इसी संघर्ष से सिद्धि समाचार पत्र ने भ्रष्ट लेखापाल को निलंबित करने की संभावना जताई थी, जो सच हुई-कलेक्टर ने लेखापाल जामसिंह अमलियार को किया निलंबित

जामसिह अमलियार की पूर्व शिकायतों की भी जांच होनी चाहिए,तो हों सकते और बड़े खुलासे

झाबुआ।संजय जैन-सह संपादक।  लोकायुक्त के हाथों ट्रेप हुए भ्रष्ट लेखापाल जामसिह अमलियार को निलंबित करने का उल्लेख गुरुवार को इसी दैनिक संघर्ष से सिद्धि समाचार पत्र में प्रकाशित कर किया था,जो अगले ही दिन कल शुक्रवार को ही सच साबित भी हो गया। कलेक्टर नेहा मीना ने लोकायुक्त पुलिस इंदौर की कार्यवाही एवं रिश्वत राशि प्राप्त करने संबंधी गंभीर आरोपों को संज्ञान में लेते हुए  जामसिंह अमलियार, लेखापाल, जनजातीय कार्य विभाग, झाबुआ को म.प्र. सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के नियम 9 के अंतर्गत तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।निलंबन अवधि में जामसिह अमलियार का मुख्यालय अब खंड शिक्षा कार्यालय, रानापुर निर्धारित किया गया है। इस अवधि में उन्हें मूलभूत नियम 53 के अंतर्गत जीवन निर्वाह भत्ते की ही पात्रता रहेगी।

14 हजार 500 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों धराये थे

 लोकायुक्त पुलिस ने गुरुवार 11 दिसंबर 2025 को की गई कार्यवाही में जामसिह अमलियार को शिकायतकर्ता/आवेदक शांतिलाल वसुनिया, माध्यमिक शिक्षक, शासकीय माध्यमिक विद्यालय आम्बापाड़ा, संकुल केन्द्र हाईस्कूल बोलासा, विकासखंड पेटलावद की शिकायत पर 14 हजार 500 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया था। उसके विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम, 2018 की धारा 7 के अंतर्गत प्रकरण दर्ज किया गया है।
     
पूर्व शिकायतों की भी जांच होनी चाहिए,तो हों सकते और बड़े खुलासे

सूत्रों की माने तो पूर्व में भी इसके द्वारा किए भ्रष्टाचार को लेकर एक नहीं अनेक शिकायते हुई है। यदि मातृ शक्ति कलेक्टर उसकी भी जांच करवाए तो कई बड़े खुलासे भी हो सकते है। भोपाल-इंदौर में आर्थिक अन्वेषण ब्यूरो के द्वारा झाबुआ में पदस्थ रहे,इसी विभाग के कई अधिकारी और कर्मचारियों के विरुद्ध की गई शिकायतों की जांच भी की जा रही है,उसमें भी इसका नाम शामिल है। ऐसे भ्रष्ट लेखापाल पर सख्त कार्यवाही होनी चाहिए, ऐसा हमारा मानना है। इससे अन्य अधिकारी और कर्मचारियों को एक अच्छा सबक मिल सके भविष्य में कोई ऐसी गलती करने की हिमाकत नही कर सकेंगे।