इंदौर एलिवेटेड ब्रिज पर विशेष, सीएम के निर्देश पर काम तो पहले ही शुरू हो गया था,जबकि कमिश्नर ने चार दिन पहले बैठक कर के फायनल किया था

बैठक में 6.5 किमी वाले ब्रिज के को मंजूरी ने इंदौर उत्थान अभियान का पॉवर प्रेजेंटेशन ने सरकार की राह आसान तो नही कर दी?

झाबुआ/इंदौर। संजय जैन-सह संपादक। अंतत साढ़े छह किमी वाले एलिवेटेड ब्रिज के प्रस्ताव को मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की अध्यक्षता में हुई बैठक में मंजूरी मिल गई। इस एक ब्रिज की अपेक्षा 7 ब्रिज बनाने के सुझाव को रद्द कर दिया गया है। एलिवेटेड ब्रिज के लिये निर्णायक बैठक भले ही बाद में हुई हो,लेकिन कमिश्नर डॉ.सुदाम खाड़े ने तो चार दिन पहले संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक में योजना के प्रारूप को अंतिम रूप भी दे दिया था। कमिश्नर इस योजना के साथ इंदौर के विकास संबंधी अन्य मुद्दों पर चर्चा के लिए भोपाल भी पहुंच गए थे।

प्रदेश का पहला एलिवेटेड ब्रिज जबलपुर में

इंदौर उत्थान अभियान अध्ययन दल के सदस्य एलिवेटेड ब्रिज के लिए वर्षों से प्रयासरत थे। लोक निर्माण विभाग मंत्री राकेश सिंह के प्रयासों से उनके गृहनगर जबलपुर में प्रदेश का पहला एलिवेटेड ब्रिज बीते साल शुरु होने के बाद से इंदौर में भी यह मांग और तेज हो गई थी। कमिश्नर डॉ.सुदाम खाड़े ने चार दिन पहले इंदौर उत्थान अभियान अध्ययन दल के अजित सिंह नारंग,अनिल भंडारी सहित अन्य सदस्यों को आमंत्रित किया था और प्रस्ताविज ब्रिज वाला पॉवर प्रजेंटेशन देखने के साथ ही विस्तार से चर्चा भी की थी। इसी बैठक में एबी रोड पर नवलखा से लेकर एलआयजी तक 6.5 किमी वाले एलिवेटेड ब्रिज को उचित मानते हुए शासन से 350 करोड़ की योजना पर अंतिम मुहर लगाने संबंधी प्रस्ताव को फायनल भी किया था।

कमिश्नर को बैठक में दिए थे सुझाव

अगले 25 साल के ट्रैफिक की बेहतरी के लिए एलिवेटेड फ्लाईओवर विद रोटरी ही बेहतर संभागायुक्त डॉ.सुदाम खाड़े को एबी रोड पर नवलखा से लेकर एलआयजी  तक सात पृथक फ्लाई ओवर बनाए जाएं अथवा सिंगल एलिवेटेड फ्लाईओवर विद रोटरीज का प्रावधान हो,संबंधी किए गए तुलनात्मकतकनीकी अध्ययन की रिपोर्ट प्रस्तुत की गई थी एवं तत्पश्चात प्रत्येक मुद्दे पर विस्तृत चर्चा भी हुई थी। अभियान के अध्यक्ष अजीत सिंह नारंग ने कमिश्नर को बताया था कि देश के महानगरों में दूर दूर फैले स्थानों पर जल्द से जल्द कैसे पंहुचा जा सकता है ? इस सिद्धांत पर पावर प्रेजेंटेशन तैयार किया गया और आसपास के शहरों को शामिल किए जाने के बाद से,इंदौर चूंकि मेट्रोपोलिटन सिटी हो जाएगा,तब एक से दूसरे स्थान पर जाने में लगने वाले समय को इस ब्रिज के माध्यम से कम किया जा सकेगा।  तेजी से बढ़ते शहरी परिवेश में एकलएलिवेटेड कॉरिडोर विद रोटरीज भविष्य के लिए तैयार,ऐसा समग्र तेज गतिशीलता वाला समाधान प्रदान करते हैं जिस कारण शहर के दूरस्थ स्थानों पर भी मात्र 10 से 15 मिनट में पहुंचा जा सकता है।

खर्च भी व्यर्थ चला जाएगा

तुलनात्मक अध्ययन को प्रस्तुत करते हुए अभियान के अध्यक्ष इंजीनियर अजीत सिंह नारंग ने कहा था कि अध्ययन दल द्वारा इंदौर विकास प्राधिकरण द्वारा नियुक्त कंसल्टेट द्वारा किए गए यातायात सर्वे के आंकड़ों के आधार पर अध्ययन में यह पाया गया है कि प्रत्येक फ्लाई ओवर पर 10 प्रतिशत प्रतिवर्ष वाहनों में वृद्धि होने से,अगले मात्र 7 वर्षों में ही लगभग सभी फ्लाई ओवर की किसी न किसी भुजा में उनकी क्षमता से अधिक यातायात हो जाएगा और ये अनुपयोगी हो ही जाएंगे तथा किया गया खर्च भी व्यर्थ चला जाएगा।

हो जाएंगे नए दुर्घटना स्थल निर्मित

आपको बता दे कि वर्तमान में प्रस्तावित पृथक-पृथक फ्लाई ओवर में,प्रदान किया जा रहा,ग्रेडिएंट आईआरसी कोड के मापदंडों का उल्लंघन करने वाला तो है जो कि उचित नहीं है और इस उल्लंघन के पश्चात भी जो दो फ्लाई ओवर की एप्रोचेस के बीच दूरी बचती है,वह इतनी कम बचेगी कि फ्लाई ओवर पर सीधे उतरने-चढ़ने वाले यातायात के साथ ही दाएं बाएं मुड़ने वाला यातायात के लिए,जो कि आसपास स्थित व्यवसायिक अथवा रहवासी कॉलोनियों में जो आना-जाना करना चाहते हैं,उनके लिए यह सारा यातायात इतना अधिक हो जाएगा कि कम दूरी होने के कारण नए दुर्घटना स्थल निर्मित हो जाएंगे।

चिंतनीय बात

यह बात चिंतनीय तो है कि इतना अधिक बड़ा खर्च होने के पश्चात भी अधिकतम, 6 लेन जिसकी अधिकतम क्षमता 15000 पीसीयू होगी,उपलब्ध  ही रहेगी जबकि इसी खर्च में में सिंगल एलिवेटेड फ्लाई ओवर बनाए जाने पर नीचे 6 और ऊपर 4 अर्थात कुल 10 लेन उपलब्ध हो जाएगे,जिनकी यातायात क्षमता तेज गति होने कारण 31250 पीसीयू अर्थात दुगनी से भी अधिक हो जाएगी और अगले 25 से 30 वर्षों तक,शायद यातायात बेहद ही सुगमता से आना जाना करता रहेगा।

बनाया जाना चाहिए,सिग्नल फ्री 

इंजीनियर एसएस कुटुंबले ने कहा था कि शहर के प्रमुख चौराहों जिन पर यातायात बहुत अधिक है उन्हें सिग्नल फ्री बनाया जाना चाहिए वर्तमान में देश के अनेक नगरों में इन एलिवेटेड फ्लाईओवर के साथ ही रोटरी के प्रावधान किए जा रहे हैं और इन्हें बनाए जाने वाले स्थान भी उपलब्ध हैं।

तो इंदौर में क्यों नहीं?

इंजीनियर वीके गुप्ता ने कहा था कि इन बनाए जाने वाले एलिवेटेड फ्लाईओवर के ऊपर एक और एलिवेटेड रोड फ्लाई ओवर अथवा मेट्रो कॉरिडोर के प्रावधान भी किए जा सकते हैं,जैसा कि नागपुर में थ्री लेयर और पुणे में तो अब फोर लेयर एलिवेटेड फ्लाईओवर बनाया जा रहा है,तो इंदौर में क्यों नहीं ?

हो जाएंगे,ऊंट की सवारी दिखने जैसे दृश्य निर्मित

इंजीनियर दिलीप शर्मा ने कहा था कि थोड़ी-थोड़ी दूरी पर निर्मित होने वाले फ्लाई ओवर खंडित संरचनाएं निर्मित करेंगे,जिससे शहर के सौंदर्य और आकर्षण में कमी आएगी और ऊंट की सवारी दिखने जैसे दृश्य निर्मित हो जाएंगे। साथ ही 6 किमी लंबाई में थोड़ी-थोड़ी दूरी पर फ्लाई ओवर बनाए जाने पर तो 14 रिटेनिंग वॉल भी बनाना पड़ेगी। इन 14 रिटेनिंग वॉल निर्माण करने के दौरान अनेक कठिनाई भरी परिस्थितियां निर्मित भी होगी,जो कि पर्यावरण और स्वास्थ की दृष्टि से उचित नहीं रहेगी।

एक मात्र विकल्प, सिंगल एलिवेटेड फ्लाईओवर विथ रोटरीज ही

एसजीएसआईटीएस  प्रमुख रही डॉ.वंदना तारे का कहना था कि पृथक फ्लाई ओवर बनाए जाना कतई उचित नहीं है और अगर बनाए भी जाते हैं तो इनकी उपयोगिता अल्प समय के लिए यातायात को सुगम बनाने मे केवल आंशिक योगदान ही देगी  और तेज़ी से बढ़ते यातायात की दृष्टि से इंदौर के नागरिकों को राहत पहुंचाने का एक मात्र विकल्प सिंगल एलिवेटेडफ्लाई ओवर विथ रोटरीज ही है।

अपने सुझाव रखे

बैठक में इंदौर उत्थान अभियान की बैठक में पूर्व महापौर डॉ.उमाशशि शर्मा,महेश गुप्ता, एएसआई एस पाल,इंजी. हरीश मैनारिया, इंजी. गिरीश गुप्ता,अशोक कोठारी,डॉ.शंकरलाल गर्ग,डॉ.दिलीप वाघेला इत्यादि ने भी अपने सुझाव रखे थे।