नए साल से ऑनलाइन व्यवस्था लागू कर रहे हैं,इंदौर प्राधिकरण सीईओ डॉ.परीक्षित झाड़े

लीज नवीनीकरण के लिए प्राधिकरण के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे,मैसेज पर घर बैठे मिलेगी जानकारी

झाबुआ/इंदौर। संजय जैन-सह संपादक।  आम उपभोक्ताओं के हित में सूचना प्रौद्योगिकी के बेहतर उपयोग की शुरुआत इंदौर विकास प्राधिकरण में नए साल-2026 से होने लगेगी। प्रदेश में 10 विकास प्राधिकरण हैं,इनमें पहला इंदौर विकास प्राधिकरण ऐसा होगा,जहां नए साल से लीज संबंधित प्रकरणों में उपभोक्ता को प्राधिकरण के चक्कर लगाने से मुक्ति मिल जाएगी। आईटी के बेहतर उपयोग से यह व्यवस्था लागू हो जाएगी कि आवेदक को घर बैठे ही अपने लीज संबंधी प्रकरण की जानकारी मोबाइल या ई-मेल पर ही मिल जाएगी।

सुशासन भी प्राधिकरण में नजर आए

लीज नवीनीकरण मामलों के साथ ही ई-फाइलिंग सिस्टम भी नए साल से शुरु हो जाएगा। इसका फायदा यह होगा कि अंतर विभागीय पत्राचार में संबंधित विभागों को उसी दिन जानकारी तो मिल ही जाएगी। अन्य विभागों से मांगी गई जानकारी भी प्राधिकरण को एक क्लिक पर मिल जाएगी। सूचना प्रौद्योगिकी को जनोन्मुखी बनाने का उद्देश्य यह भी है कि आमजन के मन में यह विश्वास मजबूत हो कि मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव जिस सुशासन पर जोर देते हैं,वह प्राधिकरण में नजर भी आए।

सिंगल विंडो सिस्टम लागू है

आपको बता दे कि अन्य शासकीय विभागों की तरह प्राधिकरण में भी सिंगल विंडो सिस्टम लागू है। जहां प्राधिकरण की विभिन्न शाखाओं से संबंधित मामलों का निराकरण निर्धारित तारीख पर किया जाना तय है,लेकिन कई बार अवकाश सहित अन्य कारणों से निराकरण में अनावश्यक विलंब भी हो जाता है।  

हर महीने आते हैं,करीब चार सौ आवेदन

इंदौर प्राधिकरण में अभी लीज नवीनीकरण मामलों में भी ऑनलाइन आवेदन की व्यवस्था है। हर महीने करीब चार सौ आवेदन तो आते ही हैं। ऑनलाइन आवेदन करने वाले उपभोक्ता को अपने आवेदन की बाकी प्रक्रिया जानने,मांगे गए अन्य दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिये एकाधिक बार प्राधिकरण के चक्कर लगाने पड़ते हैं। प्राधिकरण की करीब 45 हजार प्रापर्टी हैं,जिनसे जुड़े संबंधित उपभोक्ता को ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। ऑनलाइन आवेदन करने वाले उपभोक्ता को अपने आवेदन का निराकरण ना होने तक सतत प्राधिकरण आना-जाना पड़ता है। इससे उपभोक्ता का समय बर्बाद होने के साथ ही प्राधिकरण कर्मचारियों पर भी भीड़ का दबाव पड़ता है।

घर बैठे मैसेज पर मिल जाएगी सारी जानकारी

प्राधिकरण में नए साल से बदल रही व्यवस्था से उपभोक्ता का टेंशन कम करने वाली तो हो ही जाएगी। सिंगल विंडो से आगे की इस प्रक्रिया में उसे प्राधिकरण के बार-बार चक्कर लगाने से भी राहत मिलेगी। आईटी के जरिए की जाने वाली व्यवस्था में आवेदक घर बैठे ही,लीज नवीनीकरण संबंधी आवेदन कर सकेगा। उसके आवेदन में चाही गई जानकारी उसे अपने मोबाइल या ई-मेल पर मिल जाएगी। आवेदन के साथ लगाए जाने वाले दस्तावेजों में कमी का मैसेज मिलने पर,वह घर से ही संबंधित दस्तावेज स्कैन कर के भेज सकेगा।

विवादास्पद प्रकरणों में ही आना पड़ेगा

लीज संबंधी अधिकांश मामलों का निराकरण ऑनलाइन करने के साथ यह भी निगरानी रखेंगे कि उपभोक्ता को राहत मिल रही है या नहीं। जियो टैग इमेज के साथ इंजीनियर मौके पर जाएगा,प्रापर्टी का अवलोकन कर रिपोर्ट प्रस्तुत करेगा, जिसकी ऑनलाइन संबंधित जानकारी उपभोक्ता को भी उसी वक्त पता चल जाएगी।  लीज संबंधी ऐसे मामले जिनमें न्यायालयीन विवाद है या आमने-सामने बैठाए बिना निराकरण संभव नहीं है,बस ऐसे ही मामलों वाले उपभोक्ता को प्राधिकरण आना पड़ेगा। ऐसे आवेदकों को भी बार-बार बुलाने की अपेक्षा विभागीय अधिकारियों के साथ एक बैठक में ही निराकरण हो जाए,यह प्रयास प्राधिकरण का अब रहेगा।

साबित हो रहा, आईएसबीटी सफेद हाथी

आईएसबीटी के लिए पांचवीं बार टेंडर की तैयारी कुमेड़ी में प्राधिकरण द्वारा करीब 100 करोड़ की लागत से बनाया,अंतरप्रांतीय बस टर्मिनल-आईएसबीटीआईडीए के लिए अब सफेद हाथी साबित हो रहा है। अब तक इसके संचालन के लिये ऐसी एजेंसी नहीं मिली है,जो तय किए मानदंडों और शर्तो को पूरा कर सके। अब पांचवीं बार भी टेंडर जारी करने की तैयारी है। एजेंसी नहीं मिलने से आधुनिक सुविधाओं से लैस बस टर्मिनल धूल खा रहा है। जिन कंपनियों ने पूर्व में टेंडर भरे थे,उन्हें बस स्टैंड संचालन का अनुभव नहीं था। इनमें ऐसी एजेंसियों ने रुचि दिखाई थी,जिसके पास या तो अस्पताल या मॉल आदि संचालित करने का ही अनुभव था। गौरतलब है कि चौथी बार में 3 कंपनियां आई थी,इनमें से 2 तो प्रारंभिक दौर में ही बाहर हो गई थी। तीसरी कंपनी तकनीकी जांच में खरी नहीं उतर सकी थी। आईडीए अफसरों ने बड़ी कंपनी नहीं मिलने पर ऐसा रास्ता निकाला था कि ऐसी दो छोटी कम्पनी मिल जाए,जिसमें से एक प्रबंधन ओर दूसरी रखरखाव कर सके। लेकिन इसमें भी किसी कंपनी ने रुचि नहीं दिखाई है।

शर्तों में संशोधन किया, लेकिन बात नहीं बनी

आईडीए ने आईएसबीटी के संचालन के लिए कुछ शर्तों में बदलाव भी किया है। सिक्यूरिटी राशि 5 करोड़ से घटाकर 4 करोड़ कर दी गई है और मासिक लीज 5 लाख से घटाकर 4 लाख की गई है। शर्तों में संशोधन करने के बाद भी बात नहीं बनी है। आईएसबीटी के रखरखाव पर आईडीए अभी तक लाखों रुपए खर्च कर चुका है।

नई ऑनलाइन व्यवस्था शुरु कर रहे

लीज संबंधी मामलों में नए साल से नई ऑनलाइन व्यवस्था को शुरु कर रहे हैं, इसके बाद फ्री होल्ड मामलों को भी इस नई व्यवस्था से जोड़ेंगे। व्यवस्था में आवेदक घर बैठे ही,लीज नवीनीकरण संबंधी आवेदन कर सकेगा। लीज नवीनीकरण मामलों के साथ ही ई-फाइलिंग सिस्टम भी नए साल से शुरु हो जाएगा ।

डॉ.परीक्षित झाड़े- सीईओ विकास प्राधिकरण,इंदौर