मुहावरे का प्रयोग, ??अलग हट कर-प्रदेश की राजनीतिक और प्रशासनिक नोक-झोक पर,संघर्ष से सिद्धि की विशेष पेशकश, संजय जैन-सह संपादक की कलम से, एलिवेटेड कॉरिडोर और हाथी के दांत, वहां पिता रहे,यहां बेटा अध्यक्ष
मुहावरे का प्रयोग, ??अलग हट कर-प्रदेश की राजनीतिक और प्रशासनिक नोक-झोक पर,संघर्ष से सिद्धि की विशेष पेशकश, संजय जैन-सह संपादक की कलम से
एलिवेटेड कॉरिडोर और हाथी के दांत, वहां पिता रहे,यहां बेटा अध्यक्ष
एलिवेटेड कॉरिडोर और हाथी के दांत
झाबुआ/इंदौर। संजय जैन-सह संपादक। सेवा सुरभि ने इंदौर की ट्रैफिक समस्या को लेकर बैंगलुरु से ट्रैफिक विशेषज्ञ आशीष वर्मा का व्याख्यान रखा था। सांसद,महापौर सुनते रहे कि इंदौर में मेट्रो, एलिवेटेड ब्रिज जरूरी नहीं है। चार दिन बाद ही रेसीडेंसी में हुई बैठक में इन जनप्रतिनिधियों ने एलिवेटेड कॉरिडोर को जरूरी बताते हुए समर्थन दे दिया। जनप्रतिनिधियों के इस ढुलमुल रवैये के कारण ही वर्मा का व्याख्यान कराने वाले अतुल शेठ को न्यायालय की शरण लेना पड़ी। रेसीडेसी कोठी में मंत्री विजयवर्गीय की अध्यक्षता में एलिवेटेड कॉरिडोर को लेकर हुई पहली बैठक में तय तो यह हुआ था कि सबके सुझाव सुनने के बाद आठ दिन बाद दूसरी बैठक में निर्णय लेंगे,लेकिन दूसरी बैठक से पहले ही काम शुरु कर के प्रशासन ने यह संदेश दे दिया कि पहली बैठक तो बस औपचारिकता थी,प्रशासन सारी तैयारी तो पहले ही कर चुका था।
वहां पिता रहे,यहां बेटा अध्यक्ष
नगर निगम कर्मचारी महासंघ में लंबे समय कैलाश व्यास अध्यक्ष रहे। नगर निगम सहकारी संस्था का अध्यक्ष बन कर रमेश यादव नेता ने स्व.व्यास के तिलिस्म को तोड़ा था। डिप्टी सीएम स्व.सुभाष यादव के खास रहे यादव की पत्नी,बेटी का कोरोना में निधन हो गया। तब मनीष यादव हाईकोर्ट एडवोकेट के रूप में पहचान बना रहे थे। अब हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के चुनाव में मनीष यादव अपने चार निकटतम प्रतिद्वंदियों को हराकर अध्यक्ष बन गए हैं। पिता ने निगमकर्मियों की सहकारी संस्था की बागडोर संभाली थी तो बेटा अब वकीलों की बड़ी संस्था की जिम्मेदारी निभाएग। कमी तो उन्हें भी खलती होगी,कि इस सफलता पर पीठ थपथपाने वाले पिता का हाथ नहीं है।
मुहावरे का प्रयोग??-संघर्ष से सिद्धि की विशेष पेशकश
रूई के ढेर में सुई खोजना
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के चुनाव के लिए भरे गए नामांकन पत्र में मप्र से सीएम सहित 22 नेता दिल्ली पहुंचे थे। उस ग्रुप फोटो में बस केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को ढूंढना ही मुश्किल रहा।
अंगूर खट्टे हैं
सीएम डॉ.मोहन यादव हाल ही में अशोकनगर जिले के मढ़ी महिदपुर गांव पहुंचे थे। यहां गांव के खिलाड़ियों ने उन्हें रोककर स्टेडियम और खेल मैदान बनाने की मांग रखी थी। सीएम ने चंदेरी विधायक जगन्नाथ सिंह रघुवंशी से कहा कि खिलाड़ियों के लिए स्टेडियम बनवाया जाए। इसी दौरान बच्चों ने बताया कि वे पहले भी विधायक से यह मांग कर चुके हैं,लेकिन वे सुनते ही नहीं।
बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना
बाबा रामदेव ने एक बार फिर पंडित धीरेंद्र शास्त्री की शादी की बात छेड़ दी,वो भी उन्हीं के मंच से ही। बाबा ने उनसे कहा- आप आज बड़े क्यूट लग रहे हो। फिर हंसते हुए जोड़ा कि महाराज मुझे देखकर घबरा जाते हैं कि कहीं मैं इनकी शादी न करा दूं। योग गुरु यहीं नहीं रुके,उन्होंने आगे कहा-मैंने तो बिटिया भी देख रखी है।
बोलती बंद
अक्सर अपने बयानों की वजह से सुर्खियों और विवादों में रहने वाले मंत्री विजय शाह की आवाज उनकी ही सरकार ने बंद कर दी है। ऐसा इसलिए कहना पड़ रहा है क्योंकि जनसंपर्क विभाग की ओर से मीडिया को दिए जा रहे मंत्री शाह के वीडियो अब म्यूट करके जारी किए जा रहे हैं। शाह के कारण सरकार की हालत ऐसी हो गई है कि दूध का जला अब छाछ भी फूंक-फूंककर पी रहा है।
जय लक्ष्मी मैया
धरमपुरी-धार की पीपल्दागढ़ी पंचायत में गणतंत्र दिवस पर घनघोर लापरवाही सामने आई। यहां भारत माता की तस्वीर की जगह लक्ष्मी माता की तस्वीर रखकर पूजा-अर्चना कर दी गई। जब ग्रामीणों की इस पर नजर पड़ी तो वे गुस्सा हो गए और पंचायत कर्मचारियों को जमकर खरी-खोटी सुनाई।
गेहू के साथ घुन पीसा
अशोक नगर जिले का ये वही आनंदपुर धाम है जिसके कार्यक्रम में कभी प्रधानमंत्री मोदी आए थे। कहां तो एसआईआर में पूरे प्रदेश में बेस्ट परफार्मेंस के लिए कलेक्टर आदित्य सिंह को सम्मानित होना था,लेकिन इस धाम को लेकर मची धमाचौकड़ी उनको हटाए जाने का कारण बन गई।
न माया मिली ना राम
नगरीय निकायों का कार्यकाल समाप्ति की ओर है,एल्डरमैन की नियुक्ति के इंतजार में सारे दावेदार हताश हो चुके हैं। कई दावेदारों ने तो संगठन को साफ कह दिया है कि एक साल के लिये नियुक्त किए जाने का मतलब नहीं। अब ये दावेदार नगरीय निकाय चुनाव में मौका दिये जाने की हुंकार भरने वाले है।
पानी सिर से ऊपर
भागीरथपुरा दूषित पानी कांड के शहीदों ने प्रदेश के जल स्त्रोतों की जांच-पड़ताल के लिए सरकार और जनप्रतिनिधियों को सचेत तो कर ही दिया है। नर्मदा और बेतवा जैसी नदियों में हैजा फैलाने वाले और तवा में मलमूत्र वाले बैक्टीरिया मिलना चिंताजनक है। उज्जैन की क्षिप्रा नदी की जांच भी जरूरी है क्योंकि सिंहस्थ में थोड़ा समय ही बचा है।

