भागीरथपुरा इंदौर जैसी दूषित जल त्रासदी दोबारा ना हो,जरूरी है पानी की मुख्य लाइन और सीवरेज लाइन के बीच कम से कम तीन मीटर की दूरी रखना
भागीरथपुरा इंदौर जैसी दूषित जल त्रासदी दोबारा ना हो,जरूरी है पानी की मुख्य लाइन और सीवरेज लाइन के बीच कम से कम तीन मीटर की दूरी रखना
अक्षम्य लापरवाही का जीता जागता प्रमाण- पानी की सप्लाय चौबीसों घण्टे करना होगी
झाबुआ/इंदौर। संजय जैन-सह संपादक। भागीरथपुरा इंदौर में दूषित जल से हुई अकाल मौतों जैसी त्रासदी इंदौर सहित अन्यत्र कहीं ना हो इसके लिए स्थायी प्रबंधन के लिए होलकर साइंस कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ.राम श्रीवास्तव ने कुछ सुझाव दिए हैं। उनका कहना है भागीरथपुरा कांड में पानी की मुख्य पाइप लाइन और सीवरेज लाइन का पास-पास होना ही मुख्य कारण के रूप में सामने आया है। इंदौर प्रशासन को पूरे शहर की वॉटर और सीवरेज लाइन का गहन सर्वे करना चाहिए ताकि ऐसी गलती कहीं और नजर आए तो उसकी रोकथाम तुरन्त की जा सके। डॉ.श्रीवास्तव का सुझाव है कि पानी की मुख्य लाइन और सीवरेज लाइन के बीच कम से कम दस फीट-तीन मीटर की दूरी रखना बेहद जरूरी है,ऐसा करने पर यदि किन्हीं कारणों से दोनों लाइनों में यकायक लीकेज की स्थिति बन भी जाती है तो त्रुटि तत्काल पकड़ में आ जाएगी,तब कोई जनहानि औरअकाल मौत जैसे हालात नहीं बनेंगे।
अक्षम्य लापरवाही का जीता जागता प्रमाण
भागीरथपुरा त्रासदी में अब तक जो तथ्य सामने आए हैं उसके आधार पर यह कहा जा सकता है कि बहुत पहले से सीवरेज के पानी का नर्मदा जल में आना और फिर भी उस पर त्वरित कार्यवाही भी नहीं होना,यह तो निश्चित ही एक अक्षम्य लापरवाही का जीता जागता प्रमाण है। सीवरेज लाइन बिछाने वाले विभाग और नर्मदा पाइप लाइन डालने वाले विभाग अलग-अलग होते हैं,उनमें कोआर्डिनेशन की कमी रहती है। इस कारण सीवरेज लाईन ऊपर बिछा दी गई और पीने के पानी की मेन लाईन अधिकांश जगह नीचे ही रहती है।
पानी की सप्लाय चौबीसों घण्टे करना होगी
डॉ.श्रीवास्तव का कहना है कि चौबीस घंटे पेयजल की सप्लाय हो और हर घर-हर नल पर मीटर वाली व्यवस्था हो तो ऐसी अप्रिय स्थिति में भी पानी जहरीला होने जैसे हालात नहीं बनेंगे। पीने का पानी दो दिन में एक दिन एक घंटे के लिए दिया जाता है,बाकी समय पाइप लाईन खाली रहती है। इससे नेगेटिव प्रेशर पैदा होता है जो बाहर प्रदूषित मिट्टी में फैली गंदगी को भीतर की ओर खींच लेता है। अगर स्थानीय रहवासियों को शुद्ध पेयजल वितरित करना है तो भूमिगत पाइप लाइन को खाली नहीं रखना चाहिए,अर्थात पानी की सप्लाय चौबीसों घण्टे करना होगी । सीवेज और पीने के पानी की लाइनों के बीच न्यूनतम दूरी आमतौर पर क्षैतिज रूप से 10 फीट होती है,कुछ नियमों के अनुसार ऊर्ध्वाधर रूप से 18 इंच की दूरी- सीवरेज के ऊपर पानी की लाइन आवश्यक होती है,लेकिन यह स्थानीय नियम मिट्टी की स्थितियों और पाइपों के एक दूसरे को पार करने या समानांतर चलने के आधार पर भिन्न-भिन्न हो सकती हैं। विशिष्ट नियमों के लिए हमेशा अपने स्थानीय स्वास्थ्य या सार्वजनिक निर्माण विभाग से परामर्श ले,क्योंकि मानक ही भू-जल प्रदूषण को रोकने को सुनिश्चित करते हैं ।
सेप्टिक सिस्टम
इसके लिए सख्त नियम होते हैं,जिनमें अक्सर कुओं से 50-100 फीट या उससे अधिक की दूरी की आवश्यकता होती है। सीवरेज लाइन में लीकेज मुख्य रूप से पुरानी पाइपलाइनों,खराब स्थापना और बाहरी दबावों के कारण होता है। ये समस्याएं विशेष रूप से भारत जैसे क्षेत्रों में तो आम बात हैं। उल्लेखनीय है कि हालिया इंदौर की घटना में सीवरेज का पानी का पीने के पानी में मिलना,इसका ज्वलंत उदाहरण भी है।
मुख्य कारण
-खराब स्थापना,अनुचित जोड़,अपर्याप्त सपोर्ट या गलत ढलान से पाइप फट जाते हैं।
-पेड़ों की जड़ें,जड़ें नमी की तलाश में पाइपों में घुसकर दरारें पैदा करती हैं।
-जंग या क्षरण,पुरानी मटेरियल-जैसे कास्ट आयरन मिट्टी की अम्लता या रसायनों से खराब हो जाती है।
-रुकावटें-ग्रीस,कचरा जमा होने से दबाव बढ़ता है,जो लीक का कारण बनता है।
-मिट्टी का हिलना-बारिश,सूखा या निर्माण से पाइप टूट भी सकते हैं।
-उम्रदराज इंफ्रास्ट्रक्चर-पुरानी सीवेज सिस्टम पहनाव से लीक हो ही जाती हैं।
मजबूती के गुण
-पोर्सलीन या विट्रिफाइड क्लेद्ध सीवेज पाइप मजबूत और रासायनिक प्रतिरोधी होते हैं,लेकिन लंबे समय तक सुरक्षित रहने की उनकी क्षमता भी सीमित है। ये आमतौर पर 50-100 वर्ष तक चल सकते हैं,पर जड़ों,मिट्टी हलचल और क्षरण से प्रभावित हो जाते हैं।
-टिकाऊ सामग्री-उच्च दबाव सहन करने वाले,जंग मुक्त और एसिड प्रतिरोधी।
-उपयोगी जीवन.-औसतन 60 वर्ष, मिट्टी के पाइपों के समान। कम रखरखाव,चिकनी सतह से रुकावट कम।
जहरीला पानी मौत का कारण
यहां जहरीला पानी मौत का कारण लेकिन कई देश सीवरेज के पानी को रिसाइकिल कर के पीने योग्य बना रहे हैं। यह कैसी बिडम्बना है कि दुनिया में ऐसे कई देश हैं,जो सीवरेज के पानी को रीसाईकिल करके पीने के काम में ले रहे हैं और हम तो उससे लोगों की हत्या कर रहे हैं।सिंगापुर, नामीबिया,ऑस्ट्रेलिया,इज़राइल,दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त राज्य अमेरिका-विशेष रूप से कैलिफ़ोर्निया और टेक्सास जैसे देश जल संकट से निपटने के लिए पीने के पानी का रीसाइक्लिंग करके -पुनर्चक्रित उपयोग में अग्रणी हैं। ये देश सिंगापुर के न्यू वॉटर जैसे उन्नत उपचार संयंत्रों का उपयोग करके अपशिष्ट जल को सुरक्षित और उच्च गुणवत्ता वाले पेयजल में परिवर्तित करते हैं। पीने योग्य दोबारा उपयोग के रूप में जानी जाने वाली यह प्रक्रिया भूजल, जलाशयों को भरती है या सीधे पेयजल आपूर्ति में प्रवेश करती है। नामीबिया 1960 के दशक से इस क्षेत्र में अग्रणी रहा है।
प्रमुख उदाहरण
सिंगापुर
सिंगापुर एक वैश्विक अग्रणी देश है,जो उन्नत निस्पंदन और यूवी कीटाणुशोधन का उपयोग करके उच्च गुणवत्ता वाले उपचारित पुनर्चक्रित जल-एनी वाटर का उत्पादन करता है,जो देश की मांग के महत्वपूर्ण हिस्से को पूरा करता है।
नामीबिया-विंडहोक
यह देश पीने योग्य पानी के सीधे दोबरा उपयोग में अग्रणी है और अपनी शुष्क परिस्थितियों के कारण उपचारित अपशिष्ट जल से राजधानी को पानी का एक बड़ा हिस्सा प्रदान करता है।

