अब नगरीय प्रशासन विभाग ने नगर परिषद चीचली(नरसिंहपुर)के अध्यक्ष को पद से हटाया,अनियमितताओं के चलते हुई बड़ी कार्यवाही-प्रदेश की एक और नगर परिषद अध्यक्ष,का पत्ता कट गया-अध्यक्ष के हाईकोर्ट जाने की चर्चा

लगातार प्रदेश की नगर पालिका और नगर परिषदों के अध्यक्षों की कुर्सी पर,अब तेजी से मंडरा रहा खतरा,पर अलग हट कर,संघर्ष से सिद्धि की विशेष पेशकश संजय जैन-सह संपादक की कलम से

झाबुआ/इंदौर। संजय जैन-सह संपादक। हाल ही में 2 निकाय श्योपुर और पानसेमल के अध्यक्षों के वित्तीय अधिकार शून्य घोषित कर दिए गए थे। गौरतलब है कि हमने कल ही बुधवार को प्रदेश की नगर पालिका और नगर परिषदों के अध्यक्ष की कुर्सी पर,अब तेजी से मंडरा रहा, वित्तीय अधिकार के शून्य घोषित होने का खतरा... नामक शीर्षक से खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था जिसमे हमने लिखा भी था कि आज आगे पढ़िए एक और प्रदेश की एक और नगर परिषद अध्यक्ष का पत्ता कैसे कट गया...?आज उसी कड़ी में हमारे लिखे नुसार आज यह खबर प्रकाशित कर रहे है। आपको बता दे कि अब नरसिंहपुर में एक बड़ी कार्रवई हुई है,जिससे हड़कंप मच गया है। दरअसल अवैध नियुक्तियों और अनियमिताओं पर यह कार्रवाई हुई है। जानकारी के मुताबिक चीचली निकाय अध्यक्ष को पद से हटा दिया गया है। नगरीय विकास व आवास विभाग ने नगर परिषद चीचली में अवैध नियुक्तियों और अनियमितताओं के केस में एक्शन लेते हुए निकाय अध्यक्ष शेख मंजूर उर्फ  बबलू सिंघानिया को तत्काल प्रभाव से पद से हटा दिया है। यह कार्रवाई  दैनिक वेतन भोगियों की अवैध तरीके से नियुक्ति व वेतन आहरण से संबंधित मामले में हुई है,इस बड़ी कार्रवाई से हड़कप मच गया है। यह कार्रवाई मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम 1961 की धारा 41-क के तहत की गई है।

शिकायत पर कलेक्टर ने कराई थी जांच

जानकारी के मुताबिक नगर परिषद चीचली में श्रमिकों की नियुक्ति में नियमों का उल्लंघन का मामला सामने आया था,इस पर रजनी सिंह तत्कालीन झाबुआ कलेक्टर जो अपनी चिर परचित कर्त्यव्य निष्ठ कार्य शैली से पहचानी जाती है और वर्तमान में नरसिंहपुर कलेक्टर ने जांच कराई थी। जांच में सामने आया था कि बिना सक्षम स्वीकृति के साप्ताहिक मस्टर पर श्रमिकों को रखा गया था। इन अनियमितताओं के चलते तत्कालीन अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ नगर परिषद अध्यक्ष शेख मंजूर भी प्रथम दृष्टया जिम्मेदार पाए गए।  अध्यक्ष शेख मंजूर 10 अगस्त 2022 से नगर परिषद चीचली के निर्वाचित अध्यक्ष के रूप में पदस्थ थे।जांच में सामने आया कि सक्षम स्वीकृति के बिना साप्ताहिक मस्टर पर श्रमिकों को रखा गया।

जांच में गंभीर अनियमितता पाई गईं

मामले में शासन द्वारा 24 दिसंबर 2025 को अध्यक्ष शेख मंजूर को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था और जवाब भी मांगा गया था।  उपलब्ध दस्तावेजों और जांच के आधार पर सामने आया कि अध्यक्ष अपने कर्तव्यों का पालन करने में असफल रहे और उनके कार्यकाल में गंभीर अनियमितताएं भी हुईं है। इसी आधार पर शासन ने उन्हें तत्काल प्रभाव से अध्यक्ष पद से हटाने का आदेश जारी दिया,साथ ही शासन ने उनके कार्यकाल में हुई नगर परिषद को हुई वित्तीय अनियमितताओं के लिए 12.18 लाख रुपए की आर्थिक हानि की अध्यक्ष और संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों से वसूली के आदेश भी दिए हैं।

पीआईसी ने स्वीकृति दी थी,लेकिन यह भी नियम विरुद्ध

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि 30 जनवरी 2023 को हुई पीआईसी बैठक के प्रस्ताव क्रमांक 19 के तहत छह अस्थायी श्रमिकों,जिनमें नूरी खान,राहुल अहिरवार, शक्ति कौरव, हरिओम कटारे,शशिन वर्मा और अबरार खान को दैनिक पारिश्रमिक पर रखने की स्वीकृति दी गई थी। हालांकि यह स्वीकृति नियमों के अनुरूप नहीं पाई गई।शासन की राय में उनका अध्यक्ष पद पर बने रहना लोकहित और परिषद के हित में उचित नहीं पाया गया,जिसके बाद उन्हें तत्काल प्रभाव से पद से हटा दिया गया।

आदेश के खिलाफ  शेख मंजूर,हाईकोर्ट में चुनौती देने की तैयारी में

आपको बता दे कि इस आदेश के खिलाफ  शेख मंजूर हाईकोर्ट में चुनौती देने की तैयारी में हैं। उनका कहना है कि दैनिक वेतन भोगियों को नौकरी पर रखे जाने संबंधी अनियमितता, प्रदेश की अनेक परिषदों में भी हुई है। इसके बावजूद सिर्फ उन पर ही कार्रवाई इसलिए की गई है,क्योंकि वे कांग्रेसी हैं। प्रदेश की परिषदों की भी जांच कराई जाए, लिहाजा वो आदेश को लेकर आगे कैसे कार्रवाई करनी है ....? इसको लेकर चर्चा कर रहे हैं। वैसे तो चीचली नगरपरिषद अध्यक्ष शेख मंजूर को पदच्युत करने के साथ ही नगरीय विकास एवं आवास विभाग मंत्रालय ने हाई कोर्ट में केविएट भी दायर कर दी है।