भारी ठंड की शुरुआत-सावधानी की जरूरतरू-दिल और दिमाग पर भारी पड़ रही ठंड,बुजुर्गों के साथ युवा भी हो रहे शिकार

जिले के सरकारी अस्पताल में नहीं हैं, एंजियोग्राफी जैसी सुविधा-हर साल हृदयघात से जा रही आधा सैकड़ा से ज्यादा जान

झाबुआ। संजय जैन-सह संपादक।  तापमान जैसे-जैसे नीचे जा रहा है,अस्पतालों में हृदय रोग से सबंधित मरीजों की संख्या बढ़ गई है। जिला अस्पताल के आंकड़ों पर गौर करें तो रोजाना ही आधा सैकड़ा से ज्यादा मरीज सीने में दर्द होने की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं,इससे ईसीजी जांच बढ़ गई है। हालांकि इसीजी जांच में 70 प्रतिशत मरीजों में कोई गड़बड़ी नहीं निकल रही है। फिर भी डॉक्टर मरीजों को ठंड से बचने की सलाह दे रहे हैं।

अस्पताल में नहीं हैं एंजियोग्राफी जैसी सुविधा

जिले में हृदय रोग के मरीजों की संख्या तो बढ़ रही है,लेकिन स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं बढ़ पाई हैं। जिला अस्पताल में हर वर्ष औसतन 50 से ज्यादा लोगों की मौत हृदयाघात से हो रही है। इसके बाद भी हृदय के मरीजों को सरकारी अस्पतालों में बेहतर उपचार नहीं मिल पा रहा है,संसाधनों की कमी बनी हुई है। वर्तमान में जिले हृदय रोग के मरीजों के लिए के लिए केवल जिला अस्पताल में आईसीयू ही बना है। इसमें भी पलंग की संख्या कम है। इधर जिले में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सिविल अस्पताल तो बन चुके हैं,लेकिन यहां भी संसाधनों में कोई विस्तार नहीं किया गया हैं। सभी अस्पतालों में मात्र ईसीजी और बीपी के लिए मशीनें दी गई हैं। मरीज को तकलीफ  होने पर या तो उन्हें रेफर कर दिया जाता है,या फिर दवा देकर सलाह दी जाती है। सरकारी अस्पतालों की स्थिति यह है कि एंजियोग्राफी तक की भी सुविधा नहीं है। इसके अलावा एंजियोप्लास्टी भी नहीं होती है। अस्पताल में केवल हड्डी और अन्य रोगों के लिए आपरेशन थियेटिर ही बना है। मेडिकल कार्डियोलाजिस्ट भी अपनी निजी क्लीनिक में हृदय के मरीजों की जांच तो कर रहे हैं,लेकिन आपरेशन केवल दूसरे बड़े नगरों में ही हो पा रहे हैं।

ठंड के दिनों में बरतें अधिक सावधानी

हृदयाघात-दिल का दौरा आने के लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं। ठंड के दिनों में धूम्रपान और शराब का सेवन दिल के मरीजों के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है। ठंड में शरीर की रक्त वाहिनियां पहले से ही संकुचित होती हैं और धूम्रपान से यह स्थिति और बिगड़ सकती है। इसके अलावा शराब का अधिक सेवन ब्लड प्रेशर को बढ़ाता है, जिससे दिल का दौरा पड़ने का खतरा बढ़ने लगता है।  ठंड के मौसम में बाहर निकलने का समय सीमित रखें। बाहर जाते समय कई परतों में गर्म कपड़े पहना चाहिए। साथ ही सिर और हाथों को ढकने के साथ गर्म मोजे और जूते पहनना चाहिए,कानों को भी अच्छे से ढंकना चाहिए। गर्म कपड़े पहनने और फिर शारीरिक गतिविधि में समिलित होने से ज्यादा गरमी हो सकती है। ज्यादा गरमी की वजह से रक्त वाहिकाएं अचानक फैल जाती हैं या चौड़ी हो जाती हैं जो हृदय रोग होने पर निमन रक्तचाप का कारण बन सकती है।

बढ़ रहे है हार्टअटैक के मरीज

हृदय घात या हृदय से संबंधित बीमारी लाइफ स्टाइल में बदलाव के कारण बढ़ रही है। आकस्मिक चिकित्सा विभाग में उच्च ब्लड प्रेशर से पीड़ित मरीज, सीने में दर्द की समस्या से ग्रसित मरीज आए। ठंड में श्वांस के मरीज बढ़े है। इसमें लंबे समय तक खांसी चलती है। श्वांस,अस्थमा और हार्टअटैक के मरीज बढ़ रहे है।

डॉ.एम किराड़- जिला अस्पताल, झाबुआ  

शीघ्र जांच करानी चाहिए

सामान्यत छाती,बांह या उरोस्थि के नीचे असहजता,दबाव, भारीपन, जकड़न, दबाव या दर्द होना दिल का दौरा पड़ने के संकेत है। इसी तरह पेट भरा लगना, अपच या घुटन जैसा महसूस होना, यह सीने में जलन जैसा महसूस होना, पसीना आना, पेट खराब होना, उल्टी या चक्कर आना, कमजोरी लगना, चिंता, थकान,या सांस लेने में तकलीफ  होना, तेज या असमान दिल की धड़कन होना भी,दिल का दौरा आने के लक्षण हैं। इन लक्षणों के महसूस होने पर शीघ्र ही जांच करानी चाहिए।

डॉ.बीएस बघेल- सीएमएचओ -जिला अस्पताल, झाबुआ