श्री धर्मदास गण परिषद की तृतीय कार्यकारिणी सभा में संघ प्रमुखों ने दिए अनमोल सुझाव

थांदला।कमलेश जैन। अहिंसा तप संयम प्रधान जैन धर्म की नीव पुरुषार्थ वान धर्म संघों, सहायक संस्थाओं व उसके कुशल नेतृत्व करने वालें गण से होती है। यह तभी सम्भव होता है,जब गण के नायक स्वयं क्रिया पालक हो व उसके पदाधिकारी उनका अनुसरण करने वालें हो। कुछ ऐसी ही भावना को लेकर पूज्य श्री उमेशमुनिजी के आशीष से पूज्य श्री धर्मदास गण की स्थापना हुई थी। जिसके सानिध्य में रहकर संघ समाज में साधना आराधना की एकरूपता के अनेक प्रयास होते रहे है व हो भी रहे है। गुरुदेव के इन्ही अनन्य उपकारों को लेकर अणु जन्म शताब्दी महोत्सव के अंतर्गत अष्ट वर्षीय आराधना का पूरे देश में  एक जैसा स्वरूप बने संघ में अपने गुरु भगवन्तों के उपकारों का स्मरण होकर उनके प्रति निष्ठा जागृत हो ऐसी दीर्घ भावना को लेकर श्री धर्मदास गण परिषद की तृतीय कार्यकारिणी सभा का गत दिनों आयोजन रत्नपुरी रतलाम में किया गया।                          

सम्मानित करने की घोषणा की    

नवकार महामंत्र के मंगलाचरण से प्रारम्भ हुई सभा में राष्ट्रीय अध्यक्ष भरत भंसाली ने वर्तमान धर्मदास गण नायक प्रवर्तक देव श्री जिनेन्द्रमुनिजी के सानिध्य में इस वर्ष होने वाली आराधना के स्वरूप पर अपने भाव व्यक्त करते हुए 500 समायिक करने वालें विशिष्ट आराधकों, प्रत्येक सदस्य द्वारा 200 सामायिक करने वालें विशिष्ट परिवारों, पक्खी मण्डल के माध्यम से नियमित माह में 2 उपवास करने वालें तपस्वियों तथा इस वर्ष वर्षितप की सामूहिक आराधना करने वालें तपस्वियों को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए पूर्णता पर उन्हें सम्मानित करने की घोषणा की। भंसाली ने गण की नीव गण के प्रत्येक सदस्य को मानते हुए उन्हें सदस्यता अभियान में तेजी लाने व संघ के 50 वर्ष से ऊपर के सभी सदस्यों का मात्र 200 रुपये की अल्प राशि में गण का आजीवन सदस्य बनने पर जोर दिया।          

2-2 लाख रुपये देने की आर्थिक अनुदान राशि की  घोषणा        

इस अवसर कर गण की सहयोगी संस्थाओं में शामिल अखिल भारतीय चंदना श्राविका मण्डल, पूज्य श्री धर्मदास जैन युवा संघटन, पूज्य श्री मधवाचार्य परीक्षा मण्डल व पूज्य श्री धर्मदास स्थानकवासी जैन स्वाध्यायी संघ आदि को उनके धार्मिक कार्यों के लिए 2 - 2 लाख रुपये तक की आर्थिक अनुदान राशि देने की घोषणा की।  

50 से ज्यादा संघों के प्रतिनिधि उपस्थित थे                             

इस अवसर पर करीब 50 से ज्यादा संघों के प्रतिनिधि उपस्थित थे जिनमें से लिमड़ी संघ के महेंद्र कर्णावट ने अपने यहाँ सामूहिक वर्षितप में 115 नाम, थांदला संघ में 100 से अधिक नाम, कुशलगढ़ संघ में 60 नाम, बदनावर, रतलाम, मेघनगर, बामनिया, पेटलावद, झाबुआ, अंकलेश्वर आदि अन्य स्थानों पर भी वर्षीतप आराधना में जुड़ने वालें तपस्वियों की जानकारी दी। 

गुरुदेव सशर्त आराधना करने पर दे रहे जोर - आपका ताल है अगला वर्षावास

प्रवर्तक श्री जिनेन्द्रमुनिजी म.सा. ने स्पष्ट शब्दों में गण व संघ को निर्देशित करते हुए कहा कि धर्म के नाम पर किया गया पाप भी पाप ही होता है ऐसे में वह संत-सतियों की निर्मल आराधना में सहयोगी बनने के साथ अपने स्वयं की निर्मल आराधना भी कर सकता है अतः प्रत्येक संघ पाप को पाप से बचने की प्रेरणा देते हुए बड़े आयोजन में द्रव्य की मर्यादा, सचित व हरि का त्याग, अचित का विवेक व बड़े आयोजन में जाने वालें श्रावक-श्राविकाओं के लिए तीन सामायिक का लक्ष्य रखने का पत्र गण के नाम लिखा जो उनके आगामी होली चातुर्मास की घोषणा में विलंब को लेकर विसंगतियों के संदर्भ में कही गई बात भी मानी जा रही है,जो आगामी 6 मार्च को महिदपुर सिटी में होना है। जिसमें गण के अधीन समस्त संत सतियों के द्रव्य क्षेत्र काल भाव के समस्त आगारों के साथ वर्षावास की घोषणा की जाएगी। जिसे लेकर युवा संघठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग नाहर ने विस्तृत रूप से गण के समक्ष रखा जिसे सबने सहर्ष स्वीकार करते हुए कुछ मानक तय कर समर्थन भी किया। ताल संघ अध्यक्ष कमल पितलिया ने प्रवर्तक श्री के आगामी वर्षावास में समस्त आयोजन ताल में करवाने की बात रखते हुए सभी को चातुर्मास काल में ताल पधारने का न्यौता दिया। सभा को झाबुआ संघ के प्रदीप रुनवाल, करही संघ अध्यक्ष शिखरचंद छाजेड़, महिदपुर सिटी के राजकुमार सकलेचा,
स्वाध्यायी वीरेंद्र मेहता,  चन्दना श्राविका मण्डल से प्रेमलता मेहता ने भी अपने अनमोल सुझावों से सुशोभित किया। सभा का संचालन गण के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुनील चौधरी ने किया वही राष्ट्रीय संगठन मंत्री विनोद धोका ने सबके सकारात्मक सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया गया। उक्त जानकारी गण के राष्ट्रीय महामंत्री शैलेष पीपाड़ा व राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी पवन नाहर ने दी।