प्रदेश सरकार के माफी-वीरो! पर अलग हट कर,संघर्ष से सिद्धि की विशेष पेशकश संजय जैन-सह संपादक की कलम से
प्रदेश सरकार के माफी-वीरो ! पर अलग हट कर,संघर्ष से सिद्धि की विशेष पेशकश संजय जैन-सह संपादक की कलम से, सरकार के माफी- वीर !-मुदगर घुमाने वाले मंत्री-सोते मिले-जागते रहो-शुगर पेशेंट विधायक को सलाह-सरकार को है,सबके भले की चिंता-बदलाव,चेहरा दिखाओ और राशन पाओ, सरकार के माफी-वीर !विजय शाह
झाबुआ/इंदौर। संजय जैन-सह संपादक। ऐसा साफ प्रतीत होता है कि केंद्र की अग्निवीर योजना की तरह इन दिनों प्रदेश में माफी वीर मंत्रियों का सिलसिला चल रहा है। भागीरथपुरा दूषित पानी कांड में घिरे मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का एक पत्रकार से संवाद वाला,ऐतिहासिक मामले पर माफी मांगने का प्रसंग तो अब पुराना हो गया है। ताजा मामला तो फिर से मंत्री विजय शाह का है। उल्लेखनीय है कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई की तारीख से पहले ही कर्नल सोफिया मामले में चौथी बार माफी मांग ली है। बोलने में कहीं दोबारा से गड़बड़ी ना हो जाए,इसलिये शायद उन्होंने लिखित माफीनामा पढ़ा। अब देखना है माफी चतुर्थी का सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई पर कितना असर होता है ?
करण सिंह वर्मा
जैसा कि सभी जानते ही है कि राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने सीहोर में कार्यक्रम के मंच से लाडली बहना योजना के लाभार्थियों को सार्वजनिक कार्यक्रमों में शामिल नही होने पर लिस्ट से हटाने की धमकी तक दे दी थी। उनके बयान से सरकार की किरकिरी होने लगी थी तो उन्होंने तत्काल माफी मांग ली थी। बावजूद इसके एक अन्य कार्यक्रम में भी मंत्री ने कई तहसीलदारों को निलंबित करने के साथ ही उन्हें बेईमान अधिकारी और गद्दार तक करार दिया है।
ओमप्रकाश धुर्वे
हाल ही में डिंडोरी जिले में शहपुरा के भाजपा विधायक ओमप्रकाश धुर्वे भूमिपूजन कार्यक्रम में पहुंचे थे। ग्रामीणों ने उनसे अधूरे पड़े स्कूल भवन को लेकर शिकायत भी की थी। ग्रामीणों की बात सुनते ही विधायक ओमप्रकाश धुर्वे भावनाओं में बह गए और उनके मुंह से आपत्तिजनक शब्द निकल गया। उन्होंने कहा कि वे गांवों में विकास कार्यों के लिए लगातार मेहनत करते हैं और योजनाएं भी लेकर आते हैं,लेकिन कुछ लोग मक्कारी कर रहे हैं। बाद में उन्हें यकायक अहसास हुआ तो उन्होंने तत्काल माफी भी मांग ली है।
और ये,सिंधिया के वीर
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने राजनीति में पिता माधवराव के समर्थक रहे,भाजपा विधायक प्रभुराम चौधरी को एक कार्यक्रम में भगवान तुल्य बताया था। यही नहीं कांग्रेस छोड़ कर उनके साथ भाजपा में आए छह केबिनेट मंत्री और 19 विधायकों की तारीफ करते हुए बोले कि सभी ने एक सेकंड भी नहीं लगाया और साथ ही अपने अपने मंत्री पद व विधायकी का त्याग भी कर दिया था,इसलिए मैं ऐसे वीरों को तो सलाम करता हूं।
मुदगर घुमाने वाले मंत्री
मयूरासन कर के मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने बाबा रामदेव को तो चकित कर दिया था। आपको बता दे कि उनके मंत्री गोविंद सिंह राजपूत और प्रदेश भाजपा प्रभारी डॉ.महेंद्र सिंह भी अखाड़ों के तरतब दिखाने में किसी से भी कम नहीं हैं। ये दोनों नेता सागर पहुंचे थे,जहां एक अखाड़े में उन्होंने पहलवानी का दम दिखाने के साथ साथ भारी भरकम मुदगर भी घुमाए थे।
सोते मिले-जागते रहो
सिरोंज के भाजपा विधायक उमाकांत शर्मा आधी रात में अपने क्षेत्र के आनंदपुर थाने पहुंच गए। ठंड का असर ऐसा था कि पूरा थाना ही गहरी नींद में सोया हुआ था। उन्होंने सभी कमरों में थाना स्टाफ को खर्राटे भरते देखा। एक सिपाही को उठाया,उसे पूछा और बताया कि मैं विधायक हूं,जल्दी से थानेदार को बुलाओ। सब को फटकार लगाई और इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर भी साझा किया।
शुगर पेशेंट विधायक को सलाह
अशोकनगर दौरे पर पहुंचे ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने समर्थक विधायकों के लिए तो डॉक्टर बन गए। शुगर पेशेंट चंदेरी विधायक जगन्नाथ सिंह रघुवंशी को मिठाई खाते देखा,तो इससे उन्हें परहेज करने की सलाह दे डाली,लेकिन विधायक कितना पालन करेंगे....? यह उन्हें भी पता है। उन्होंने तो पूर्व विधायक जजपाल सिंह जज्जी को भी अधिक तेल से बनी खाद्य सामग्री से परहेज की सलाह दे डाली।
सरकार को है,सबके भले की चिंता
मप्र सरकार की हिम्मत की सराहना तो बनती ही है। हर दो चार महीने में कर्ज लेकर सरकारी योजनाओं की सफलता के झंडे गाड़ना बाकी राज्यों को तो सिर्फ और सिर्फ मप्र से ही सीखना भी चाहिए। इस महीने सरकार एक बार फिर से 5 हजार 200 करोड़ का कर्ज लेने जा रही है । इससे एक वित्तीय वर्ष में ही कर्ज का आंकड़ा अब 62 हजार 300 करोड़ तक पहुंच चुका है। एक बात तो है सरकार के इस साहसिक निर्णय से किसान और लाड़ली बहनें तो बेहद खुश हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि इन सब की दुआओं का ही तो प्रभाव है कि सरकार की सर्वत्र जय-जयकार भी हो रही है।
चेहरा दिखाओ और राशन पाओ
उपभोक्ता भंडारों पर चलने वाले फर्जीवाड़े पर अंकुश का ही परिणाम है कि अब कंट्रोल दुकान आबंटित कराने में नेताओं की दिलचस्पी कम होती जा रही है। यही नहीं कंट्रोल चलाने वाले भी इससे मुक्ति की राह तलाशते साफ नजर भी आ रहे हैं। अब प्रदेश के साढ़े पांच करोड़ लोगों के लिए सरकार भी सार्वजनिक वितरण प्रणाली में बदलाव करने जा रही है। अब दुकान पर अनाज का ट्रक उतरते ही,हर परिवार के मोबाइल पर एक एसएमएस आएगा और दुकान पर चेहरा दिखाते ही उसे उसका पूरा राशन तुरन्त मिल जाएगा।

