मंत्री सिलावट की जमीन पोली करने लगा है,बरलाई शुगर मिल की जमीन बचाने का आंदोलन-बरलाई शकर कारखाने के संस्थापक बापू सिंह मंडलोई की प्रतिमा पर 11 को धरना-प्रदर्शन
मंत्री सिलावट की जमीन पोली करने लगा है,बरलाई शुगर मिल की जमीन बचाने का आंदोलन-बरलाई शकर कारखाने के संस्थापक बापू सिंह मंडलोई की प्रतिमा पर 11 को धरना-प्रदर्शन
झाबुआ/इंदौर। संजय जैन-सह संपादक। डॉ.मोहन यादव मंत्रिमंडल में इंदौर जिले से दो मंत्री प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इनमें एक तो सांवेर से विधायक तुलसी सिलावट,जो जल संसाधन मंत्री हैं। सरकार में भले ही उनकी मजबूत स्थिति हो,लेकिन उनके विधानसभा क्षेत्र में किसानों द्वारा बरलाई शुगर मिल की जमीन को बचाने के लिए किए जा रहे आंदोलन और उनकी चुप्पी से उनकी जमीन अभी दरकने सी लगी है। वही इंदौर का प्रतिनिधित्व कर रहे,दूसरे मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भागीरथपुरा दूषित पानी कांड के बाद से लगातार विवादास्पद बयानों के कारण घिरे हुए हैं।
टेक्सटाइल पार्क विकसित करने की योजना सरकार वापस ले
वर्तमान यादव सरकार में जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट के विधानसभा क्षेत्र सांवेर प्रदेश की एक प्रमुख बरलाई शुगर मिल,जो अब बंद हो चुकी है। अब इसकी भूमि हस्तांतरण के खिलाफ स्थानीय किसानों का आंदोलन और विवाद जारी है,जो उचित मुआवजे और जमीन पर अपने अधिकार की मांग भी कर रहे हैं। इस आंदोलन का दायरा मालवा क्षेत्र होने से आसपास के जिलों के किसान एकजुट भी हो चुके हैं,जिसके पीछे का कारण यह है कि बरलाई शुगर फैक्ट्री की स्थापना में अंशदाता,इन किसानों की एक ही मांग है कि चीनी मिल की 33 हेक्टेयर से अधिक जमीन पर टेक्सटाइल पार्क विकसित करने की योजना सरकार वापस ले लेवे।
सरकार की योजना, उद्योगों के साथ आवासीय उपयोग के भूखंड भी उपलब्ध कराएंगे
मप्र विकास निगम-एमपीआईडीसी ने बंद पड़ी बरलाई चीनी मिल और उसके आसपास के क्षेत्र को वस्त्र क्षेत्र के लिए एक औद्योगिक क्षेत्र में परिवर्तित करने का प्रस्ताव दिया है। बरलाई चीनी मिल में एक कपड़ा क्लस्टर विकसित करने का प्रस्ताव प्रस्तुत किया है और इनका लक्ष्य इसी वित्तीय वर्ष में काम भी शुरू करना है। प्रारंभिक योजना में उद्योगों के लिए तैयार स्थान उपलब्ध कराने के साथ-साथ औद्योगिक और आवासीय उपयोग के लिए भूखंड भी शामिल हैं। एमपीआईडीसी के कार्यकारी निदेशक चंद्रमौली शुक्ला का कहना है हमारा उद्देश्य उद्योगों के लिए एक व्यापक पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है,उनके अनुसार उन्हें बरलाई में जमीन के संबंध में विभिन्न उद्योगों से काफी रुचि भी मिली है। सपना जैन का कहना है कि कई उद्योगों ने बरलाई में जमीन खरीदने में रुचि दिखाई है। इंदौर से उसकी निकटता और संसाधनों की उपलब्धता को देखते हुए, हम इस औद्योगिक क्षेत्र में उच्च उपयोग की उम्मीद करते हैं। उद्योग विभाग उद्योगों से और अधिक निवेश आकर्षित करने के लिए क्षेत्र में कई मौजूदा औद्योगिक क्षेत्रों का उन्नयन कर रहा है और नए औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना कर रहा है।
मप्र में सहकारिता आंदोलन का प्रमुख नाम रहे हैं,बापू सिंह मंडलोई
मप्र के सहकारिता आंदोलन में मालवा-निमाड़ क्षेत्र के कांग्रेस के जिन दिग्गज नेताओं को याद किया जाता रहा है उनमें सुभाष यादव,महेंद्र सिंह कालूखेड़ा,रामेश्वर पटेल के साथ ही बापू सिंह मंडलोई का नाम भी है। आपको बता दे कि स्व. बापू सिंह मंडलोई ने शुगर कारखाने की स्थापना के लिये किसानों को अंशदाता बना कर राशि जुटाई थी। उक्त तीन जिलों के गन्ना उत्पादक किसानों से हजार-हजार रु.का अंशदान लेकर उन्होने उन्हें जोड़ा था। उस वक्त किसानों ने बरलाई शुगर फैक्ट्री की जिस 33 एकड़ जमीन के लिये एक-एक हजार रु.दिए थे। गौरतलब है कि आज उसी जमीन का बाजार मूल्य अब अरबों रुपये हो गया है । किसानों के आंदोलन का मूल मुद्दा यही है कि सरकार उस जमीन पर टेक्सटाइल पार्क तो स्थापित कर रही है,लेकिन अंशदाता हजारों किसानों को उनके जमीनी हक से वंचित कर रही है।
नरसिंहपुर राज्य का-चीनी का कटोरा
प्रदेश में मुख्य गन्ना उत्पादक जिला नरसिंहपुर माना जाता है जिसे राज्य का चीनी का कटोरा भी कहा जाता है। यहाँ राज्य के कुल गन्ने का लगभग 65 फि सदी उत्पादन होता है। अन्य प्रमुख गन्ना उत्पादक जिलों में छिंदवाड़ा बैतूल, गुना, ग्वालियर, हरदा और बुरहानपुर शामिल हैं,जहाँ काली कपास की मिट्टी गन्ने की खेती के लिए अनुकूल है। इंदौर, धार, देवास,कन्नोद,खातेगांव आदि जिलों में भी गन्ने की फसल होती थी।
इसलिये विरोध में हैं किसान
-इंदौर के सांवेर विधानसभा क्षेत्र में स्थित है बरलाई शुगर मिल,यह मिल कई सालों से बंद पड़ी है।
-भूमि विवाद, मिल की जमीन पर प्रस्तावित टेक्सटाइल-रेडीमेड गारमेंट्स पार्क के खिलाफ सैकड़ों किसानों और शेयरधारकों ने आपत्ति जताई है और वे कानूनी लड़ाई व धरने पर हैं।
-सरकार ने इस जमीन पर मध्य प्रदेश औद्योगिक विकास निगमके माध्यम से,एक कपड़ा क्लस्टर स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है।
-इस मामले में किसानों का कहना है कि वे अपनी पुश्तैनी जमीन को उद्योग विभाग को हस्तांतरित किए जाने के फैसले के खिलाफ हैं और उन्हें उचित मुआवजा नहीं मिला है।
सरकार को सद्बुद्धि देने के लिए 11 को बापू सिंह मंडलोई की प्रतिमा पर जुटेंगे किसान
सहकारिता क्षेत्र के दिग्गज नेता बापू सिंह मंडलोई के प्रयासों से ही बरलाई शुगर फैक्ट्री की स्थापना हुई थी। किसान नेता हंसराज मंडलोई का कहना है कि अब जब सरकार कारखाने की जमीन औद्योगिक इकाइयों को देने का मन बना चुकी है तो सरकार के इस निर्णय के खिलाफ और शुगर फैक्ट्री वाली जमीन बचाने के लिए हम आगामी 11 मार्च बुधवार को मालवा क्षेत्र के किसान स्व.मंडलोई की प्रतिमा पर धरना.प्रदर्शन कर सरकार को सद्बुद्धि देने के लिये प्रार्थना करेंगे। किसान नेताओं ने कहा मालवा क्षेत्र के प्रभावित किसानों बड़ी संख्या में मंडलोई की प्रतिमा स्थल पर जुटेंग। इंदौर बुधनी रेलवे लाइन,इंदौर मनमाड़ रेलवे लाइन,आउटर रिंग रोड,पूर्वी एवं पश्चिमी के प्रभावित किसानों ने भी शक्कर फैक्ट्री के किसानों का समर्थन में बड़ी संख्या में शामिल होने का ऐलान किया है। पूरा किसान परिवार 11 मार्च को मंडलोई साहब की प्रतिमा के सामने ग्राम बेगम खेड़ी में होने वाले किसानों के धरना प्रदर्शन में साथ बैठेगा।

