क्या अब महू के हाल भी भागीरथपुरा जैसे तो नहीं ? -सरकारी रिपोर्ट में पानी साफ तो क्यों बीमार हो रहे लोग ? -बच्चों के ब्लड में मिला हेपेटाइटिस-ए और ई वायरस, 32 हुई मरीजों की संख्या
क्या अब महू के हाल भी भागीरथपुरा जैसे तो नहीं ? -सरकारी रिपोर्ट में पानी साफ तो क्यों बीमार हो रहे लोग ? -बच्चों के ब्लड में मिला हेपेटाइटिस-ए और ई वायरस, 32 हुई मरीजों की संख्या
दूषित पानी से लोग बीमार हुए,तो तीन साल से लंबित 35 करोड़ की पाईप लाइन योजना को,अब मिली तत्काल मंजूरी
झाबुआ/इंदौर। संजय जैन-सह संपादक। पिछले दिनों प्रदेश में एक बार फिर दूषित पानी के कारण कई लोग बीमार हुए हैं। पहले इंदौर में 25 लोगों की मौत हो गई और अब इंदौर के पास महू में दो दर्जन से ज्यादा लोग दूषित पानी के कारण बीमार हुए हैं। इंदौर में भी दूषित पानी से मरने वाले लोगों की अनौपचारिक संख्या 28 तक पहुंच गई है। महू कैंटोनमेंट बोर्ड क्षेत्र में पीलिया और टाइफाइड का प्रकोप थमता नजर नहीं आ रहा है। अब महू से भी ऐसी घटना सामने आई तो प्रशासन तुरंत अलर्ट हो गया। देर रात विधायक कलेक्टर और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अस्पताल और प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। इस दौरान मरीजों का हालचाल जाना और उचित इलाज का भरोसा दिया। दूषित पानी पीने से महू में बीमार हुए लोगों की हालत अब तो ठीक है लेकिन भागीरथपुरा-इंदौर के बाद महू की इस घटना ने फिर से यह तो साबित ही कर दिया है कि चाहे नगर निगम हो या कैंट बोर्ड प्रशासनिक अधिकारियों की नींद,तब तक नहीं खुलती जब तक व्यवस्था की खामियों के चलते लोग मरणासन्न हालत में नहीं पहुंच जाते है।
तीन साल से लंबित 35 करोड़ की पाईप लाइन योजना को अब मिली तत्काल मंजूरी
महू की भाजपा विधायक उषा ठाकुर का कहना था कि जिस इलाके में यह घटना हुई है वहां पानी की लाईन गंदगी के बीच से दी जा रही थी। साथ ही भी उनका कहना था कि उन्होंने महू में पेयजल वितरण की बेहतर व्यवस्था के लिये तीन साल पहले पाईप लाईन को बदलने और साथ ही टंकी निर्माण का 35 करोड़ का प्रस्ताव केंट बोर्ड को दिया भी था। यहां से प्रस्ताव मंजूरी के लिये लखनऊ मुख्यालय को भेजा गया था लेकिन तीन साल से इसमे कोई प्रगति नहीं हुई। इस बीच वे केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से भी मिलीं थी,उन्होंने निर्देश भी दिए थे। वे तकरीबन चार बार केंट मुख्यालय लखनऊ में वरिष्ठ अधिकारियों से भी मिलने गयी थी किंतु महू की पेयजल समस्या के निदान की समस्या को,किसी ने भी गंभीरता से लिया ही नहीं अब जब महू में यह घटना हुई तो लखनऊ मुख्यालय से 35 करोड़ की नई पाईप लाईन डालने की तत्काल मंजूरी दे दी गई।
पानी में मल मूत्र मिलने से पनपा वायरस
चिकित्सकों के अनुसार,हेपेटाइटिस-ए और ई पूरी तरह से जल जनित वायरस हैं। ये वायरस तब सक्रिय होते हैं जब पेयजल में मल मूत्र-सीवेज का मिश्रण होता है। यह सीधा लिवर पर हमला करता है, जिससे लिवर में गंभीर इन्फेक्शन और सूजन आ जाती है। चंदर मार्ग निवासी 12 वर्षीय मोहम्मद उमर शलमानी इसका ताजा उदाहरण ह,जो पिछले 17 दिनों से बिस्तर पर है और बीमारी के कारण उसकी स्कूल परीक्षाएं भी छूट गई हैं।
पीएचई की रिपोर्ट में पानी साफ
एक ओर जहां मरीजों के खून के नमूने चिल्ला- चिल्ला कर कह रहे हैं कि बीमारी पानी से फैली है,वहीं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग-पीएचई की रिपोर्ट इसके विपरीत है। एसडीएम राकेश परमार ने बताया कि पत्ती बाजार और सुर्की गली से लिए गए नर्मदा जल और बोरवेल के 16 नमूनों की रिपोर्ट सामान्य आई है। अब स्थिति को स्पष्ट करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने मरीजों के घरों से पानी के नमूने लेकर पुणे स्थित लैब भेजे हैं,जहां सूक्ष्मजीवों और वायरोलॉजी की विस्तृत जांच की जाएगी।
सरकारी रिपोर्ट में पानी साफ तो क्यों बीमार हो रहे लोग ?
आपको बता दे कि पिछले दिनों महू के पत्ती बाजार,मोती महल और चन्दर मोहल्ला इलाके में दूषित पेयजल के कारण करीब 25 से ज्यादा लोग उल्टी, दस्त,पेट दर्द की शिकायत के चलते मभा हॉस्पिटल और रेडक्रॉस हॉस्पिटल पहुंचे थे। पत्ती बाजार,चंदर मार्ग क्षेत्र में इन दोनों इंदौर के भागीरथ पुरा जैसी ही त्रासदी की भनक नजर आ रही है। विगत 10 दिनों से क्षेत्र के लगभग दो दर्जन से अधिक लोग बुखार पीलिया व टाइफाइड के शिकार होकर विभिन्न अस्पतालों में उपचार करा रहे हैं। मामले की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन हरकत में आया और तुरंत स्वास्थ्य विभाग की टीम एसडीएम तहसीलदार ने मौके का निरीक्षण किया,रोगियों की जानकारी ली। देर रात महू की स्थानीय विधायक उषा ठाकुर और कलेक्टर शिवम वर्मा भी प्रभावित इलाकों का निरीक्षण और बीमारों का हालचाल जानने पहुंचे थे,साथ ही सभी के उपचार की समुचित व्यवस्था के निर्देश भी दिए थे। सरकारी रिपोर्ट में पानी साफ ,तो क्यों बीमार हो रहे लोग ? खून में मिला खतरनाक वायरस मिला है। घटना के बाद से 10 टैंकरों से पानी का वितरण किया जा रहा है। महू शहर और पंचायतों में पानी के सैंपल लिए गए।
पानी के नमूने पुणे स्थित लैब भेजे हैं
मरीजों में बच्चे भी है,जिन्होंने चौपाटी पर मोमोज आदि खाए थे। इस घटना का होने का कारण कही फूड पॉइजनिंग तो नहीं है....? ताजा स्वास्थ्य जांच में से बच्चों के ब्लड सैंपल में हेपेटाइटिस-ए और हेपेटाइटिस ई वायरस की पुष्टि हुई है। घरों से पानी के नमूने लेकर पुणे स्थित लैब भेजे हैं,जहां सूक्ष्मजीवों और वायरोलॉजी की विस्तृत जांच की जाएगी। प्रभावित इलाकों में निजी-सार्वजनिक बोरिंग के उपयोग पर रोक लगा दी गयी है।
उषा ठाकुर- विधायक,महू

