जिला पंजीयक विभाग ने की तैयारी- एक अप्रेल से जिले में बढ़ेंगे जमीन के दाम, 10 से 17 फीसदी तक होगी वृद्धि-39 करोड़ के लक्ष्य में सबसे बड़ा रोड़ा,धारा165 के तहत अनुमति का

झाबुआ। संजय जैन-सह संपादक।    अगर आप जमीन खरीदने का मन बना रहे हैं,तो 31 मार्च के पहले खरीद ले,क्योंकि 1अप्रेल से जमीनों पर 10 से 17 फीसदी तक दाम बढ़ जाएंगे। शहर से लेकर गांव तक जमीन के भाव में वृद्धि होना है। इसके लिए जिला पंजीयक कार्यालय की ओर से पूरे जिले में जमीन का सर्वे भी करा लिया है। प्रारंभिक दर जिला मूल्यांकन समिति के पास भेजी जाएगी। इसके लिए 17 मार्च को कलेक्टोरेट कार्यालय में जिला मूल्यांकन समिति की बैठक आयोजित की गयी थी। जहां डिमांड वाली जमीनों के दाम को लेकर लगभग 10 से 17 प्रतिशत तक बढ़ाने हेतु मंथन होना था। इस बैठक में जिले में सम्पति का मूल्यलेकिन विभाग के पोर्टल में कुछ रूकावट आ जाने के कारण इस पर कोई भी चर्चा नहीं हो पायी थी। आपको बता दे कि एक हो लोकेशन पर दो या दो से अधिक अलग-अलग पॉइंट टैग कर लिए गए थे,अब उन्हें दोबारा से एक ही क्षेत्र पर दिखाते हुए टैग करने के बाद फिर से बैठक रखी जाएगी। जिला पंजीयक के बाद केंद्रीय मूल्यांकन समिति भोपाल के पास फाइल पहुंचाई जाएगी। वहीं से अंतिम फैसला होगा। 31 मार्च तक स्थिति स्पष्ट होने के बाद एक अप्रेल से नए रेट लागू कर दिए जाएंगे। जिले में क्षेत्रवार उप पंजीयक कार्यालय झाबुआ में 315,मेघनगर में 14,थांदला में 66 और पेटलावद में 202 लोकेशनो में बढ़ोतरी प्रस्तावित करना है,इसके पहले विभाग का फोकस 31 मार्च तक राजस्व वसूली पर भी है,इसलिए आप रविवार के दिन भी जमीनों की लेन देन कर रजिस्ट्री कराने का मन बना रहे हैं,तो कार्यालय खुला रहेगा।

डिमांड वाली जमीनों के भाव बढ़ेंंगे

जिला पंजीयक विभाग के मुताबिक लोकेशन के हिसाब से जमीन के भाव तय होंगे। कई जगह पर भाव में वृद्धि होगी। लेकिन कई भूमि के भाव को यथावत रखा जाएगा। कुल मिलाकर 10 से 17 फीसदी  फीसदी की वृद्धि होगी।

ये होते हैं समिति में

जिला मूल्यांकन समिति के द्वारा बैठक लेने के बाद इसके जमीनों की स्थिति पर चर्चा की जाती है। समिति के अध्यक्ष कलेक्टर,सचिव जिला पंजीयक-उप पंजीयक, भू-अभिलेख विभाग का अधीक्षक, एसडीएम, तहसीलदार,आर आई और पटवारियों को रखा जाता है। समिति की बैठकें होती है,इसके बाद जमीनों के दाम तय किए जाते हैं।

दे सकते हैं सुझाव,ले सकते हैं आपत्ति

एक अप्रैल से नई गाइडलाइन लागू होती है। इस पर जनता अपने सुझाव के आवेदन कलेक्टर और एसडीएम के यहां दे सकती है। यदि दाम कम या ज्यादा होते हैं तो इसकी आपत्ति कभी भी लगा सकते हैं।

धारा165/ख  कैसे बनी जी का जंजाल?                      

मप्र.भू-राजस्व संहिता की धारा 165/ख-जिसमे गैर आदिवासी की परिवर्तित भूमि के क्रय-विक्रय की कलेक्टर से अनुमति लेनी होती है। यह क्रय-विक्रय करने वाले दोनों ही पक्ष व शासन के लिए गले की हड्डी साबित हो रही  है। जिस आदिवासी समाज को ध्यान में रखकर यह धारा लागू की गई थी,उनको भी इससे कोई फायदा नहीं हो रहा है,उल्टे नुकसान ही हो रहा है। एक और तो इस धारा के कारण यह जिला विकासक्रम में पिछड़ रहा है,वही दूसरी और शासन को राजस्व की करोडो की हानि भी हो रही है।  इस धारा से गैर आदिवासियों में जमीन का हस्तांतरण कछुआ चाल से ही हो पा रहा है। जिसकी वजह कलेक्टर की अनुमति की कार्यशैली है। इसमें आवेदन कई विभागों को पार करते हुए कलेक्टर के पास पहुंचता है और प्रक्रिया काफी महँगी भी व थकाने वाली होती है।  जिससे भूमि लेने-देने वाले दोनों ही पक्ष अपने उद्देश्य में सफल नहीं हो पाते है।

खुद के ही राजस्व अमले की रिपोर्ट की अनदेखी

एक और धारा165/ख  व दूसरी और वर्तमान कलेक्टर की इससे अनभीज्ञता यहाँ की जनता पीड़ित और परेशान हो रही है। एक तो करेला उस पर नीम चढ़ा की कहावत पुर्णत: चरितार्थ हो रही है। पटवारी,आरआई, तहसीलदार व सारी एजेंसिया शासन की ही है और इनके द्वारा तैयार रिपोर्ट पर कलेक्टर द्वारा आदेश न करना, उल्टा क्रय-विक्रय करने वाले को आरोपित करना कि तुम भू-माफिया हो काफी हास्यास्पद और कष्टदायक है। यह कौन से कानून में लिखा है कि एक भूमि का एक से अधिक बार लेन-देन नहीं हो सकता है? कलेक्टर के इस रुख से मंजूरी के कई आवेदन लंबे समय से लंबित है, जिससे दोनों ही पक्षकारों में बेवजह विवाद और आर्थिक नुकसान हो रहा है। इन सबसे ऊपर शासन को राजस्व की करोडो की हानि हो रही है।

कैसे प्राप्त होगा लक्ष्य?- पूर्व के सभी कलेक्टर देते रहे अनुमति

पूर्व के सभी कलेक्टरों द्वारा भी नियम के तहत इस संबंध में मंजूरियां दी गई है, फिर वर्तमान कलेक्टर का यह रुख समझ से परे है। यदि कोई आपत्ति हो तो उसका निराकरण किया जा सकता है, मगर सिरे से ख़ारिज कर देना यह तो कोई न्याय नहीं है। इस धारा की समीक्षा की जानी चाहिय क्योकि यह अपने मूल उद्धेश्य में सफल नहीं हुई है। उल्टे गैर आदिवासियों के खिलाफ  हथियार के रूप में इस्तेमाल हो रही है। एक तरफ  तो जिला पंजीयक विभाग को39 करोड़ का लक्ष्य दे रखा है,वही दूसरी ओर कोई भी प्रकरणो में 165/ख की स्वीकृति नहीं देना,यह बात समझ के परे है। ऐसे में विभाग अपने लक्ष्य को कैसे प्राप्त कर सकेगा? यह एक चिंतन का विषय है।

                                                    -बॉक्स खबर-
39 करोड़ का लक्ष्य में सबसे बड़ा रोड़ा धारा 165 के तहत अनुमति का.......

जिले में  अधिकतर मामलो में धारा 165 के तहत अनुमति मिलने के बाद ही रजिस्ट्री होती है,लेकिन पिछले कुछ वर्षो में तत्कालीन 2 मातृ शक्ति कलेक्टर ने कुछ और वर्तमान की मातृ शक्ति कलेक्टर ने तो ना के बराबर ही धारा 165 के तहत शायद ही अनुमति दी हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि 39 करोड़ का लक्ष्य विभाग, शायद ही हासिल कर पायेगा? क्योंकि उनके इस लक्ष्य  को हासिल करने में सबसे बड़ा रोड़ा धारा 165 के तहत दी जाने वाली अनुमति की चाल,जो की चीटी के चाल से भी धीमी,है ऐसा हमारा मानना हैं। ऐसा करने की जिम्मेदार प्रशासन को सख्त आवश्यकता है कि वे सबसे पहले तो ऐसे तमाम लंबित धारा 165 के मामलो को तुरंत आज से ही  फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट की तरह बेहद गंभीरता और बेहद जिम्मेदारी से अपने टेबल पर बुला कर,सभी का जल्द से निराकरण करे। तो हो सकता है कि राजस्व अर्जित करने का लक्ष्य विभाग सहज ही प्राप्त भी कर लेगा।  
                                                                           -बॉक्स खबर-         
रविवार को भी खुले रहेंगे,कार्यालय 

मार्च एंडिंग तक रविवार को भी कार्यालय खुले रहेंगे। एक अप्रेल से जमीन के दाम बढ़ जाएंगे। हम लक्ष्य को पूरा करने हेतु सतत प्रयाशशील भी है। वैसे तो मार्च माह में हर वर्ष के मुकाबले काफी कम रजिस्ट्रियां हुई है। अब  शेष बचे दिनों में रजिस्ट्री के आधार पर ही हम अपने लक्ष्य को पूरा करने की पूरी कोशिश करंगे।  

जीआय मंडलोई- रजिस्ट्रार,झाबुआ