प्रदेश की राजनीतिक और प्रशासनिक नोक-झोक पर अलग हट कर,संघर्ष से सिद्धि की विशेष पेशकश-संजय जैन-सह संपादक की कलम से
प्रदेश की राजनीतिक और प्रशासनिक नोक-झोक पर अलग हट कर,संघर्ष से सिद्धि की विशेष पेशकश-संजय जैन-सह संपादक की कलम से
प्रदेश अध्यक्ष खंडेलवाल का नवाचार नहीं,अनुशासन का डंडा है स्वयंभू लोकसभा प्रत्याशी उमा भारती मुहूर्त देखकर तय करें,विधानसभा सत्र-विजयवर्गीय सलामत रहे दोस्ताना हमारा गृहमंत्री को कैसे बताते कि मप्र के शिक्षा मंत्री का विभाग कितनी लापरवाही से काम कर रहा है? बंदर के हाथ में उस्तरा घर के संकट में उलझे,राज्यपाल थावरचंद गेहलोत सुधीर कोचर जैसे कलेक्टर,हैं कितने? प्रदेश अध्यक्ष खंडेलवाल का नवाचार नहीं,अनुशासन का डंडा है
झाबुआ/इंदौर। संजय जैन-सह संपादक। भाजपा संगठन के बड़े नेताओं को जिलों के कार्यकर्ताओं के गुस्से का सामना करना पड़ता था कि मंत्री उनकी समस्याओं को नहीं सुनत ेहै। जिलों में बड़े नेता आते भी हैं,तो पार्टी कार्यालय जाने की याद उन्हें इसलिये नहीं आती कि कुछ गिने-चुने प्रभावी नेता उनके घेरे जो रहते हैं और काम भी इन्हीं लोगों के होते हैं। आम कार्यकर्ता तो इन मंत्रियों तक पहुंच भी नहीं पाता है। ऐसी सारी जमीनी हकीकत समझने के बाद प्रदेश भाजपा संगठन ने अब यह फरमान जारी कर दिया है कि सप्ताह के पांच दिन में से हर दिन दो मंत्री-दो घंटे प्रदेश कार्यालय में बैठेंगे और कार्यकर्ताओं से मुलाकात करेंगे। इसे प्रचारित तो यह किया जा रहा है कि हेमन्त खंडेलवाल प्रदेश अध्यक्ष का यह नवाचार है लेकिन प्रदेश के कार्यकर्ताओं को अब भोपाल आने के लिये यात्रा खर्च तो करना ही होगा। यदि मंत्री जिलों के दौरे में कार्यकर्ताओं से मिलते,समस्याओं का निराकरण करते तो शायद प्रदेश भाजपा अध्यक्ष को नवाचार वाले अनुशासन का डंडा चलाने की जरूरत पड़ती ही नहीं।
स्वयंभू लोकसभा प्रत्याशी उमा भारती
भाजपा संगठन ने तो घोषणा की नहीं है,लेकिन पूर्व सीएम उमा भारती ने खुद को लोकसभा चुनाव के लिये भाजपा प्रत्याशी घोषित कर दिया है। उमा भारती ने एक यात्रा मां के नाम निकाली थी,उसी दौरान उन्होंने इस आशय की घोषणा करने के साथ यह भी स्पष्ट कर दिया था कि उनकी मप्र की राजनीति में न तो दिलचस्पी है और न ही वे सीएम बनना चाहती हैं। लेकिन अपने समर्थकों से उन्होंने यह जरूर कहा है कि कोई धोखे में मत रहना,मैं अभी 2029 का लोकसभा चुनाव लड़ने की तैयारी कर चुकी हूं।
मुहूर्त देख कर तय करें,विधानसभा सत्र-विजयवर्गीय.
शादी-ब्याह की तरह अब,विधानसभा सत्र के लिये भी मुहूर्त निकालना पड़ जाए तो आश्चर्य नहीं होगा। संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने तो विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर को इस आशय का सुझाव तक दे दिया है। इसका कारण यह है कि पांच दिन चले विधानसभा के शीतकालीन सत्र पर शादियों का सीजन भारी पड़ रहा है। आखिरी दिन सदन में ज्यादातर कुर्सियां खाली ही नजर आई,दोनों दल के कई विधायक आए ही नहीं थे। जिन विधायकों ने सवाल लगाए थे, उनमें से भी कई शादियों के चलते सदन में मौजूद नहीं रह सके,किसी के परिवार में तो किसी के रिश्तेदार की शादी थी। इसी कारण विजयवर्गीय ने विधानसभा अध्यक्ष तोमर को यह सुझाव दे दिया कि सत्र तय करने से पहले शादी के मुहूर्त भी देख लिए जाएं।
सलामत रहे दोस्ताना हमारा
महापौर और निगमायुक्त में कुछ महीने पहले तक छत्तीस के आंकड़े जैसे हालात थे। महापौर ऐसा कोई मौका नहीं छोड़ते थे,जिसमें निगमायुक्त की टीम निशाने पर नहीं रहती हो,किंतु अब बर्फ पिघल गई है। महापौर पुष्यमित्र भार्गव और निगमायुक्त दोनो मिलकर साथ में दौरे भी कर रहे हैं। यही नहीं कई बार तो दोनों यह उदारता भी दिखाने लगे हैं कि एक-दूसरे की सुविधा मुताबिक बैठक और उसके एजेंडे पर चर्चा भी कर लेते हैं। बैठक में भी,अब इन दोनों की बॉडी लैंग्वेज ऐसी रहती है कि निगम अमला समझ जाता है कि अब काम में ढिलाई की तो,दोनों हमे निपटा सकते हैं।
गृहमंत्री को कैसे बताते कि मप्र के शिक्षा मंत्री का विभाग कितनी लापरवाही से काम कर रहा है.?
इंदौर के क्षेत्र क्रमांक 3 से भाजपा विधायक राकेश शुक्ला गोलू ने स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह से पूछा था कि मेरे विधानसभा क्षेत्र में निर्माणाधीन सीएम राइज स्कूल का निर्माण कार्य कब तक पूरा होगा....? इन स्कूलों में स्वीकृत पदों और अध्ययनरत बच्चों के अनुपात में शिक्षकों की क्या व्यवस्था है...? कितनी कमी है या अधिकता है...? विधानसभा में पूछे गए उनके इस प्रश्न का स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने जवाब इस तरह दिया कि विधानसभा क्षेत्र मेहगांव अंतर्गत संचालित 2 सांदीपनि विद्यालय क्रमश मेहगांव और अमायन जिला भिंड का निर्माण कार्य माह जून 2026 तक पूर्ण होना संभावित है। बेटे की शादी का निमंत्रण केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को देने गए,विधायक गोलू शुक्ला देश के गृहमंत्री को कैसे बताते कि मप्र के शिक्षा मंत्री का विभाग कितनी लापरवाही से काम कर रहा है....?
बंदर के हाथ में उस्तरा
विधानसभा में विपक्ष का विरोध का फैंसी ड्रेस शो के रूप में जारी रहा। कांग्रेस विधायकों ने बंदर के हाथ में उस्तरा थीम पर प्रदर्शन किया। छिंदवाड़ा जिले के जुन्नारदेव से कांग्रेस विधायक सुनील उइके बंदर बनकर आए थे और उनके हाथ में सांकेतिक उस्तरा भी था। कांग्रेस ने इस प्रदर्शन के जरिए आरोप लगाया कि भाजपा सरकार उस बंदर की तरह काम कर रही है,जिसके हाथ में उस्तरा है और वह हर वर्ग के हितों पर उस्तरा सतत चला रही है। चाहे तो वो किसान,बेरोजगार विपक्ष और या फिर मीडिया ही हो।
घर के संकट में उलझे,राज्यपाल थावरचंद गेहलोत
कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गेहलोत वहां चल रहे राजनीतिक सरगर्मी पर तो नजर रख रहे हैं,लेकिन परिवार में चल रही उठापटक पर क्या करें....? आपको बता दे कि उनके पोते की पत्नी दिव्या ने दादी सास,पति,देवर और ननद पर दहेज प्रताड़ना,मारपीट,लगातार मानसिक उत्पीड़न,जान से मारने की धमकी और घर की छत से धक्का देकर चोट पहुंचाने जैसे संगीन आरोप लगा दिए हैं। रतलाम पुलिस को दिए लगभग चार पन्नों के आवेदन में शिकायतकर्ता ने घरेलू हिंसा के घटना क्रम को विस्तार से बताया है। आवेदन में उन्होंने कहा हैं कि उसका विवाह पारिवारिक रीति-रिवाज और सामाजिक स्तर के अनुरुप धूमधाम से हुआ था। विवाह के कुछ समय बाद से ही ससुराल पक्ष के लोग दहेज की मांग को लेकर उसे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करने लगे। आवेदन में यह भी उल्लेख है कि परिवार के सदस्यों ने उस पर पचास लाख रुपए लाने का दबाव बनाया। रकम न मिलने पर लगातार झगड़े,मारपीट,अपमानजनक व्यवहार तथा चरित्र-हनन जैसी हरकतें कीं। ऐसा नहीं कि दहेज प्रताड़ना से जुड़ी यह पहली अनोखी घटना है। उल्लखनीय है कि यदि मामला राज्यपाल के परिवार से जुड़ा नहीं होता,तो प्रदेश में इसकी चर्चा तक भी नहीं होती।
सुधीर कोचर जैसे कलेक्टर,हैं कितने
दमोह कलेक्टर सुधीर कोचर जिला अस्पताल और बस स्टैंड स्थित रैन बसेरों का अचानक निरीक्षण करने पहुंच गए और अव्यवस्थाएं भी देखी। जिला अस्पताल में तो एक मरीज के परिजन को रोते देखा,तो वे बेहद ही भावुक हो गए। उनके लिए यह बहुत आसान भी था कि संबंधित स्टॉफ,अधीक्षक आदि पर वे तत्काल कार्रवाई कर देते,लेकिन लोगों ने पहली बार किसी आईएएस अफसर के भीतर,ऐसी नैतिकता और मानवता देखी। उल्लेखनीय है कि अक्सर ऐसे मौकों पर अफसर अपने अधीनस्थों पर ही गुस्सा उतारते हैं। वही कलेक्टर ने बिना लाग लपेट के,इस सब के लिए खुद को ही जिम्मेदार माना क्योंकि उनका मानना है कि मातहत तो बड़े अधिकारी से ही सब सीखते और समझते हैं। यहां यदि अब तक अव्यवस्था दूर नहीं हुई हैं,तो इसके लिये मैं ही दोषी हूं।

