2 जिलों के 2 सिंह पुलिस कप्तानों की लगातार कई बड़ी सफलता-अब तो सिर्फ आगे मुख्य माफिया के खुलासे की ही है दरकार
2 जिलों के 2 सिंह पुलिस कप्तानों की लगातार कई बड़ी सफलता-अब तो सिर्फ आगे मुख्य माफिया के खुलासे की ही है दरकार
कही झाबुआ पुलिस की तरह अलीराजपुर पुलिस की भी जांच,सवालों के घेरे में तो नहीं आ जायेगी?
41दिन बीत जाने के बाद भी शराब माफिया को पकड़ने में क्यो नाकाम है,पुलिस प्रशासन-जांच में देरी,यह क्या दर्शाती है?
झाबुआ/आलीराजपुर। संजय जैन-सह संपादक। आंबुआ पुलिस ने पिछले माह 17 नवम्बर को जोबट क्षेत्र की ओर से एक ट्रक, जिसका क्रमांक MP 09 HG 0431से थाना प्रभारी आंबुआ उपनिरीक्षक मोहनसिंह डावर के नेतृत्व में ट्रक की घेराबंदी कर रोका गया था। वाहन चालक को नीचे उतारकर पूछताछ की गई थी,जिसने अपना नाम केशरसिंह पिता मोहनसिंह मंडलोई, उम्र 43 वर्ष, निवासी ग्राम मोरीपुरा, मोहल्ला पटेलपुरा, तहसील गंधवानी, जिला धार का होना बताया था। वाहन में भरे माल के संबंध में पूछताछ करने पर चालक ने ट्रक में बियर की पेटियाँ होना स्वीकार किया था। उल्लखनीय है कि उसने पुलिस टीम को शराब परिवहन हेतु किसी भी प्रकार का वैध लाइसेंस अथवा परमिट प्रस्तुत ही नहीं कर सका था। इस पर पंच साक्षियों तथा पुलिस बल की उपस्थिति में वाहन की विधिवत तलाशी ली गई थी। ट्रक पर लगी तिरपाल हटाकर देखे जाने पर उसमें बड़े पैमाने पर Mount 6000 एवं Mount 600 Beer की पेटियाँ भरी पाई गईं थी। रात का समय होने एवं पर्याप्त प्रकाश उपलब्ध न होने के कारण ट्रक को थाना परिसर में सुरक्षित रूप से खड़ा कर, वहीं पंचान की मौजूदगी में सभी पेटियाँ नीचे उतरवाकर गिनती की गई थी।
62 लाख 56 हजार की शराब की थी जब्त
जाँच में कुल 1हजार 330 पेटियाँ, थी, जिनमें कुल 31 हजार 920 बियर के टिन पाए गए थे। प्रत्येक टिन में 500 मि.ली. बियर होने से कुल मात्रा 15 हजार 960 लीटर निर्धारित हुई थी। इस अवैध शराब की अनुमानित कीमत 42 लाख 56 हजार तथा पकड़े गए ट्रक की कीमत लगभग 20 लाख आँकी गई थी। इस प्रकार कुल जब्ती का मूल्य 62लाख 56 हजार हुआ था।
आरोपी केशरसिंह ने भारी मात्रा में अवैध शराब का परिवहन किया था, जो आबकारी अधिनियम की धारा 34(2) एवं 46 के अंतर्गत थाना अम्बुआ में अपराध क्रमांक 278/2025, धारा 34(2), 46 आबकारी अधिनियम के अंतर्गत प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना प्रारम्भ कर अवैध शराब परिवहन के स्त्रोतों के संबंध में अभी तक जांच की जा रही है। इस शराब जब्ती के उल्लेखनीय कार्य की पुष्टि थाना प्रभारी मोहनसिंह डावर ने की थी।
मामले का पर्दाफाश सहज ही हो सकता है, कुछ इस तरह से
1-अलीराजपुर पुलिस कप्तान रघुवंश सिंह की प्रशंसनीय कार्यशैली के तहत जब्त अवैध शराब की पेटियों पर अंकित बेच नंबर से सीधे तौर से आसानी से यह पता भी लगाया जा सकता है कि यह शराब वैध थी या अवैध ? यदि वैध थी तो चालक के पास वैध लाइसेंस अथवा परमिट क्यो नही थी ? पुलिस प्रशासन यह भी जांच करें कि किस डिपो से किस ठेकेदार के नाम से इस बल्क शराब का आवंटन किया गया था ? उपरोक्त बातों की यदि प्रशासन दृढ़ इक्षा और ईमानदारी से जांच करेगी,तो सहज ही वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है,ऐसा हमारा मानना है।
2-यदि जब्त वाहन के रजिस्ट्रेशन नंबर फर्जी है तो,उसके चेचिस नंबर से ही बड़ी आसानी से पता लगाया जा सकता है कि इसका मालिक कौन है?
3-सबसे महत्वपूर्ण गिरफ्तार ट्रक ड्राइवर से सख्ती से पूछताछ कर,इस बात का पता बड़ी ही आसानी से चल सकता कि इसको परिवहन करने वाला असली माफिया कौन है?
कही पुलिस की जांच सवालों के घेरे में,तो नहीं आ जायेगी?
अक्सर देखा जाता है कि पुलिस चोर या मर्डर करने वाले को तो तुरंत गिरफ्तार कर तत्काल मशरूका जब्त कर लेती है। साथ कार्यवाही कर न्यायालय में प्रकरण तुरंत भेज भी देती है। वही दूसरी ओर आलीराजपुर पुलिस ने पिछले माह 17 दिसंबर को अवैध शराब से भरा ट्रक जब्त किया था,जिसमे 62 लाख हजार रुपये से अधिक की अवैध शराब,ड्राइवर और ट्रक को जब्त किया था। इस मामले को आज सामने आए लगभग 41 दिन भी बीत चुके है,लेकिन पुलिस की जांच न तो आज तक खत्म ही नहीं हुई है और न ही असली शराब सप्लायर पकड़ में आया है। सूत्रों नुसार पुलिस के पास शायद पुख्ता सबूत भी है,तो फिर जांच में देरी क्या दर्शाती है ? 2 जिलों के 2 सिंह पुलिस कप्तानों की लगातार कई बड़ी सफलता के बाद अब तो सिर्फ आगे मुख्य माफिया के खुलासे की ही है दरकार यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा ?

