झोलाछाप डॉक्टर्स के क्लीनिक की तरह खुल गई पैथोलॉजी लैब, मरीजों से कर रहे मनमानी वसूली-बगैर पैथॉलोजिस्ट धड़ल्ले से संचालित की जा रही लैब,जिले में इनकी संख्या 50 से भी ज्यादा

झाबुआ। संजय जैन-सह संपादक। ब्लड टेस्ट के नाम पर पैथोलॉजी लैब का अवैध व्यापार दिन प्रतिदिन खूब फल फूल रहा है। हर गली-मोहल्ले में कोई न कोई पैथोलॉजी लैब नजर आ जा रही हैं। इन फर्जी लैब संचालकों के पास न तो कोई अनुमति होती है, न ही कोई लैब टेक्नीशियन उपलब्ध हैं। शहर में 5 से अधिक ऐसी ही पैथोलॉजी लैब चल रही, जो पूरी तरह से अवैध है।

पैथोलॉजिस्ट एक अनुमति अनेक

जिले में पैथोलॉजी लैब उसी तरह खुली हुई जिस तरह झोलाछाप डॉक्टरों के क्लीनिक वैसे अधिकांश लैब  भी  बिना अनुमति के ही चल रही है, लेकिन कुछ पैथोलॉजी संचालकों ने अनुमति भी ले रखी है। सबसे बड़ी गड़बड़ी तो ये है कि एक पैथोलॉजिस्ट ने अपने नाम से एक से अधिक जगह की अनुमति ले रखी है। जबकि नियमानुसार वे एक ही जगह की अनुमति ले सकता है,ऐसे में मरीज को जांच के बाद मिलने वाला परामर्श भी नहीं मिल पाता है। स्वास्थ्य विभाग की मिली भगत से लैब संचालकों को कार्रवाई का कोई डर नहीं रहता है। मरीजों से मनमानी राशि भी यह वसूलते हैं,कुछ टेस्ट तो किए बिना ही डाटा दे दिया जाता है। सिविल अस्पताल के सामने चल रहे ये अवैध लैब बिना संरक्षण के चल सकती है क्या...? बताया जाता है कि सरकारी डॉक्टरों के अधिकांश पर्चे इसी लैब पर आ रहे थे,जिसका कमीशन भी उन्हें पहुंचाया जा रहा था।

कमीशन का बड़ा खेल

मरीज अपना इलाज करवाने डॉक्टर के पास जाता है, तो उसे खून-पेशाब की जांच करवाने के लिए कहा जाता है। छोटी से छोटी जांच में भी 200 से 300 रुपए खर्च हो जाते हैं। टेस्ट के बाद जिस डॉक्टर का पर्चा होता है, उसके पास ली गई फीस अनुसार कमीशन पहुंच जाता है। कई लैब संचालक महीने में उनका हिसाब करते हैं। बताया जाता है कि ये कमीशन 30 से 40 प्रतिशत तक होता है। यही कारण है कि पिछले 5 सालों में लैब खुलने की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। वहीं जो डॉक्टर पहले कभी जांच नहीं करवाया करते थे,वे भी अब जांच करवाने लग गए हैं।

यह है नियम

नियमों की बात करें तो लैब संचालन के लिए एमडी पैथोलॉजिस्ट मौजूद होना चाहिए, लेकिन अधिकांश लैब पर पैथोलॉजिस्ट के दस्तावेजों के भरोसे ही काम चल रहा है। यहां तक इन लैब पर टेक्नीशियन तक मौजूद नहीं है। कुछ लैब संचालकों ने प्रशासन को गुमराह करने के लिए इसे कलेक्शन सेंटर का नाम दे दिया है,जिसके कारण स्वास्थ्य विभाग भी इन पर कार्रवाई करने से बचता रहा है।

लैब पर पैथोलॉजिस्ट होना चाहिए

लैब पर पैथोलॉजिस्ट होना ही चाहिए, कम से कम एमबीबीएस डॉक्टर तो हो,जिन लैब पर ऐसा नहीं है। हम एक टीम बनाकर दिखवा लेते हैं। आगामी दिनों में कार्रवाई करेंगे। 

डॉ.बीएस बघेल- सीएमएचओ -जिला अस्पताल,झाबुआ.