झाबुआ जिले की हैंडपंप संधारण निविदा में सबसे अधिक दर वाली निविदा तो 11 दिन में ही स्वीकृत और सबसे कम दर वाली निविदा की स्वीकृति में लगा दिए 4 माह-इंदौर के अधीक्षण यंत्री का कारनामा-कार्यप्रणाली संदेहास्पद
झाबुआ जिले की हैंडपंप संधारण निविदा में सबसे अधिक दर वाली निविदा तो 11 दिन में ही स्वीकृत और सबसे कम दर वाली निविदा की स्वीकृति में लगा दिए 4 माह-इंदौर के अधीक्षण यंत्री का कारनामा-कार्यप्रणाली संदेहास्पद
झाबुआ/इंदौर। संजय जैन-सह संपादक। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग इंदौर के अधीक्षण यंत्री सुनील कुमार उदिया की निविदा स्वीकृति को लेकर कार्यप्रणाली तो साफ साफ संदेहास्पद नजर आ रही है। प्राप्त जानकारी अनुसार झाबुआ जिले के विभिन्न विकासखंड के अंतर्गत हैंडपंप संधारण कार्य को लेकर आमंत्रित की गई निविदा में सबसे अधिक दर वाली निविदा को सिर्फ 11 दिनों में ही स्वीकृत कर दी गयी और वहीं दूसरी ओर अन्य विकासखंडों निविदा कम दर होने के बावजूद भी उन्हें स्वीकृति 3-4 माह में दी गयी,जबकि होना उलट था। इस तरह से पीएचई इंदौर के अधीक्षण यंत्री सुनील कुमार उदिया की कार्यप्रणाली साफ तौर से संदेहास्पद तो है ही और यह गंभीर जांच का विषय भी है,ऐसा हमारा मानना है।
सबसे कम दर वाली निविद,11 दिन में ही स्वीकृत?
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग झाबुआ ने जिले के 6 ब्लॉक झाबुआ, रामा,मेघनगर,थांदला,पेटलावद,और राणापुर के लिए हैंडपंप के 3 वर्षीय संधारण कार्य हेतु आनलाइन निविदा आमंत्रित की थी। इस निविदा का आमंत्रण 21 जुलाई व 19 अगस्त को खोली गई थी। साथ ही संभवत: अधीक्षण यंत्री कार्यालय इंदौर इसे स्वीकृति हेतु भेजी गई थी। निविदा में झाबुआ ब्लॉक बीलो (below) रेट -39.41-,मेघनगर -37.79,थांदला -33.79, पेटलावद -37.60, राणापुर -38.10 और रामा में (below) रेट -19.99 के रेट स्वीकृति हेतु भेजे गए थे । गौरतलब है कि रामा ब्लॉक की निविदा को निरस्त कर पुन: निविदा आमंत्रित की गई थी,जिसमें कृष्णा कंस्ट्रक्शन एवं सप्लायर की निविदा (below) रेट -27.78 एल-1 पर आई और अधीक्षण यंत्री इंदौर ने इस निविदा को सिर्फ 11 दिनों में ही स्वीकृति दे दी। आपको यहाँ बता दे कि अन्य निविदा रामा विकासखण्ड से अधिक बीलो होने के बावजूद भी उन्हें 2-4 माह में स्वीकृत किया गया,लेकिन ऐसा क्यों, यह जिम्मेदार ही बेहतर जानते है?
कार्यप्रणाली संदेहास्पद
रामा ब्लॉक की हैंडपंप संधारण की निविदा का द्वितीय आमंत्रण 6 अक्टूबर को पूर्ण हुआ था और अधीक्षण यंत्री इंदौर ने सिर्फ 11 दिनों में इस निविदा को सबसे पहले स्वीकृत कर दिया। जबकि अन्य ब्लॉक की निविदा जिसमें इससे भी अधिक दर पर स्वीकृति हेतु कार्यालय आई थी,लेकिन शायद लेनदेन की कार्यप्रणाली के अभाव में स्वीकृति नहीं दी गई । यानी बीलो (below) रेट -39.41, -37.79,-37.60,-33.79,-38.10 स्वीकृति हेतु इंदौर कार्यालय पर थी और इस प्रक्रिया में 6 ब्लाकों में से सबसे पहले तो सबसे अधिक दर वाली झाबुआ व राणापुर ब्लॉक की निविदा बीलो (below) रेट -39.41 व -38.10 स्वीकृति होना था लेकिन उसे करीब 3-4 माह बाद स्वीकृत किया गया । वही रामा ब्लॉक के अलावा अन्य सभी ब्लॉक की निविदा को प्रथम दृष्टिया स्वीकृत किया जाना था। लेकिन इंदौर अधीक्षण यंत्री कार्यालय द्वारा रामा ब्लॉक की निविदा को बीलो (below) रेट -27.78को सबसे पहले स्वीकृत किया ,जबकि अन्य ब्लाकों की दर तुलना में सबसे अधिक थीं। इस पूरी कार्यप्रणाली में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधीक्षण यंत्री इंदौर सुनील कुमार उधिया की कार्यप्रणाली संदेहास्पद है और ऐसा प्रतीत होता है कि कही अधिकारी द्वारा निविदाओं को आर्थिक लेनदेन कर स्वीकृत बीलो नही कर दिया गया है? क्या जो फर्म या ठेकेदार इस तरह की कार्यप्रणाली का हिस्सा नहीं बनते हैं,तो क्या उनकी निविदा को स्वीकृत नहीं किया जाता है?
की जाय जांच,बारीकी से
फ़ोटो नुसार विश्लेषण से यह स्पष्ट भी होता है कि कही पीएचई विभाग के अधीक्षण यंत्री सुनील कुमार उदिया ने सबसे अधिक दर वाली रामा विकासखण्ड की निविदा को आर्थिक लेनदेन कर ,सिर्फ 11 दिन में ही स्वीकृत तो नही कर दिया....? इस निविदा प्रणाली से यह स्पष्ट भी हो रहा है कि सबसे कम दर वाली निविदा को 3-4 माह में स्वीकृत किया गया है। इस बात से यह साफ प्रतीत होता है कि जब तक निविदा स्वीकृत हेतु शायद राशि अलग से अदा नहीं की जाती है तब तक निविदा को स्वीकृत नहीं किया जाता है और शायद इसके चलते ही उसे होल्ड पर तो नही रख दिया जाता है? या कहीं अलग से राशि अदा नहीं करने पर निविदा को निरस्त कर पुन: आमंत्रित तो नही कर ली जाती है । प्रशासन को चाहिए कि उनकी संपूर्ण कार्यप्रणाली की जांच बारीकी से की जाय।
तथ्यहीन व भ्रामक खबरे
मेरे बारे में तथ्यहीन खबरे प्रकाशित कराकर मुझे भेजी जा रही है। इसमे साफ बात है कि किसकी निविदा स्वीकृत नही होती है,तो द्वेषतावेष ऐसा होता ही है,यह आम बात है। अभी हाल में झाबुआ जिले रामा विकासखंड में एकल ही निविदा आयी थी एवं उसमें दरें भी अधिक प्राप्त हुई थी,इसलिए निविदा निरस्त करना पड़ी थी। इसलिए उसे निरस्त कर नयी निविदा आमंत्रित की गई थी। यह तो सहज प्रक्रिया ही है,इसमे किसी को भी कोई आपत्ति नही होनी चाहिये। रही बात 3-4 माह में निविदा स्वीकृत करने कि जो निविदा स्वीकृति हेतु भेजी गई थी,उसमें पूरे डॉक्यूमेंट्स नहीं होने के कारण ईई झाबुआ को पत्र लिखकर डॉक्यूमेंट्स मांगे थे। जवाब मिलने के बाद ही निविदाएं स्वीकृत की जा सकी। यदि मुझे कोई अब ऐसी तथ्यहीन व भ्रामक खबरे भेजेंगा,तो उसको तुरंत नोटिस भी जारी करूंगा।
सुनील कुमार उदिया-अधीक्षण यंत्री पीएचई,इंदौर
कॉल रिसीव ही नहीं किये
इस मामले के बारे में हमने पीएचई ईई झाबुआ जितेंद्र मावी से उनके मोबाइल पर 94240- 08706 सतत संपर्क करना चाहा,तो उन्होंने हमारे कॉल रिसीव ही नहीं किये।
जितेंद्र मावी- अधीक्षण यंत्री पीएचई,झाबुआ

