लगातार प्रीतमलाल दुआ सभागृह-इंदौर पर संघर्ष से सिद्धि की विशेष रिपोर्ट संजय जैन,सह-संपादक की कलम से
लगातार प्रीतमलाल दुआ सभागृह-इंदौर पर संघर्ष से सिद्धि की विशेष रिपोर्ट संजय जैन,सह-संपादक की कलम से
सांसद शंकर लालवानी का हुआ दोहरा रवैया उजागर
दुआ सभागृह-इंदौर पीपीपी मॉडल पर 21 साल पहले 1.26 करोड़ में बना था,अब नवीनीकरण पर खर्च हुए दो करोड़ -नियमानुसार दुआ सभागृह को फंड जनरेटिंग मशीन नहीं बना सकते
झाबुआ/इंदौर। संजय जैन-सह संपादक। प्रीतमलाल दुआ सभागृह इंदौर के नवीनीकरण- सौंदर्यीकरण पर किये गए दो करोड़ रुपए खर्च पर सांस्कृतिक संस्थाएं आश्चर्य व्यक्त कर रही हैं। जब तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह चौहान ने 2009 में दुआ सभागृह का लोकार्पण किया था,तब सर्वाधिक दान देने वाले प्रीतमलाल दुआ के सहयोग की प्रशंसा की थी। पीपीपी मॉडल पर निर्मित दुआ सभागृह पर तब 1.26 करोड़ रुपये खर्च हुए थे और 26 साल बाद इसके मात्र नवीनीकरण पर ही 2 करोड़ रुपये खर्च होना बताया जा रहा है। आपको बता दे कि पीपीपी मॉडल पर निर्मित किए गए दुआ सभागृह संचालन के बायलाज में साफ लिखा है,इसे फंड जनरेटिंग मशीन नहीं बना सकते हैं।
नियमानुसार संचालन के लिये ग्रंथपाल पदस्थ किये जाने चाहिए
प्रदेश में कुल पांच केंद्रीय ग्रंथालय हैं। नियमानुसार इनके संचालन के लिये ग्रंथपाल ही पदस्थ किए जाने चाहिए,लेकिन सरकार द्वारा विभागीय पदोन्नति नहीं किए जाने का ही नतीजा है कि लोक शिक्षण विभाग द्वारा हायर सेकंडरी स्कूल के प्राचार्यों को इस पद का प्रभार दिया जा रहा है। राजनीतिक जुगाड़ में माहिर प्राचार्य केंद्रीय ग्रंथालय में रिक्त ग्रंथपाल के पद पर नियुक्ति करा लेते हैं। जैसे लिली डाबर पेडमी के स्कूल में प्राचार्य थीं और अब प्रभारी ग्रंथपाल केंद्रीय अहिल्या लायब्रेरी में पदस्थ हो गईं है।
सांसद से सिफारिशी पत्र भी लिखवा लिया
किराया वृद्धि और आर्थिक अनियमितता संबंधी मामला तूल पकड़ने के बाद तत्काल प्रभाव से लिली डाबर को खजराना हासे स्कूल प्राचार्य पद पर पदस्थ करने के आदेश जारी हो गए थे। इस आदेश के बाद भी उन्होंने प्राचार्य पद पर ज्वाइन नहीं किया,उल्टे प्रभारी क्षेत्रीय ग्रंथपाल पद पर बनाए रखने के लिये शिल्पा गुप्ता-आयुक्त लोक शिक्षण शिक्षा के नाम, सांसद शंकर लालवानी से सिफारिशी पत्र लिखवा लिया। प्राप्त जानकारी अनुसार लोक शिक्षण विभाग ने जबलपुर से हर्षिता डेविड को इंदौर पदस्थ किया है,वो जल्द ही एक-दो दिन में ज्वाइन भी कर सकती हैं।
सांसद का भी दोहरा रवैया हुआ उजागर
इस विवादित मामले में सांसद शंकर लालवानी का भी दोहरा रवैया उजागर हुआ है। उल्लखनीय है मामले ने जब तूल पकड़ी थी,तब सांसद ने बताया था कि लिली डाबर के नाम से मैंने सिफारिशी पत्र लिखा ही नही है,मैं इसको दिखवाता हूं। जिसका उल्लेख कल हमने इसी समाचार पत्र में कमिश्नर सुदाम खाड़े को रखा धोखे में नामक शीर्षक से समाचार भी प्रकाशित किया था। यही नहीं साथ ही उन्होंने यह भी बताया था कि वो केंद्रीय ग्रंथालय की परामर्शदात्री समिति के सदस्य हैं,लेकिन की गई चार गुना किराया वृद्धि को लेकर उन्हे कोई जानकारी ही नहीं है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार सांसद ने लिली डावर के स्थानांतरण आदेश को रद्द कर,इसी पद पर रखने हेतु शिल्पा गुप्ता- आयुक्त लोक शिक्षण शिक्षा को सिफारिशी पत्र भी लिखा है । इस पत्र में उन्होंने लिखा है कि इनके कार्यों एवं सकारात्मक ऊर्जा ने बदहाल हो चुकी इंदौर की ऐतिहासिक धरोहर,इस पुस्तकालय को एक नया स्वरूप प्रदान कर ऊंचाइयां प्रदान की है। पुस्तकालय एवं समाज हित में मैं इन्हें यहीं पर कार्य करने हेतु अनुशंसा करता हूं एवं इनके आदेश को संशोधित कर पुन: अहिल्या पुस्तकालय में करना का अनुग्रह करता हूं। उपरोक्त पत्र से तो उनका दोहरे रवैये का पर्दाफाश हो गया है।
बस सिर्फ नाम ही , आपका रहेगा
तत्कालीन संभागायुक्त दास की पहल दुआ सभागृह के निर्माण के वक्त अशोक दास तत्कालीन संभागायुक्त थे। स्व.दुआ ने सर्वाधिक दान 26 लाख रु.इस शर्त पर दिए थे कि सभागार का नाम उनके नाम से होगा। इस पर संभागायुक्त दास ने पीपीपी मॉडल संबंधी नियमों का हवाला देते हुए स्पष्ट कर दिया था कि बस सिर्फ नाम ही आप का रहेगा,लेकिन सभागृह के संचालन से लेकर किसी को मुफ्त में देने जैसे हस्तक्षेप,वे नहीं कर सकेंगे। संचालन,नियुक्ति आदि के सारे अधिकार परामर्शदात्री समिति के अध्यक्ष व सीटिंग कमिश्नर के रहेंगे,जिसके मातहत समिति का सचिव ग्रंथपाल सभागृह संचालन सहित अन्य इंतजाम देखेगा।
यह मनमानी की है...समिति सचिव लिली डाबर ने
-ग्रंथालय की समिति सचिव लिली डाबर के खिलाफ सांस्कृतिक संस्थाओं का गुस्सा चार गुना किराया वृद्धि को लेकर है।
-परामर्शदात्री समिति अध्यक्ष व संभागायुक्त डॉ सुदाम खाड़े को तथ्यों की जानकारी दिए बगैर ही फाइल पर साइन करवा लिये।
-समिति के सदस्य सांसद शंकर लालवानी,इंदौर गौरव फाउंडेशन अध्यक्ष अनिल भंडारी और अतुल सेठ की नाराजगी यह है कि इतना बड़ा निर्णय लेने से पहले समिति की बैठक क्यो नहीं बुलाई गयी और क्यों फोन पर उनसे सहमति नहीं ली गयी?
-अब संस्थाओं के अध्यक्षों,रंगकर्मियों,लेखकों आदि के गुस्से का शिकार परामर्शदात्री के सदस्यों को होना पड़ रहा है।
-इस किराया वृद्धि विवाद की जानकारी भोपाल तक भी पहुंच गई है। जिला प्रशासन से वस्तुस्थिति की जानकारी मांगी गई है।
सरोज कुमार बोले,सीट तो एक भी नहीं बढ़ाई
रंगकर्मियों,कलाकारों के सलाहकार डॉ.सरोज कुमार का कहना है कि दुआ जी ने जो 26 लाख दिए थे ,वो सिर्फ अपने नामकरण के लिये दिए थे। अभी जो नवीनीकरण पर दो करोड़ के खर्च की बात सामने आई है,तो इतने भारी खर्च के बाद भी सभागृह में सीट तो एक भी नहीं बढाई है,वही की वही 120 सीटें ही हैं। गौरतलब है कि शहर की संस्थाओं के लिये यह एकमात्र किफायती सभागृह था। अब इसका किराया चार गुना बढ़ाने का तो मतलब है कि संस्थाएं,कलाकार अपना काम ही बंद कर दें। आश्चर्य जनक बात तो यह भी है कि शहर के सांस्कृतिक वातावरण से जुड़े इस मामले में कोई जनप्रतिनिधि बोलने तक को तैयार भी नहीं है।
(क्रमश:कल इसी कड़ी में पढ़िए,अगली विशेष रिपोर्ट)

