घोड़ा हिनहिनाया, सांसद घबराया,अब तक नाम बदलने की याद ही नहीं आई, चुप्पी के बाद की खुशी,तेरा तुझको अर्पण,नर्मदा जयंती और पानी का भय,अब याद आई टंकियों की सफाई की

प्रदेश की हलचल पर अलग हट कर,संघर्ष से सिद्धि की विशेष पेशकश......संजय जैन-सह संपादक की कलम से पर

अब तक नाम बदलने की याद ही नहीं आई

झाबुआ/इंदौर। संजय जैन-सह संपादक। नाम बदलने में उदारता दिखाने वाली सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री यदि राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विवि के नाम से राजीव गांधी का नाम हटा कर सरकार के सपनों में आने वाले किसी महापुरुष के नाम से विवि का नाम रख दें तो हो सकता है,इस विवि में वर्षों से चल रही आर्थिक अनियमितता और अंदरुनी गुटबाजी पर नकेल लग जाए या फिर मुर्दाबाद करने वाले आंदोलनकारी जिंदाबाद करने लग जाएं। सरकार ने इस विवि के  कुलसचिव मोहन सेन को अभी हाल ही में हटा भी दिया है। आपको बता दे कि सेन से पहले कुलसचिव आरएस राजपूत थे वो गड़बड़ी के आरोपों में घिरे तो उन्हें हटा कर मोहन सेन को कुलसचिव बनाया गया था। अब सेन की जगह आयुक्त तकनीकी शिक्षा अवधेश शर्मा को प्रभार सौंपा गया है। गौरतलब है कि इससे पहले आरजीवीपी में करोड़ों की अनियमितता का उजागर होने के बाद कुलगुरु प्रो.सुनील कुमार को हटा कर राजीव त्रिपाठी को कुलगुरु बनाया गया था लेकिन एबीवीपी के आरोप नेक ग्रेड में फर्जीवाड़े में उन्होंने अचानक इस्तीफा दे दिया था।

घोड़ा हिनहिनाया,सांसद घबराया

पिछले दिनों इंदौर भाजपा सांसद शंकर लालवानी एक हॉर्स शो में पहुंचे थेए जहां उन्होंने घुड़सवारी भी की। इस दौरान एक पल ऐसा आया, जब वे सहम से गए। इसका वीडियो भी खूब वायरल हुआ है। सांसद लालवानी हंसते-हंसते घोड़े पर सवार हुए और कुछ कदम चले ही थे कि घोड़ा हिनहिनाने लगा। घोड़े की आवाज सुनते ही सांसद कुछ पल के लिए सकते में आ गए। उनके चेहरे के भाव भी बदल गए और उन्होंने घोड़े को रोकने का इशारा किया।

चुप्पी के बाद की खुशी

यूजीसी के खिलाफ  आग भड़क रही है और एक्ट को लोकसभा में मिली मंजूरी के वक्त सांसद शंकर लालवानी की वहां चुप्पी के बाद अब शहर में भी चुप्पी बनी हुई है। संसद में इस एक्ट की विसंगतियों के खिलाफ  बोलने की वे हिम्मत तक नहीं दिखा पाए थे। यही हाल इंदौर की पूर्व सांसद से लेकर विधायकों तक का भी रहा है। यूजीसी पर कुछ भी कहने से बचने वाले सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई गई रोक से  वे खुश जरूर हो गए हैं।

तेरा तुझको अर्पण

संत डोंगरे महाराज के पद चिन्हों पर महंत श्री कृष्ण गोपालदास भी चल रहे हैं। स्वयंपाकी संत डोंगरे जी कथा में आने वाले लाखों के चढ़ावे को हाथ तक नहीं लगाते थे,वे सारी राशि गौ रक्षण के कार्य के लिए आयोजक संस्था को समर्पित कर देते थे। खजराना में लक्ष्मीनारायण यज्ञ सम्पन्न कराने वाले महंत श्रीकृष्ण गोपालदास ने भी यज्ञ के दौरा भक्तों से प्राप्त 7 लाख रु गौ रक्षा,धर्म रक्षकों के परिवारों के लिए भेंट कर दिए,उन्होंने ऐसा पहली बार नहीं किया है। इससे पहले अन्य क्षेत्रों में कराए 10 यज्ञों के दौरान प्राप्त हुई राशि भी महंत जी ऐसे ही पुण्य कार्य के लिए दे चुके हैं। उल्लेखनीय है कि एक तरफ  महंगी राशि और अपनी शर्तों पर कथा करने वाले कई नामचीन संत हैं और दूसरी तरफ  महंत जी हैं,जो अब तक 50 लाख रु. गौ रक्षा-धर्म रक्षा और बच्चों की शिक्षा के लिए दे चुके हैं।

नर्मदा जयंती और पानी का भय

नर्मदा जयंती पर इस बार जो स्थिति रही वो चौंकाने वाली थी। इंदौर के नर्मदा प्रेमी नर्मदा स्नान के लिये गये,शहर में भी कार्यक्रम हुए थे। इसके विपरीत भागीरथपुरा में नर्मदा का वही पानी नलों से पहुंचा तो मौतों के कहर से खौफजदा रहवासियों ने उसी पानी को सड़कों पर बहाया,कारण यही था कि नर्मदा जयंती पर सीएम डॉ.मोहन यादव के आतिथ्य में कार्यक्रम करने वाले महापौर,यहां के रहवासियों का विश्वास नहीं जीत पाए थे।

अब याद आई टंकियों की सफाई की

इंदौर नगर निगम में पार्षदों में एकमात्र कांग्रेस पार्षद राजू भदौरिया ऐसे रहे जिन्हें अपने मतदाताओं के स्वास्थ्य की चिंता रही। हर तीन महीने में वे वार्ड की पानी टंकियों की सफाई करवाते रहे। आह्वान तो उन्होंने परिषद सम्मेलन में महापौर से लेकर सभी पार्षदों से भी किया था। अब जब भागीरथपुरा कांड हो गया तब कही जाकर महापौर पुष्यमित्र भार्गव को सभी वार्डों में पानी टंकियों की नियमित सफाई का ध्यान आया है ।