कांग्रेस प्रदेश महासचिव अपनों के हाथों जलील हुए,आंसू निकल पड़े नाम हो कांग्रेस का,काम करे भाजपा जिद करने का साहस नहीं दिखा पाए सज्जन सिंह वर्मा बस हौंसले पहाड़ों से
कांग्रेस प्रदेश महासचिव अपनों के हाथों जलील हुए,आंसू निकल पड़े, नाम हो कांग्रेस का,काम करे भाजपा, जिद करने का साहस नहीं दिखा पाए सज्जन सिंह वर्मा, बस हौंसले पहाड़ों से
कांग्रेस की राजनैतिक हल-चल पर अलग हट कर,संघर्ष से सिद्धि की विशेष पेशकश, संजय जैन-सह संपादक की कलम से, भाजपा के माफ़ी-वीरो पर..कल पढ़िए विशेष खबर
कांग्रेस प्रदेश महासचिव अपनों के हाथों जलील हुए,आंसू निकल पड़े
झाबुआ/इंदौर। संजय जैन-सह संपादक। जब रीवा में कांग्रेस के प्रदेश महासचिव मनीष गुप्ता को लोगों ने बच्चों की तरह बिलखते हुए देखा तो आश्चर्य करने लगे। वजह थी भी ऐसी कि मनीष हर साल की तरह इस बार भी महाशिवरात्रि पर शिव बारात का आयोजन कर रहे हैं। इसके शहरभर में इसके बैनर-पोस्टर लगाए थे,किंतु नगर निगम ने यह कहकर हटवा दिया कि इसकी अनुमति नहीं ली गई हैं। मजेदार बात तो यह है कि भाजपा नेताओं की शह पर यदि यह कार्रवाई हुई होती तो समझ में भी आता,लेकिन रीवा नगर निगम में तो कांग्रेस की ही नगर सरकार है। इसके बाद महापौर ने तो माफी मांग ली,लेकिन तब तक तो यह मामला कांग्रेस की पूरी तरह किरकिरी करा चुका था।
जिद करने का साहस नहीं दिखा पाए सज्जन वर्मा
पहले पंद्रह महीने की कमलनाथ सरकार ने निर्णय तो ले लिया था,लेकिन जनहित के निर्णयों में अनावश्यक देरी का ही नतीजा रहा कि एलिवेटेड कॉरिडोर का काम घोषणा से आगे बढ़ ही नहीं पाया था। पूर्व मंत्री सज्जन वर्मा इस मामले में समय-समय पर बयानों की गेंदबाजी करते रहते हैं,लेकिन उनकी बॉलिंग को नो-बॉल में बदलने का हुनर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय तो अच्छी तरह से जानते ही हैं। डॉ.मोहन यादव सरकार अब इंदौर को 300 करोड़ वाले एलिवेटेड कॉरिडोर की जो सौगात देने वाली है,इसका काम यदि कमलनाथ सरकार के वक्त शुरु हो जाता तो 180 करोड़ में तैयार होने के साथ-साथ अब तक तो ट्रैफिक के भारी दबाव से भी राहत मिल गई होती। तब यह एलिवेटेड कॉरिडोर बन जाता तो इस ढाई साल की अवधि में जो फ्लाईओवर बने हैं,उनकी जरूरत भी नहीं रहती और न ही इनके निर्माण पर इतना अधिक खर्च भी होता। पहले कमलनाथ सरकार के खाते में जाने वाला श्रेय जाहिर है,अब यादव सरकार को ही मिलेगा। आपको बता दे कि कमलनाथ सरकार के वक्त इंदौर और उज्जैन में रोप-वे की भी घोषणा हुई थी, तब के लोक निर्माण मंत्री सज्जन वर्मा इस मामले में भी घोषणा वीर ही साबित हुए। कहने को तो वे कमलनाथ के विश्वस्त कहे जाते हैं,लेकिन जरा जिद्दी भी होते तो रोप-वे का काम शुरु जरूर करवा देते।
बस हौंसले पहाड़ों से
महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष अलका लांबा की बाते सुनकर तो ऐसा लगता है कि संगठन को सही-साट लीडर मिला है,लेकिन जमीनी हकीकत देखने पर पता चलता है कि इस राष्ट्रीय संगठन की सदस्य संख्या तो मात्र 6 लाख ही है। खुद लांबा भी यह मानती हैं कि महिलाओं की संख्या बढ़ाने का अभियान चलाना होगा, लेकिन उन्हें तो भाजपा महिला मोर्चा से समझना होगा कि सदस्य संख्या कैसे बढ़ाते हैं ? राष्ट्रीय स्तर पर ये हाल है तो मप्र महिला कांग्रेस के संबंध में चिंतन करना तो काफी बेमानी है,ऐसा हमारा मानना है।
नाम हो कांग्रेस का,काम करे भाजपा..
पिछले दिनों पिछोर क्षेत्र-शिवपुरी में आयोजित एक कार्यक्रम में महिला हितग्राही ने शासन की योजना का लाभ तो लिया,लेकिन उसका श्रेय कांग्रेस को दे दिया था। मंच पर अतिथि भाजपा विधायक प्रीतम लोधी भी हैरान रह गए थे। आपको बता दे कि महिला के पास खड़े एक व्यक्ति ने जब उसे समझाया कि लाभ भाजपा की वजह से मिलने की बात वह कहे। मजेदार बात तो यह है कि उसे समझाने के बाद भी,महिला ने भाजपा की जगह भादवा पार्टी कह दिया। उसकी इस अज्ञानता या मासूमियत ही कहे,पर हैरान विधायक प्रीतम लोधी भी बाकी लोगों के साथ हंस पड़े थे।
(कल पढ़िए विशेष खबर)....भाजपा के माफ़ी-वीरो पर...

