इंदौर और भोपाल जैसे शहरों में मेट्रो की जरूरत नहीं,साथ ही बीआरटीएस को हटाना भी गलत,यात्री बसों की व्यवस्था बेहतर बनाएं-बेंगलुरु के इंस्टीट्यूट ऑफ़ साइंस एंड रिसर्च सेंटर के विशेषज्ञ आशीष वर्मा ने कहा.
इंदौर और भोपाल जैसे शहरों में मेट्रो की जरूरत नहीं,साथ ही बीआरटीएस को हटाना भी गलत,यात्री बसों की व्यवस्था बेहतर बनाएं-बेंगलुरु के इंस्टीट्यूट ऑफ़ साइंस एंड रिसर्च सेंटर के विशेषज्ञ आशीष वर्मा ने कहा
झाबुआ/इंदौर। संजय जैन-सह संपादक। गत शनिवार को बैंगलुरु के इंस्टीट्यूट ऑफ़ साइंस एंड रिसर्च सेंटर के विशेषज्ञ आशीष वर्मा ने कहा था कि ट्रैफिक के मामले में वियना गोल्ड स्टैंडर्ड है। इंदौर को वियना जैसा बनाना है तो यहां मेट्रो से ज्यादा जरूरी लोक परिवहन के साधन खास कर यात्री बसों की संख्या बढ़ाना चाहिए। इंदौर,उज्जैन,भोपाल आदि शहरों में मेट्रो की उतनी जरूरत नहीं है जितनी जरूरत यात्री बसों की है। इंदौर,भोपाल में बीआरटीएस क्यों हटाया गया ? यह समझ से परे हैं जबकि करना यह चाहिए था कि बीआरटीएस में वाहनों के लिये लाइनें और अधिक बढे ।
किसी के पास नहीं क्वालिटी ऑफ़ लाइफ
पिछले दिनों इंदौर शहर के यातायात,परिदृश्य और समाधान विषय पर परिचर्चा में वर्मा ने कहा कि मैं पहले भी दो बार इसी मुद्दे पर प्रेस क्लब में चर्चा कर चुका हूं। तब भी मैंने कहा था कि मेट्रो के लिये उतनी सवारियां मिलना संभव नहीं है जितनी की उम्मीद की गई। इससे बेहतर विकल्प तो पब्लिक बसें हो सकती हैं साथ ही कार का उपयोग कम करने में भी बसें मददगार हो सकती है। विदेशों में इतने फ्लाईओवर नहीं हैं,जितने इंदौर में बन रहे हैं। जब जीवन में शुद्ध हवा और शुद्ध पानी ही नहीं होंगे तो स्टैण्डर्ड ऑफ़ लिविंग का क्या मतलब ? आज सिंगापुर के हर आदमी की इनकम हमारे देश के किसी सीईओ से भी ज्यादा है। इसके बाद भी वहां के लोग पब्लिक ट्रांसपोर्ट का ही उपयोग भी करते हैं और यातायात नियमों का पालन भी करते हैं। कभी इंदौर में साइकिलें खूब दिखती थीं,अब हर घर में कार,टू-वीलर एक से अधिक हैं, हर जगह सड़कें खुदी पड़ी हुई हैं। कहीं जाने के लिए घंटों ट्रैफिक में फंसे या खड़े रहना पड़ता है। इन तमाम व्यस्थाओं को हमें समझना होगा और बदलना होगा। हमें समझना होगा कि हमें *क्वालिटी ऑफ़ लाइफ चाहिए या स्टैण्डर्ड ऑफ़ लाइफ आज हमारे परिवारों की स्थिति यह है कि हर फैमिली मेम्बर के पास अपनी अलग गाड़ी है,पर *क्वालिटी ऑफ़ लाइफ * किसी के पास नहीं है। इन गाड़ियों की वजह से हम हर दिन इतना प्रदूषण अंदर खींच रहे हैंए जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती।
सबसे बड़ी और ज्वलंत समस्या यातायात
स्वच्छता में आठ बार नंबर वन का ख़िताब पाने वाले इंदौर शहर में आज भी सबसे बड़ी और ज्वलंत समस्या यातायात को लेकर बनी हुई है। विडम्बना यह है कि यहां आने वाले सभी शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी यातायात व्यवस्था सुधारने को अपनी पहली चुनौती तो मानते आ रहे हैं लेकिन इसके बावजूद भी आज तक यातायात का ढर्रा जस का तस ही बना हुआ है। गौरतलब है कि 45 आदमी एक बस में आराम से जा सकते हैं। यदि पब्लिक ट्रांसपोर्ट हर जगह उपलब्ध होगा तो ट्रैफिक में राहत अवश्य मिल सकती है।
यातायात व्यवस्था सुधारने में हमें ही चिंता करनी पड़ेगी
संस्था सेवा सुरभि द्वारा जिला प्रशासन,इंदौर पुलिस,नगर निगम एवं विकास प्राधिकरण की सहभागिता में चलाए जा रहे झंडा ऊंचा रहे हमारा अभियान के तहत गत शनिवार को प्रेस क्लब में हुई परिचर्चा में प्रो. डॉ.आशीष वर्मा ने कहा था कि यातायात व्यवस्था सुधारने में हमें ही चिंता करनी पड़ेगी। इसमें पुलिस का कोई रोल ही नहीं है फिर भी हम उन्हीं पर ही निर्भर रहते हैं और उन्हीं को कोसते भी रहते हैं। ट्रैफिक मैनेज करना बहुत कॉम्प्लेक्स और टफ काम है। इसके लिए हमें ही अवेयर रहना होगा कि हम अट्रैक्टिव ट्रांसपोर्ट बनाएं और उनका उपयोग भी करें। फुटपाथ व्यवस्था भी ऐसी होना चाहिए कि जिसमें साइकिल और पैदल चलने वाले आसानी से चल सकें। वर्मा ने अपनी बात का निष्कर्ष देते हुए जो सुझाव दिए,उनका सार यही है कि हम लोक परिवहन को बढ़ावा दें,ट्रांसपोर्ट नेटवर्क को मजबूत बनाएं,निजी गाड़ियों के उपयोग को कम करें और पैदल तथा साइकिल चालकों के लिए सुरक्षित और क्रासिंग बनाएं ।
ट्रैफिक को लेकर महापौर,सांसद बोल
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने माना कि ट्रैफिक प्रॉब्लम हमारे लिए चेलेंज तो है लेकिन हमें यह भी याद रखना होगा कि इंदौर की पापुलेशन वियना से कई अधिक भी है,असंभव तो कुछ भी नहीं है। इंफ्रास्ट्रकचर,ट्रैफिक इंजीनियरिंग इन सबसे पहले तो हम सभी में अवेयरनेस का होना जरूरी है। पब्लिक ट्रांसपोर्ट जब तक फायदे का सौदा नहीं बनेगा,तब तक इस दिशा में सारे प्रयास बेकार ही साबित होंगे। इस पर वर्मा ने कहा कि आर्थिक लाभ की अपेक्षा इसे ऐसे देखें कि पर्यावरण सुधरेगा साथ ही लोगों की हेल्थ कॉस्ट भी कम होगी। मैं डबल डेकर सिस्टम जिसमे नीचे बस और ऊपर मेट्रो के पक्ष में भी नहीं हूं। सांसद शंकर लालवानी ने वर्मा से अनुरोध किया कि आप इंदौर के परिप्रेक्ष्य में शॉर्ट,मीडियम और लॉन्ग टर्म प्लान बना कर देंवे। अतुल शेठ का कहना था राज्य सरकार,केंद्र सरकार,नगर सरकार ऐसा फार्मूला बनाएं कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट के घाटे की भरपाई कैसे हो ? जीएसआईटीएस के डायरेक्टर नीतेश पुरोहित ने कहा कि पहले जहां बंगले हुआ करते थे वहां मल्टी स्टोरीज बन गई है। रोड है ही नहीं साथ ही पानी की समस्या भी बढ़ गई है। लैंड यूज चेंज करते हैं तो इंटीग्रेटेड प्लॉन भी होना चाहिए।
अतिथियों ने दीप प्रज्वलित किया
परिचर्चा के प्रारंभ में सांसद शंकर लालवानी,वरिष्ठ पत्रकार अमित मंडलोई,संस्था सेवा सुरभि के संयोजक ओमप्रकाश नरेडा,अतुल सेठ,एसजीएसआईटीएस के डायरेक्टर नितेश पुरोहित और प्रेस क्लब अध्यक्ष दीपक कर्दम ने दीप प्रज्वलन कर परिचर्चा का शुभारंभ कियाथा। अतिथियों का स्वागत प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष अरविन्द तिवारी,कीर्ति राणा,गौतम कोठारी,मोहन अग्रवाल,डॉ.सचिन नारोलकर,संजय त्रिपाठी,निकेतन सेठी,रमेश गुप्ता पीठेवाले एवं अन्य सदस्यों ने किया था। अतुल सेठ ने आशीष वर्मा का परिचय दिया था। संस्था की ओर से अतिथियों को स्मृति चिन्ह भी भेंट किए गए थे। संचालन प्रेस क्लब के भूतपूर्व अध्यक्ष अरविन्द तिवारी ने किया था।

