भी यथावत रहेगा...?
मैदान सिर्फ कागजों में रह गए
जो सरकारी भूमियां रिक्त थी,वहां केवल ट्रैक्टर चलाकर या मजदूरों से समतलीकरण कर दिया,मुरम भराव नहीं किया,बाउंड्री नहीं बनाई। इसलिए लोगों ने कब्जे कर लिए। मुरम नहीं होने से बारिश मे मवेशी घुसने से उबड़-खाबड़ हो गए। सिर्फ वे ही मैदान सुरक्षित हैं जो किसी स्कूल परिसर में थे और पंचायतों ने उन्हें ही संवारना बताकर राशि आहरित कर दी,वहां स्कूलों ने मेंटेनेंस किया हैं।
प्रदेश स्तर पर 6963 खेल मैदानो पर खर्चे गए 115 करोड़ रुपए-किस वर्ष कितने खेल मैदान बने व कितनी राशि खर्ची
निर्माण वर्ष मैदान राशि खर्च हुई
2014-15 67 2.45 करोड़
2015-16 133 4.69 करोड़
2016-17 3343 64.89 करोड़
2017-18 3064 36.79 करोड़
2018-19 235 3.85 करोड़
2019-20 78 1.25 करोड़
2020-21 32 59 लाख
2021-22 09 11 लाख
2022- 02 1 लाख
(नोट-आंकड़े मनरेगा की सरकारी वेबसाइट से प्राप्त जानकारी के अनुसार)
जिले में 395 खेल मैदानों के लिए खर्च किए जा चुके है 6.04 करोड़ रुपए- किस वर्ष कितने खेल मैदान बने व कितनी राशि खर्ची
निर्माण वर्ष मैदान राशि खर्च हुई
2014-15 27 59.58 लाख
2015-16 11 65.76 लाख
2016-17 160 2.33 करोड़
2017-18 167 1.76 करोड़
2018-19 14 27.16 लाख
2019-20 03 4.93 लाख
2020-21 08 30.13 लाख
2021-22 03 6.35 लाख
2022 02 0.13 लाख
(नोट-आंकड़े जिला पंचायत कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार।)
०बॉक्स खबर०
लगभग 3 वर्ष पूर्व पेटलावद ब्लॉक जामली के खिलाड़ियों ने आरोप लगाया था कि उन्होंने जनसहयोग से 25 हजार रूपये एकत्रित कर खेल मैदान का समतलीकरण किया था। तब भी यहाँ से वाहनों का आना जाना लगा रहता रहा,जिससे खेल मैदान में बड़े बड़े गद्दे भी हो चुके है ,आये दिन कोई न कोई खिलाडी चोटिल होता ही रहता है। खिलाड़ियों ने बताया कि मुख्यमंत्री की घोषणानुसार यहाँ स्टेडियम बनना था,जिसके चलते दिखावे के नाम पर कुछ हिस्से में सिर्फ बैठक व्यवस्था बना दी गयी थी और स्टेडियम भी भ्रष्टाचार की भेट चढ़ गया,ऐसा साफ प्रतीत भी हो रहा है। खिलाड़ियों का आरोप था कि शायद मैदान के समतलीकरण के नाम से 2 लाख रूपये खर्च बता दिया गया,जबकि ऐसा कोई कार्य यहाँ हुआ नहीं था। खिलाड़ियों का कहना था कि इसकी जाँच न करवाई गयी तो चक्का जाम करने को विवश भी हो जायेंगे,जिसकी समस्त जिम्मेदारी प्रशासन की रहेगी।
०बॉक्स खबर०
मामले की जांच करती हूं
मामले की जानकारी नहीं है,आपने बताया हैं तो मामले की जांच करती हूं। यदि कहीं कोई लापरवाही हुई हैं तो मामले की जांच करवा कर उचित कार्रवाई कराएंगे।
सोनल भाभर, अध्यक्ष-जिला पंचायत

