साहब उठें तो,क्यों उठें कुर्सी से?-प्रदेश की राजनैतिक और प्रशासनिक हल-चल पर अलग हट कर,संघर्ष से सिद्धि की विशेष पेशकश संजय जैन-सह संपादक की कलम से
साहब उठें तो,क्यों उठें कुर्सी से?-प्रदेश की राजनैतिक और प्रशासनिक हल-चल पर अलग हट कर,संघर्ष से सिद्धि की विशेष पेशकश संजय जैन-सह संपादक की कलम से
साहब उठें तो,क्यों उठें कुर्सी से?
झाबुआ/इंदौर। संजय जैन-सह संपादक। मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव हर आदमी के प्रति अपनी सौजन्यता दिखाते हैं तो जरूरी नहीं कि मातहत अधिकारी भी ऐसी सहजता दिखाएं। एक साहब,कमिश्नर कार्यालय में हैं। तब तो साहब को लोग समस्या सुनाने,ज्ञापन देने भी आएंगे ही। साहब को ज्ञापन देने वाला हर प्रतिनिधिमंडल तब अचकचा जाता है,जब वो सब तो ज्ञापन देते वक्त खड़े रहते हैं,सोचते हैं ेकि साहब भी खड़े होकर ज्ञापन लेने की उदारता दिखाएंगे,लेकिन साहब उठने की सौजन्यता नहीं दिखाते। शायद यह भी कारण हो कि किस किस के लिए कुर्सी से उठें। शायद यही कारण है कि साहबों की ऐसी आदत के कारण ही सीएम ने अपने आप को आम आदमी जैसा ढाल लिया है, किसी को एहसास ही नहीं होने देते कि वो प्रदेश के मुखिया हैं।
सीएम के गृह जिले में स्कूल के लिये बुजुर्ग अंबाराम की पदयात्रा
उज्जैन जिले की नागदा तहसील के ग्राम भड़ला निवासी 79 वर्षीय अंबाराम परमार वर्षों से गांव में स्कूल भवन निर्माण की मांग कर रहे हैं । सुनवाई नहीं होने से आहत होकर उन्होंने अब तक दिए गए 81 आवेदनों की माला पहनकर 90 किलोमीटर पैदल सफर तय करते हुए,कलेक्टर कार्यालय में पहुंचकर प्रशासन का ध्यान खींचा। अंबाराम परमार ने कहा कि वे तीन दिन पैदल चलकर उज्जैन पहुंचे हैं,ताकि अधिकारियों को बच्चों की बदहाली दिखाई जा सके। उनका कहना है सबसे पहले मेरे गांव में स्कूल बनाइए,फिर बाकी मांगों पर बात होगी। इसके साथ ही उन्होंने 51 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन भी सौंपा। ग्राम भड़ला,जो जिला मुख्यालय से करीब 90 किलोमीटर दूर स्थित है, यहां 13 वर्षों से स्कूल भवन ही नहीं है। प्राथमिक स्कूल की कक्षाएं,गांव के ही बुजुर्ग अंबाराम परमार के आंगन में संचालित हो रही हैं। कभी झोपड़ी तो कभी पेड़ के नीचे बच्चों को बैठाकर पढ़ाया जाता है,बारिश और गर्मी में बच्चों की पढ़ाई सबसे ज्यादा प्रभावित होती है।
अटल जी की मूर्ति नहीं,पेंटिंग रहेगी
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव आज दोपहर ग्वालियर आएंगे और कल वे मंच पर सिर्फ दो घंटे ही रहेंगे। अटल जयंती शताब्दी समारोह के समापन पर होने वाले कार्यक्रम के मंच पर अब अटल जी की प्रतिमा की जगह,उनकी आदमकर पेंटिंग रखी जाएगी। शिंदे की छावनी पर पुष्पांजलि की तैयारी भी रहेगी। इस कार्यक्रम में लगभग 50 हजार लोग जुटाने का लक्ष्य है। इनके लिए 935 बसें लगेंगी। बसों पर जिलों के हिसाब अलग-अलग रंग के कूपन चस्पा होंगे। 17 पार्किंग वीआईपी,सरकारी व भाजपा नेताओं के वाहनों के लिए रहेंगी। अनुमान है कि इनके 2 हजार 500 वाहन पार्क होंगे। इसकी तैयारियों को लेकर ही एडीएम सीबी प्रसाद और एडिशनल एसपी अनु बेनीवाल सहित अन्य अधिकारियों ने बैठक भी कर ली है।
कमिश्नर की फटकार का हुआ असर
संभागायुक्त डॉ.सुदाम खाड़े ने देवी अहिल्या केंद्रीय ग्रंथालय की सचिव लिली डाबर को फटकार नहीं लगाई होती,तो दुआ सभागृह डेढ़ महीने बाद भी शुरू नहीं होता। कमिश्नर को मीडिया से जब जानकारी मिली कि दुआ सभागृह तैयार हो चुका है,लेकिन समिति सचिव शुरू ही नहीं कर रही हैं। उन्होंने लिली डाबर को बुलाया और जानकारी ली और फटकार लगाई कि चालू नहीं किया,तो सस्पेंड कर दूंगा। तब कहीं जाकर दुआ सभागृह शुरु तो हो गया,लेकिन चार गुना किराया वृद्धि के कारण आज तक बुकिंग नहीं हुई है। अब तो कमिश्नर ने इनको प्रभारी ग्रंथालय के पद से आदेश जारी कर हटा भी दिया है।
मौका ही नहीं,मिला सांसद को
डेली कॉलेज में अटल जी की स्मृति में हुए कार्यक्रम में सांसद लालवानी के साथ तो चोट हो ही गई। मुख्य अतिथियों सहित तिवारी परिवार और बाकी लोगों को बोलने का मौका भी मिला,बस सांसद शंकर लालवानी को ही कार्यक्रम में आभार व्यक्त करने तक का मौका भी नहीं मिला। समापन से पहले ही बीएसएफ के बैंड ने राष्ट्रगान बजा दिया, इस के समाप्त होते ही उपराष्ट्रपति सहित अन्य अतिथि मंच से निकलकर रवाना हो गए।

