इंदौर गांधीनगर सहकारी संस्था-आयुक्त सहकारिता एवं पंजीयक मनोज पुष्प का सख्त एक्शन-जांच करने वाले उप अंकेक्षक सेठिया खुद ही उलझ गए,विभागीय जांच में
इंदौर गांधीनगर सहकारी संस्था-आयुक्त सहकारिता एवं पंजीयक मनोज पुष्प का सख्त एक्शन-जांच करने वाले उप अंकेक्षक सेठिया खुद ही उलझ गए,विभागीय जांच में
झाबुआ/इंदौर। संजय जैन-सह संपादक। वर्षों से चल रहे घपले,प्लॉटों की हेराफेरी जैसे मामलों से चर्चा में रही गांधीनगर सहकारी संस्था इंदौर की धांधली में अब उप अंकेक्षक आशीष सेठिया भी उलझ गए हैं। सेठिया ने इस संस्था की शिकायतों की जांच के बाद जो रिपोर्ट तैयार की उस रिपोर्ट में घालमेल करने के लिये संस्था प्रबंधक फूलचंद पांडे से तीन प्लॉट की डिमांड संबंधी ऑडियो रिकॉर्डिंग सहित अन्य दस्तावेज मनोज पुष्प-आयुक्त सहकारिता को शिकायतकर्ता जितेंद्र अग्रवाल ने भेजे थे। इसी आधार पर उन्होंने सेठिया के खिलाफ भी विभागीय जांच के आदेश जारी कर दिए है।
नौ साल से चल रहा था,शिकायतों का दौर
इंदौर गांधीनगर सहकारी संस्था के सदस्यों का हक मार कर संस्था प्रबंधकों ने अपने चहेतों और मुंह मांगी रकम देने वालों को सदस्य बनाकर प्लॉट आबंटित कर दिए थे। जिन सदस्यों का हक मारा गया उनमें 1950 में संस्था सदस्य मूलचंद ओंकारलाल यादव को भी प्लॉट आबंटित हुआ था। उनके निधन पश्चात उनके पुत्र सत्यनारायण अग्रवाल के नाम कागजों में ट्रांसफर तो हुआ लेकिन उन्हें कब्जा नहीं मिला। पिता के नाम आबंटित प्लॉट का कब्जा नहीं मिलने पर पुत्र जितेंद्र अग्रवाल 2018 से लड़ाई लड़ रहे हैं। उनके द्वारा दस्तावेजों के साथ की गई शिकायत पर तत्कालीन डीआर मदन गजभिये- सेवानिवृत्त ने धारा 59 की जांच जीएस परिहार को सौंपी थी। परिहार के जांच प्रतिवेदन के आधार पर धारा 53 के तहत गांधीनगर सहकारी संस्था को भंग कर के प्रवीण जैन को प्रशासक नियुक्त किया गया था।
प्रवीण जैन भी रंगे हाथों रिश्वत लेते पकड़ा
तत्कालीन प्रशासक प्रवीण जैन ने संस्था में धांधली संबंधी जो जांच रिपोर्ट डीआर गजभिये को सौंपी उस रिपोर्ट से डीआर संतुष्ट नहीं थे। इसी दौरान जैन को भी लोकायुक्त पुलिस टीम ने रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा था। प्रवीण जैन द्वारा जो जांच रिपोर्ट दी गई थी,डीआर गजभिये ने उस रिपोर्ट के निरीक्षण का जिम्मा आशीष सेठिया को सौंपा था। संस्था प्रबंधक फूलचंद पांडे से हुई कथित सेटिंग के चलते सेठिया ने अपनी रिपोर्ट के निष्कर्ष में आंशिक सहमत, आंशिक असहमत जैसी टीप लिख दी। इसी दौरान शिकायतकर्ता जितेंद्र अग्रवाल के हाथ सेठिया और पांडे के बीच हुई बातचीत का वो आडियो हाथ लग गया,जिसमें गोलमाल जांच रिपोर्ट के बदले सेठिया तीन प्लॉट की मांग कर रहे थे। यह ऑडियो उन्होंने लोकायुक्त पुलिस-ईओडब्ल्यू के साथ ही आयुक्त सहकारिता पंजीयक को भी भेजा था। इस मामले की जांच में आयुक्त सहकारिता ने पाया कि गांधीनगर संस्था के सारे दस्तावेज 2010 में जब्त किये जाने के बावजूद तीन प्लॉट 2015 में जारी किए गए। संस्था के रसीद कट्टे भी जब्त थे,लेकिन नए रसीद कट्टे छपवाकर तीन प्लॉट आबंटन किये गये थे। आयुक्त सहकारिता कार्यालय ने इस मामले में सेठिया को शोकॉज नोटिस जारी किया था,जिसका उन्होंने जवाब भी दिया था किंतु उस जवाब से आयुक्त मनोज पुष्प संतुष्ट नहीं हुए और सेठिया के खिलाफ जांच के आदेश भी दिए थे।
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सेठिया ने पदीय कर्तव्यों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही, उदासीनता एवं स्वेच्छाचारिता बरती
आयुक्त कार्यालय से जारी आदेश में कहा गया है कि आशीष सेठिया-उप अंकेक्षक की जिला इंदौर में पदस्थी के दौरान गांधी नगर गृह निर्माण सहकारी संस्था मर्यादित इंदौर के संबंध में उपायुक्त सहकारिता जिला इंदौर के स्तर से धारा 59 के अंतर्गत कराई गई जांच प्रतिवेदन के पालन प्रतिवेदन में सेठिया ने निष्कर्षात्मक टीप अधिनियम,नियम,उपविधि व विभागीय परिपत्रों के तहत मतांकन नही किये जाने से,संस्था के उत्तरदायी पदाधिकारियों, कर्मचारियों पर सक्षम स्तर से कार्यवाही नहीं की है। इस प्रकार सेठिया ने अपने पदीय कर्तव्यों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही,उदासीनता एवं स्वेच्छाचारिता बरती है। नियम 14 के अन्तर्गत उन्हें कारण बताओ सूचना पत्र आरोप पत्रादि सहित जारी किया जाकर उनका जवाब चाहा गया,सेठिया ने 29 अक्टूबर 2025 को अपना जवाब प्रस्तुत किया। प्रस्तुत जवाब का परीक्षण किये जाने पर मान्य योग्य नहीं पाए जाने के फलस्वरूप सेठिया के विरूद्ध विभागीय जांच संस्थित करने का निर्णय लिया गया। नियम 14 के अंतर्गत विभागीय जांच संस्थित करते हुए प्रकरण में उपायुक्त सहकारिता जिला इंदौर को नियम 14/2 के अंतर्गत जांचकर्ता अधिकारी एवं वरिष्ठ सहकारी निरीक्षक-सामान्य कार्यालय उपायुक्त सहकारिता जिला इंदौर को नियम 14/5 के अंतर्गत प्रस्तुतकर्ता अधिकारी नियुक्त किया गया है।

