जाते हुए साल में,सीना फुलाने जैसा तो नहीं रहा इंदौर शहर का पर्यावरण-अब कल से तो नया साल भी शुरू  हो जाएगा

स्मार्ट सिटी,नमामि गंगे एवं अमृत प्रोजेक्ट भी कान्ह नदी की सफाई में बेअसर रहे,शहर को सायलेंट सिटी बनाने की सिर्फ  घोषणा ही रही,ज्यादा कुछ नहीं हुआ

झाबुआ/इंदौर। संजय जैन-सह संपादक। इस वर्ष में शहरी पर्यावरण को लेकर न्यायालय काफी सक्रिय रहा एवं समय पर शोर कम करने,वृक्ष अधिकारी नियुक्त करने, जल स्त्रोतों को बचाने तथा बगैर अनापत्ती प्रमाण-पत्र से चल रहे कारखानों से पैदा प्रदूषण आदि पर शासन-प्रशासन को निर्देश भी दिए थे। जाते हुए साल में,सीना फुलाने जैसा तो नहीं रहा इंदौर शहर का पर्यावरण- अब कल से तो नया साल भी शुरू  हो जाएगा

वर्ष 2025 में शहरी पर्यावरण के हालात इस प्रकार रहे अब कल से नया साल शुरू

वायु गुणवत्ता

10 लाख से अधिक आबादी वाले 47 शहरों में इंदौर शहर स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में प्रथम स्थान पर आया। वैसे शहर का मध्य भाग तो पहले से ही वायु प्रदूषण का हॉट स्पॉट रहा,परंतु इस वर्ष भी कुछ अन्य क्षेत्र भी हॉट-स्पॉट बने। इनमें चाट चौपाटी, भंवरकुंआ,बंगाली चौराहा, महूनाका, कोठारी मार्केट एवं कालानी नगर चौराहा आदि प्रमुख है। विजय नगर एवं एअरपोर्ट रोड पर धूल के कणों में बढ़ोत्री हुई। प्रदूषण नियंत्रण मण्डल की विधान सभा में रखी रिपोर्ट में बताया गया कि प्रदेश के 29 जिलों में वायु गुणवत्ता खराब है। इंदौर में औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक-एक्यूआय वर्ष 23-24 के मुकाबले 24-25 में 113 से बढ़कर 115 पर पहुंचा है। नवम्बर-दिसंबर के कुछ महिनों में एक्यूआय कुछ दिनों में 200-300 तक भी पहुंचा। वर्ष 2019 में राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम एनकेप तथा 2020 में क्लीन एअर केटेलिस्ट कार्यक्रम शामिल होने के बाद,यह प्रयास किए गए कि वर्ष 2025 तक औसत एक्यूआई 50-60 के करीब आ जाए,परंतु ऐसा कुछ नहीं हो पाया। केन्द्रीय पर्यावरण,वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अपर सचिव नरेश पाल गंगवार ने भी मार्च में नगर निगम की बैठक में एक्यूआई 60 के आसपास लाने पर जोर भी दिया था। जल संसाधन  शहर वेट लैंड सिटी घोषित किया गया एवं यह विश्व के 32 शहरों में शामिल हो गया।केन्द्रीय पर्यावरण विभाग द्वारा स्थानीय प्रशासन को 304 वेटलैंड्स की सूची देकर इन्हें सत्यापन करने, सीमांकन करने एवं वर्तमान स्थिति बताने को कहा गया है।

कान्ह नदी की सफाई में बेअसर रहे

स्मार्ट सिटी,नमामि गंगे एवं अमृत प्रोजेक्ट भी कान्ह नदी की सफाई में बेअसर रहे। पिछले 15 वर्षों में 1200 करोड़ खर्च होने के बावजूद न तो नदी ही साफ  हुई औऱ न ही अतिक्रमण हटे। अभी भी नदी में 11 नालों से गंदगी व कचरा आकर मिल रहा है। मध्यक्षेत्र के हालत ज्यादा खराब है जिनमें छावनी,गणगौर घाट,लौखंडे पूल एवं पोलो ग्राउण्ड प्रमुख है। शहरी क्षेत्र में लगभग 20 किलोमीटर बहने वाली कान्ह एवं सरस्वति नदियों को संवारने के लिए 510 करोड़ रुपये की रिवर फ्रंट योजना बनायी गयी है। गुजरात की ढोलकिया फांउडेशन तथा यूनिटी ऑफ नेशंस एक्शन फार क्लायमेट चेंज कौंसिल ने भी दोनों नदियों की सफाई में रुचि दिखायी है। शहरी सीमा के 27 तालाबों के जलागम क्षेत्र-केंचमेंट एरिया से अतिक्रमण हटाने के निर्देश निगमायुक्त ने दिए है। चैन्नई की संस्था एनवायरोनमेंटल फाउन्डेशन ऑफ इंडिया ने शहर के 6 तालाबों की सफाई के कार्य का जिम्मा लिया एवं छोटा बिलावली, छोटा बांगड़दा एवं टिगरिया बादशाह पर कार्य शुरू किया। सिरपुर व बिलावली तालाब की पाल सुधारने पर भी कार्य प्रारंभ हुआ,जो नगर निगम करेगा।

अति दोहन की श्रेणी से निकलकर क्रीटीकल में आ गया

भूजल बोर्ड की रिपोर्ट अनुसार शहर अति दोहन की श्रेणी से निकलकर क्रीटीकल में आ गया। जिलाधीश ने पूरे जिले में नलकूप खनन पर मार्च से जून तक प्रतिबंध लगाया था। जल स्तर सुधारने हेतु नगर निगम ने आधा दर्जन खंभाती कुए प्रायोगिक तौर पर बचाने की योजना भी बनाई थी। ये कुंए मधुमक्खी के छत्ते के समान होते हैं। नगर निगम ने एक समीक्षा बैठक में बताया कि 218 कुंए बावड़ियों का पानी पीने योग्य है। वल्लभ नगर में पुरानी बावड़ी पर बनी दुकाने तोड़ी गयी तथा कनाड़िया में 250 वर्ष पुरानी अहिल्या बावड़ी का पुर्नरूद्धार भी किया गया।

शोर प्रदूषण

वर्ष 2017 तथा 2023 में तत्कालिन कलेक्टर लोकेश कुमार जाटव तथा इलैया राजा टी के शहर को सायलेंट सिटी बनाने के प्रयास 2025 में भी आगे नहीं बढ़ पाये है। कलेक्टर ने फरवरी में शोर प्रदूषण की रोकथाम हेतु धारा 163 के तहत प्रतिबंध के आदेश जारी किए थे,परंतु ईमानदारी से इन पर पालन ही नहीं हुआ। शहर के स्कूल, कॉलेज,दवाखाने,न्यायालय तथा सरकारी कार्यालयों के आसपास घोषित लगभग 30 खामोश क्षेत्र- सायलेंट-ज़ोन में शोर की तीव्रता निर्धारित स्तर से ज्यादा आंकी गयी। तेज आवाज के विरूद्ध महज 250 चालान बने एवं मोडीफाइड सायलेंसर पर भी कार्यवाही की गयी।

विकीरण-रेडिएशन समस्या

विशेषज्ञ की सहायता से शहर में मोबाइल टावर से पैदा विकीरण का अध्ययन कर बताया था कि यह कई क्षेत्रों में निर्धारित स्तर 0.4 मिलीवाट सेमी से कई गुना ज्यादा देखी गयी। इन स्थानों में महारानी रोड़, राजबाड़ा एवं कोठारी मार्केट प्रमुख है। काउंटीवॉक-बायपास,पंचशील नगर,कनाड़िया रोड़ एवं मूसाखेड़ी के रहवासियों ने टॉवर लगाने का विरोध किया एवं कनाडिया में तो विधायक महेन्द्र हार्डिया ने रुकवाया था। वर्ष 2024 में विधायक हार्डिया ने टॉवर से पैदा विकीरण के खतरों का मुद्दा विधानसभा में भी उठाया था एवं इससे कैंसर बढ़ने की संभावना भी बतायी थी।

हरियाली-1300 पेड़ काटे गए

हरियाली वाले शहर में वर्ष भर में विभिन्न कारणों से 45 स्थानों पर नए-पुराने सभी उम्र के 900 पेड़ काटे गए। मूसाखेड़ी से आयटी पार्क वाले मार्ग पर सर्वाधिक 500 पेड़ काटे गए। राधा-अष्टमी 31 अगस्त को मंगलसिटी के सामने श्रीकृष्ण के प्रिय कदम्ब के 15 पेड़ काटे गए। लालबाग के बारामत्था क्षेत्र में स्थित शिवहनुमान मंदिर परिसर में वैसे तो पांच पेड़ कटे, परंतु इनमें एक पीपल का 250 वर्षीय,70-80 फीट ऊंचा एवं लगभग 40 फीट तने की गोलाई वाला पेड़ भी शामिल था। 4-5 मई तथा 12 जून को आए आंधी तूफान से 20 से ज्यादा स्थानों पर 400 पेड़ गिर गए। रिंग रोड पर सबसे ज्यादा पेड़ धराशायी हुए थे,जिनमें गुलमोहर व पेल्टाफोरम की संख्या ज्यादा थी। इस प्रकार वर्ष भर में कुल लगभग 1300 पेड़ शहर से विदा हो गये। काटे गए एवं धराशायी हुए पेड़ों में पीपल, बरगद, नीलगिरी, नीम,शीशम ,गूलर,इमली, कदम्ब,आम,अशोक,कबीट,विलायती इमली, गुलमोहर एवं पेल्टाफोरम शामिल थे। नगर निगम बजट में 02 प्रतिशत हरियाली उपकर लगाया गया। पेड़ों का स्थानांतरण करने का कार्य नगर निगम स्वयं करेगा एवं उद्यान विभाग को इस कार्य हेतु मशीन खरीदने की स्वीकृती दी गयी।

मानव श्रृंखला बनाकर पेड़ कटाई का विरोध किया था

सरकारी बगीचों,ग्रीन बेल्ट,डिवायडर तथा चौराहों की हालत सुधारने हेतु नगर निगम 5 वर्षों के अनुबंध पर संस्थाओं को देगा। इसके तहत 24 संस्थाओं के प्रस्ताव स्वीकृत किए गए। कई स्थानों पर पेड़ों को बचाने के प्रयास भी सफल रहे। लगभग 15 स्थानों पर पेड़ कटाई पर जुर्माना नगर निगम ने सख्ती से वसूल भी किया। शहर के पेड़-प्रेमियों ने विभिन्न स्थानों पर धरना एवं मानव श्रृंखला बनाकर पेड़ कटाई का विरोध किया एवं पुराने पेड़ों को धरोहर घोषित करने के प्रयास किए।

शहर ग्रीन-सिटी का दर्जा पाने हेतु पंजीकृत हुआ

शहर ग्रीन-सिटी का दर्जा पाने हेतु पंजीकृत हुआ जहां 24 मापदंडों पर आकलन किया जाता है। हरियाली बढ़ाने हेतु 3-डी मॉडल पर कार्ययोजना होगी। 14 दिसंबर को ब्रिलियंट कन्वेशन सेंटर में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने भी घटती हरियाली पर चिंता जतायी थी एवं कहा था कि बड़ी-बड़ी ऊँची इमारतें बनाकर शहर को दिल्ली न बनाये,मालवा को मालवा ही रहने दे,पेड़-पौधों का ख्याल रखकर कार्य करें।

साल 2025 के दौरान 13 सौ से अधिक पेड़ विदा हो गए

पर्यावरणविद और गुजराती साइंस कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ.ओपी जोशी ने विदा होते साल में शहर के पर्यावरण सुधार और खामियों को लेकर विस्तृत अध्ययन किया है। डॉ.जोशी की यह चिंता है कि शहर को ग्रीन सिटी का दर्जा मिलना गौरव की बात है किंतु यह भी हकीकत है कि साल 2025 के दौरान 13 सौ से अधिक पेड़ विदा हो गए, जिनमें 250 साल पुराना पीपल भी शामिल है। नगर निगम की यह पहल अच्छी है कि हरियाली बढ़ाने के लिए नगर निगम पांच वर्ष के लिए संस्थाओं को चौराहे आदि अनुबंध पर देगा।