वर्षितप आराधना आरोग्यता का अचूक उपाय - भरत भंसाली
अष्ट वर्षीय आराधना क्रम में इस वर्ष वर्षितप की आराधना

थांदला। कमलेश जैन। जिन शासन गौरव के जन्म शताब्दी वर्ष के अंतर्गत अष्ट वर्षीय आराधना में तृतीय वर्ष में उनके 94वीं जन्म जयंती अवसर पर पूज्य श्री धर्मदास गण परिषद के आह्वान पर पूरे देश में सैकड़ो आराधक वर्षितप की आराधना से जुड़ेंगें। जानकारी देते हुए गण के राष्ट्रीय अध्यक्ष भरत भंसाली ने बताया कि बुद्धपुत्र प्रवर्तक श्री जिनेन्द्रमुनिजी म.सा. के  निर्देशन के आधार पर गण की साधारण सभा में लिए गए निर्णयानुसार सकल डूंगर-मालवा, राजस्थान, महाराष्ट्र आदि विभिन्न प्रांतों में सैकड़ो आराधक स्थानीय संघ के आयोजन में एक अनुमान के अनुसार 1 हजार से ज्यादा तपस्वी सामूहिक वर्षितप की आराधना के लिए तैयार हुए है। जिसमें लिमड़ी से 125, थांदला से 108, कुशलगढ़ से 70, बदनावर - रतलाम से 50 से अधिक संख्या में नाम सामने आए है, वही अन्य क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में तपस्वी भगवान आदिनाथ जन्म एवं दीक्षा कल्याणक फाल्गुन वदी अष्टमी 11 मार्च से प्रारम्भ करेंगें। भंसाली ने बताया कि जैनाचार्य पूज्य श्री उमेशमुनिजी म.सा. जैन जगत के प्रभावशाली संतों में से एक है उनके द्वारा रचित साहित्य व उनकी जीवनशैली से प्रभावित होकर अनेक आत्माओं ने संसार से विरक्त होकर संयम का मार्ग अपनाया है ,उनके जैन जगत पर अनेक उपकार है। ऐसे में उनके अनुयायी व अन्य जन जैन धर्म के प्रथम तप के रूप में मान्य आदि तीर्थंकर भगवान आदिनाथ ऋषभदेव जी के अंतराय रूप 13 माह तक निराहार रहने पर वर्तमान आराधक 400 दिवसीय वर्षितप की आराधना (एकान्तर उपवास) का संकल्प लेकर कर सकते है। भंसाली ने बताया कि जो वर्षितप आराधक एकांतर उपवास नही कर सकते , वे एकान्तर आयम्बिल, निवि अथवा एकासन से भी वर्षितप की आराधना कर सकते है। वर्षितप आराधकों में कभी कैंसर जैसी गम्भीर बीमारी नही आती व उनकी पुरानी बीमारियों को भी समाप्त होते देखा गया है। यह तप का प्रभाव है, जिससे असाता वेदनीय कर्म शांत होकर साता वेदनीय कर्म में परिवर्तित हो जाते है।

थांदला में चातुर्मास काल में चतुर्विद संघ का मिलेगा लाभ

संघ अध्यक्ष प्रदीप गादिया, सचिव हितेश शाहजी व प्रवक्ता पवन नाहर ने बताया कि विगत दिनों होली चतुर्मास पर संघ महिदपुर सिटी गया था ,जहाँ बुद्धपुत्र प्रवर्तक श्री द्वारा घोषित वर्षावास में इस वर्ष थांदला को संघ हित चिंतक तत्वज्ञ पूज्य श्री धर्मेन्द्रमुनिजी सहित नगर के ही दीक्षित अन्य सन्तों का चातुर्मास मिलेगा वही यहाँ माताजी म.सा. पूज्या श्री दिव्यशीलाजी की सेवा कारणों से विगत आठ वर्षों से सकारण स्थिरवास हेतु विराजित पूज्या श्री निखिलशीलाजी म.सा., पूज्या श्री प्रियशीलाजी, पूज्या श्री दिव्यशीलाजी आदि ठाणा 4 का भी वर्षावास होने से चतुर्विद संघ का लाभ मिलने जा रहा है। तत्वज्ञश्री गुरुदेव श्री उमेशमुनिजी म.सा. से ही दीक्षित होकर उनके ज्येष्ठ शिष्यों में से एक स्थवीर संत है। ऐसे में यहाँ वर्षितप का भव्य माहौल तो बनेगा ही साथ ही ज्ञान-दर्शन-चारित्र-तप की विशिष्ट आराधना भी देखने को मिलेगी। इस हेतु संघ के सभी सदस्य अभी से ही उनके आगमन व वर्षावास प्रारंभ होने की राह देखने लगे है।